Indian Stock Market: सेंसेक्स-निफ्टी चमके, पर 'असली खेल' मिड-कैप्स में! RBI के नए नियम बने सिरदर्द

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Stock Market: सेंसेक्स-निफ्टी चमके, पर 'असली खेल' मिड-कैप्स में! RBI के नए नियम बने सिरदर्द
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार के लिए दिन का अंत शानदार रहा, Nifty **25,650** के पार और Sensex **83,277** के आंकड़े को छू गए। यह तेजी मुख्य रूप से बड़े लार्ज-कैप (Large-cap) शेयरों, खासकर बैंक और एनर्जी सेक्टर की वजह से आई। हालांकि, बाज़ार की चौड़ाई (Market Breadth) कमजोर दिखी, क्योंकि एडवांस-डिक्लाइन रेशियो (Advance-Decline Ratio) बताता है कि गिरावट वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से ज़्यादा थी। इसके अलावा, RBI के नए नियमों ने BSE और Angel One जैसे कुछ मिड-कैप्स को जोरदार झटका दिया।

बाज़ार में उछाल, पर परतों में छिपी चिंताएँ

16 फरवरी 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों ने ज़बरदस्त वापसी की। BSE Sensex 650 अंकों की छलांग लगाकर 83,277.15 पर बंद हुआ, वहीं NSE Nifty 212.75 अंक चढ़कर 25,682.75 पर जा पहुंचा। इस तेज़ी का नेतृत्व बैंकिंग सेक्टर ने किया, जिसमें HDFC Bank, Canara Bank और Axis Bank जैसे बड़े नाम शामिल थे। Nifty Bank इंडेक्स में 762 अंकों की भारी बढ़त देखी गई। Reliance Industries और ITC जैसे दिग्गजों ने भी बेंचमार्क इंडेक्स की बढ़त में अहम योगदान दिया।

लेकिन, इन बड़े सूचकांकों की मजबूती के पीछे एक अलग कहानी थी। NSE पर एडवांस-डिक्लाइन रेशियो 2:3 रहा, जिसका मतलब है कि बाज़ार में चढ़ने वाले शेयरों से ज़्यादा शेयर गिरे। यह दिखाता है कि तेज़ी मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक ही सीमित थी, और बाज़ार की नींव उतनी मज़बूत नहीं थी जितनी ऊपर से दिख रही थी।

RBI के नियमों का मिड-कैप्स पर 'ग्रहण'

इस बीच, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के कैपिटल मार्केट एक्सपोज़र (Capital Market Exposure) को लेकर जारी किए गए नए नियमों ने कई बाज़ार प्रतिभागियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले इन सख्त नियमों में बैंक गारंटी (Bank Guarantee) और प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग (Proprietary Trading) के लिए ज़्यादा कोलैटरल (Collateral) की आवश्यकताएं शामिल हैं।

इसके चलते, एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। BSE Ltd के शेयर लगभग 7% से 10% तक लुढ़क गए, क्योंकि एनालिस्टों का अनुमान है कि इन नियमों का एक्सचेंज की कमाई पर 10% तक का असर पड़ सकता है। Angel One के शेयर में भी 6% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ये उपाय सिस्टमैटिक रिस्क (Systemic Risk) को कम करने के लिए हैं, लेकिन इन्होंने प्रोप्रायटरी ट्रेडिंग फर्मों और इंटरमीडियरीज़ (Intermediaries) के लिए तुरंत लागत का दबाव और फंडिंग की अनिश्चितताएं पैदा कर दी हैं।

सेक्टरों में बिखराव और कमाई का दबाव

जहाँ बैंकिंग सेक्टर ने बाज़ार को संभाला, वहीं अन्य सेक्टर्स में प्रदर्शन मिला-जुला रहा। कुछ मिड-कैप स्टॉक्स में अच्छी ख़ासियत दिखी। Q3 नतीजों के बाद GMR Airports के शेयर में करीब 7% का उछाल आया, जबकि Precision Wires ने अपने शेयर में लगभग 15% की बढ़त के साथ रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की। Torrent Pharma ने उम्मीद के मुताबिक नतीजे पेश करने के बाद अच्छा प्रदर्शन किया, और Natco Pharma को Semaglutide के लिए नियामक मंज़ूरी मिलने के बाद शेयर में करीब 7% की बढ़ोतरी हुई।

वहीं, कुछ कंपनियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। Ola Electric की Q3 की कमाई आधी रह गई और घाटा बढ़ा रहा, जिससे कंपनी के शेयर में 7% की गिरावट आई। IRB Infrastructure के शेयर 4% से ज़्यादा गिरे, क्योंकि कंपनी ने Q3 में 7.62% की राजस्व (Revenue) गिरावट और नेट प्रॉफ़िट (Net Profit) में 96.50% की भारी कमी दर्ज की।

वैल्यूएशन और जोखिम

अलग-अलग कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) में भी ज़बरदस्त अंतर देखने को मिला। Natco Pharma का P/E रेशियो (Price-to-Earnings ratio) लगभग 7.73-9.53 है, जो इसे अपने साथियों जैसे Torrent Pharma (P/E ~60.68) या Axis Bank (P/E ~15.72) की तुलना में आकर्षक बनाता है। Angel One का P/E लगभग 31.82-33.46 सेक्टर औसत से ज़्यादा है, जबकि GMR Airports का P/E नेगेटिव -334.46 था, जो मौजूदा घाटे को दर्शाता है। Precision Wires का P/E करीब 43.02 है और BSE का 58.51

बाज़ार की रिकवरी के बावजूद, कई छिपे हुए जोखिम मौजूद हैं। बड़े सूचकांकों और कमज़ोर बाज़ार चौड़ाई के बीच का अंतर बताता है कि यह रैली व्यापक नहीं है और इसमें गिरावट का खतरा हो सकता है। RBI के नए नियम ब्रोकिंग और एक्सचेंज सेक्टर के लिए तुरंत परिचालन चुनौतियाँ पैदा कर रहे हैं। IRB Infra और Ola Electric जैसी कंपनियों के नतीजे उनकी कमाई की भेद्यता (Earnings Vulnerability) को उजागर करते हैं।

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