बजट से पहले घबराहट हावी, शेयर बाजार में दिखी गिरावट
आगामी यूनियन बजट के ऐलान से पहले निवेशकों का सेंटिमेंट (Sentiment) सतर्क हो गया, जिसका असर शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 को भारतीय शेयर बाजारों पर साफ दिखा। देश के बेंचमार्क इंडेक्स, सेंसेक्स (Sensex) में 0.36% की गिरावट आई और यह 82,269.27 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 50 (Nifty 50) इंडेक्स भी 0.39% लुढ़ककर 25,320.30 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट की एक वजह फॉरेन इंस्टीटूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की बिकवाली रही, जिसने बाजार की लिक्विडिटी (Liquidity) पर दबाव डाला। इसके साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपए में आई कमजोरी ने भी निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दीं। ऐतिहासिक तौर पर, बाजार बजट पेश होने से पहले अक्सर सुस्त या कमजोर रहते हैं, और बजट के बाद की स्पष्टता पर ही मजबूती की उम्मीद करते हैं।
मेटल और IT सेक्टर बने बड़ी गिरावट का कारण
आज के कारोबार में खास तौर पर मेटल (Metal) और आईटी (IT) सेक्टर्स में भारी बिकवाली देखने को मिली। बड़ी कंपनियों में टाटा स्टील (Tata Steel) सबसे ज्यादा पिटने वाले शेयरों में से एक रहा। 30 जनवरी 2026 को इसके शेयर में 4.59% की तेज गिरावट दर्ज की गई और यह ₹193.04 पर बंद हुआ। बता दें कि कुछ दिन पहले ही टाटा स्टील ने मजबूत फाइनेंशियल रिजल्ट्स (Financial Results) के दम पर ₹192.40 का ऑल-टाइम हाई (All-time High) छुआ था, लेकिन अब मुनाफावसूली का दबाव हावी हो गया। मेटल सेक्टर की अन्य कंपनियों में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (Hindalco Industries) 5.69% और कोल इंडिया लिमिटेड (Coal India Ltd) 3.77% तक गिर गए। आईटी सेक्टर, जो हाल के दिनों में कुछ बेहतर प्रदर्शन कर रहा था, वह भी वैश्विक दबावों के कारण दबाव में आ गया। अमेरिका में खर्चों को लेकर अनिश्चितता और ब्याज दरों में बदलाव की आशंकाओं के कारण इस सेक्टर पर असर देखा गया।
फंडामेंटल Snapshot और आगे की राह
जनवरी 2026 तक, निफ्टी 50 का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो करीब 21.76 से 22.34 के बीच रहा, जबकि 28 जनवरी 2026 तक इसका मार्केट कैप (Market Cap) लगभग ₹91,86,500 करोड़ था। साल 2026 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ (Real GDP Growth) का अनुमान 7.4% है, जो मजबूत आर्थिक बुनियाद को दर्शाता है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताएं और घरेलू फिस्कल (Fiscal) मुद्दे बाजार की दिशा तय करेंगे। आगामी 2 फरवरी 2026 को पेश होने वाले यूनियन बजट से पहले बाजार में वोलेटिलिटी (Volatility) जारी रहने की उम्मीद है। जानकारों का मानना है कि बजट में ग्रोथ बढ़ाने वाले उपायों और फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) पर दी जाने वाली स्पष्टता के बाद ही बाजार में कोई मजबूत ट्रेंड उभर सकता है।