कच्चे तेल ने बढ़ाई महंगाई की चिंता
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. मार्च में हेडलाइन कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के पिछले साल के मुकाबले 3.4% तक पहुंचने का अनुमान है. वहीं, फरवरी के 2.4% के आंकड़े के मुकाबले यह महीने-दर-महीने 0.9% की बड़ी छलांग है, जो कि जून 2022 के बाद सबसे तेज़ बढ़ोतरी होगी. इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी है, जिसने एक बार फिर $85 प्रति बैरल के स्तर को पार कर लिया था.
कोर इन्फ्लेशन भी नहीं दे रहा राहत
अगर हम खाने-पीने और ऊर्जा की ज़रूरी चीज़ों को हटा दें, तो भी कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) पर काबू पाना फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. कोर कीमतों में फरवरी से 0.3% की बढ़ोतरी और सालाना 2.7% रहने का अनुमान है. फेड का लक्ष्य 2% महंगाई दर हासिल करना है, जो अभी भी काफी दूर नज़र आ रहा है. मार्च में हुई फेड की मीटिंग के मिनट्स से यह साफ है कि महंगाई को काबू में करने में उम्मीद से ज़्यादा समय लगेगा.
फेड के सामने ब्याज दरों पर मुश्किल फैसला
इन हालात में, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिज़र्व (Federal Reserve) के सामने ब्याज दरों (Interest Rates) को लेकर बड़ा मुश्किल फैसला लेना है. एक तरफ महंगाई लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. ऐसे में, फेड के पास दरें घटाने की गुंजाइश बहुत कम है. वहीं, मजबूत लेबर मार्केट (Labour Market), जहां मार्च में 178,000 नई नौकरियां आईं और बेरोजगारी दर 4.3% पर बनी हुई है, वह भी दरों में कटौती की तत्काल ज़रूरत को कम करती है. जानकारों का मानना है कि फेड को ऊंची ब्याज दरें लंबे समय तक बनाए रखनी पड़ सकती हैं.
70 के दशक जैसी 'स्टैगफ्लेशन' की आहट?
बढ़ती महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं एक बार फिर 1970 के दशक की 'स्टैगफ्लेशन' (Stagflation) की याद दिला रही हैं. यह वो दौर था जब महंगाई बहुत ज़्यादा थी और मंदी की आशंका बनी हुई थी. हालांकि, बाज़ार में तेजी का माहौल है और प्रमुख इंडेक्स लगातार हफ्तों से बढ़त दिखा रहे हैं, जो यह बताता है कि निवेशक भू-राजनीतिक मुद्दों से आगे बढ़कर अर्थव्यवस्था की बुनियाद पर ध्यान दे रहे हैं.
बाज़ार की उम्मीदें शायद ज़्यादा
विशेषज्ञों का मानना है कि बाज़ार की वर्तमान उम्मीदें शायद थोड़ी ज़्यादा हैं. भले ही किसी भी संघर्ष में सीज़फायर (Ceasefire) से तेल की कीमतों को थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं. अमेरिका में बढ़ती महंगाई और फेड के सीमित विकल्प, खासकर यूरोपियन यूनियन (Eurozone) जैसी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में, जहां मार्च में महंगाई 2.5% पर थी, स्थिति को और जटिल बनाते हैं. अगर फेड ऊंची दरें लंबे समय तक रखता है, तो विकास पर असर पड़ सकता है. वहीं, दरें जल्दी घटाने पर महंगाई फिर अनियंत्रित हो सकती है. यह स्थिति निवेशकों के लिए एक मुश्किल पहेली साबित हो सकती है.