मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: 2 साल की कंजूसी ड्राइव शुरू, खर्चों पर लगेगी लगाम

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
मध्य प्रदेश सरकार का बड़ा कदम: 2 साल की कंजूसी ड्राइव शुरू, खर्चों पर लगेगी लगाम

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने राज्य के खर्चों पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ी और अहम पहल की है। राज्य सरकार ने अगले **2 साल** के लिए एक 'कंजूसी ड्राइव' (Austerity Drive) का ऐलान किया है। इस पॉलिसी के तहत सरकारी खर्चों में भारी कटौती की जाएगी, जिसमें हवाई यात्रा पर रोक, व्हीकल पूलिंग और होटलों में मीटिंग्स पर बैन जैसे सख्त नियम शामिल हैं।

सरकारी खर्चों पर कसेगी लगाम

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के खर्चों को कंट्रोल करने के लिए 2 साल की कंजूसी पॉलिसी लागू की है। सरकारी आदेशों के मुताबिक, यह नियम राज्य के सभी विभागों, सरकारी कंपनियों और पब्लिक संस्थानों पर लागू होगा। सरकार का मकसद है कि वित्तीय अनुशासन को बेहतर किया जाए और सरकारी पैसों का सही इस्तेमाल हो।

यात्रा और मीटिंग्स पर पाबंदी

नए नियमों के तहत, सरकारी कामों से विदेश यात्राएं केवल ज़रूरी होने पर ही हो पाएंगी और इसके लिए सख्त इजाज़त लेनी होगी। देश के अंदर यात्रा के लिए, सरकारी पैसों का इस्तेमाल करते हुए अधिकारियों को इकॉनमी क्लास में सफर करना होगा। इसके अलावा, सरकारी दफ्तरों में अब होटलों में मीटिंग, वर्कशॉप या ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं हो सकेंगे। विभागों को ऐसे आयोजनों के लिए सरकारी बिल्डिंग या वर्चुअल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि होटल के किराये और मेहमान नवाजी के खर्चों से बचा जा सके।

व्हीकल पूलिंग और दूसरे खर्चे कम

खर्चों में कटौती के लिए, राज्य में व्हीकल पूलिंग सिस्टम भी लागू किया जा रहा है। अब अधिकारियों को अलग-अलग गाड़ियां नहीं मिलेंगी, बल्कि विभागों को ट्रांसपोर्ट रिसोर्स शेयर करने के आदेश दिए गए हैं। यात्रा और ट्रांसपोर्ट के अलावा, यह पॉलिसी ऑफिस के रेनोवेशन और इंटीरियर डेकोरेशन पर होने वाले खर्चों पर भी रोक लगाती है। साथ ही, कैपिटल बचाने के लिए नए बाहरी कंसल्टेंसी सर्विसेज की हायरिंग को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

सरकारी कंपनियों पर असर

इस कंजूसी ड्राइव का सरकारी कंपनियों और संस्थानों पर खास असर पड़ेगा। इन कंपनियों को पब्लिक फाइनेंस को मज़बूत करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा डिविडेंड (Dividend) राज्य के खजाने में ट्रांसफर करने का निर्देश दिया गया है। जिन निवेशकों की नज़र इन संस्थानों पर है, उनके लिए यह आंतरिक कैपिटल एलोकेशन और कैश फ्लो मैनेजमेंट में बदलाव ला सकता है। कंपनियों के सरप्लस कैश को सीधे राज्य सरकार के बजट को संतुलित करने में इस्तेमाल किया जा सकता है, बजाय इसके कि उसे बिज़नेस बढ़ाने में लगाया जाए।

वित्तीय स्थिति और निगरानी

ये कदम सरकार की तरफ से ज़्यादा सावधानी से रिसोर्स मैनेजमेंट की ओर बढ़ रहे हैं। राज्य के स्तर पर कर्ज़ और बजट घाटे को कंट्रोल करने के लिए ऐसे वित्तीय समायोजन अक्सर देखे जाते हैं। इस कंजूसी ड्राइव की सफलता का मुख्य पैमाना यह होगा कि यह राज्य की वित्तीय सेहत को सुधारने में कितना कारगर साबित होती है। सरकारी एजेंसियों को सर्विस देने वाले इंडस्ट्रीज़, जैसे कि ट्रैवल, हॉस्पिटैलिटी, कंसल्टेंसी और ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर, को भी बिज़नेस वॉल्यूम में कमी का सामना करना पड़ सकता है। राज्य के बजट घाटे और सरकारी कंपनियों से डिविडेंड पेमेंट के स्तर पर आने वाले अपडेट इस वित्तीय समेकन (Fiscal Consolidation) के प्रयासों की सफलता के बारे में ज़्यादा जानकारी देंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.