बाज़ार में भारी उथल-पुथल: वजहें क्या थीं?
बुधवार, 25 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों ने एक नाटकीय इंट्राडे उलटफेर देखा। शुरुआती तेज़ी वैश्विक व्यापार विवादों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के दबाव में फीकी पड़ गई। यह अस्थिरता मिड-कैप और स्मॉल-कैप सूचकांकों के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद देखी गई, जो बाज़ार में एक विभाजन का संकेत देता है।
अमेरिकी टैरिफ और ईरान तनाव का असर
अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा भारत से सोलर आयात पर 126% का प्रारंभिक शुल्क लगाने के फैसले ने घरेलू बाज़ार को झकझोर दिया। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ संबंधी टिप्पणियों ने भी चिंताएं बढ़ाईं। इन सबके बीच, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को सात महीने के उच्च स्तर $71.66 प्रति बैरल (ब्रेंट क्रूड) तक पहुंचा दिया, जिसका सीधा असर भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा। भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले 90.9 के स्तर के करीब ट्रेड कर रहा था, जिसने बाज़ार की घबराहट को और बढ़ाया।
Nifty 50 ने दिन के दौरान 25,653 का उच्च स्तर छुआ, लेकिन अंत में 57.85 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 25,482.50 पर बंद हुआ। इसी तरह, Sensex 82,957.91 तक पहुंचने के बाद 50.15 अंकों की तेज़ी के साथ 82,276.07 पर बंद हुआ, जबकि पूरे दिन में इसमें लगभग 800 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया।
सेक्टरों में बड़ा बंटवारा: PSU बैंक चमके, IT धराशायी
PSU बैंकों की शानदार चाल:
बाज़ार की उथल-पुथल के विपरीत, Nifty PSU Bank इंडेक्स ने अपनी प्रभावशाली रैली जारी रखी और लगातार छठे महीने बढ़त दर्ज करते हुए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया। फरवरी 2026 में अब तक इस सेक्टर में 5.5% की तेज़ी आई है। इसका मुख्य कारण पब्लिक सेक्टर बैंकों के रिकॉर्ड-तोड़ Q3 FY26 नतीजे, बेहतर एसेट क्वालिटी और मजबूत नेट इंटरेस्ट इनकम ग्रोथ रहा। देश के सबसे बड़े बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने ₹21,028 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक तिमाही नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जिससे इसका शेयर 52-हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
IT सेक्टर पर AI का साया और FII की बिकवाली:
वहीं, Nifty IT इंडेक्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा। फरवरी 2026 में यह सेक्टर 21% से अधिक गिरा है, जो 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद इसका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन रहा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के पारंपरिक IT सेवाओं को बाधित करने की आशंकाओं, खासकर AI स्टार्टअप Anthropic की प्रगति के बाद, ने शेयरों में भारी गिरावट और बाजार पूंजीकरण में फरवरी में ही ₹6.4 लाख करोड़ की कमी ला दी। TCS और HCL Technologies जैसे दिग्गज शेयरों में भी बड़ी गिरावट आई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भी इस सेक्टर से भारी निकासी की है, जिससे उनकी होल्डिंग चार साल के निचले स्तर पर आ गई है।
मेटल्स की चमक और व्यापक बाज़ार की मजबूती:
Nifty Metal इंडेक्स ने दिन के कारोबार में करीब 2.60% की तेज़ी दर्ज की। फ्रंटलाइन सूचकांकों की अस्थिरता के बीच, व्यापक बाज़ार खंडों ने मजबूती दिखाई। Nifty Midcap 100 और Smallcap 100 इंडेक्स क्रमशः 0.58% और 0.94% ऊपर बंद हुए, जो Nifty 50 से बेहतर प्रदर्शन है।
मूल्यांकन की स्थिति (Valuation Snapshot)
प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन पर नज़र डालें तो Reliance Industries करीब 23x के P/E पर ट्रेड कर रहा है। Bajaj Auto का P/E लगभग 31-32x है, जो इंडस्ट्री औसत 34.38x से कम है। Tata Steel का P/E हालिया आंकड़ों के अनुसार 29.22x से लेकर 39.3x तक रहा है।
विशेषज्ञों का डर: आगे क्या?
बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता, ईरान-अमेरिका तनाव से तेल की आपूर्ति में बाधा और AI द्वारा IT सेक्टर में संरचनात्मक बदलावों का खतरा प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। भारतीय रुपये का गिरना भी आयातित महंगाई को बढ़ा सकता है और विदेशी निवेश को हतोत्साहित कर सकता है। PSU बैंकों का प्रदर्शन मजबूत है, लेकिन किसी भी प्रणालीगत समस्या या सरकारी नीति में बदलाव से इसे प्रभावित होने का खतरा है।
आगे का रास्ता
निवेशक शुक्रवार को आने वाली भारत की नई GDP सीरीज का इंतज़ार करेंगे। विश्लेषकों के अनुसार, Nifty के लिए 25,600-25,650 के स्तर पर तत्काल प्रतिरोध (Resistance) है, जबकि 25,350 से नीचे जाने पर यह 25,100-25,200 तक गिर सकता है। बाज़ार की दिशा वैश्विक व्यापार और भू-राजनीतिक परिदृश्य पर निर्भर करेगी।