ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर MSCI ने दक्षिण कोरिया को 'डेवलप्ड मार्केट' का दर्जा देने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब है कि दक्षिण कोरिया फिलहाल 'इमर्जिंग मार्केट' की श्रेणी में ही बना रहेगा। MSCI का यह फैसला करेंसी लिक्विडिटी (Currency Liquidity) से जुड़ी समस्याओं के कारण आया है।
क्या हुआ?
MSCI ने पुष्टि की है कि दक्षिण कोरिया 'इमर्जिंग मार्केट' (Emerging Market) ही बना रहेगा। यानी, देश को फिलहाल 'डेवलप्ड मार्केट' (Developed Market) का दर्जा नहीं मिलेगा। यह फैसला MSCI द्वारा दक्षिण कोरिया के हालिया बाजार सुधारों और विदेशी निवेशकों के लिए पहुंच को बेहतर बनाने के प्रयासों की समीक्षा के बाद आया है। MSCI ने देश की प्रगति को स्वीकार तो किया, लेकिन कहा कि अभी भी कई बड़ी बाधाएं मौजूद हैं।
निवेशकों के लिए क्यों अहम?
दुनिया भर के कई निवेश फंड (Investment Funds) यह तय करने के लिए MSCI इंडेक्स को फॉलो करते हैं कि कहां पैसा लगाना है। जब कोई देश 'इमर्जिंग मार्केट' से 'डेवलप्ड मार्केट' में जाता है, तो इन फंडों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना पड़ता है, जिससे पैसों का बड़ा हेरफेर होता है। 'इमर्जिंग मार्केट' श्रेणी में बने रहने से दक्षिण कोरिया अन्य देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, के साथ उसी निवेश पूंजी के लिए प्रतिस्पर्धा करेगा। ग्लोबल फंड मैनेजरों के लिए, देश का वर्गीकरण यह तय करता है कि वह उनके फंड के दायरे में फिट होता है या नहीं, और कितना पैसा उसमें लगाया जाएगा।
करेंसी लिक्विडिटी की समस्या
इस फैसले का मुख्य कारण कोरियाई वॉन (Korean Won) है। MSCI ने बताया कि ट्रेडिंग घंटों को बढ़ाने के हालिया प्रयासों के बावजूद, ऑनशोर करेंसी मार्केट में पर्याप्त लिक्विडिटी (Liquidity) नहीं है। लिक्विडिटी का मतलब है किसी एसेट को उसकी कीमत पर बड़ा असर डाले बिना कितनी आसानी से खरीदा या बेचा जा सकता है। MSCI ने कहा कि बढ़े हुए ट्रेडिंग घंटों के दौरान, संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) को बड़े सौदों को कुशलता से निपटाने में दिक्कत होती है। एक पूरी तरह से खुला और लिक्विड करेंसी मार्केट न होने पर, इन निवेशकों को पैसा लाने और ले जाने में संघर्ष करना पड़ता है, जो 'डेवलप्ड मार्केट' का एक मानक मानक है।
साथी देशों पर असर
भारत 'इमर्जिंग मार्केट' इंडेक्स का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। दक्षिण कोरिया का इसी श्रेणी में बने रहने का मतलब है कि पैसिव फंड इनफ्लो (Passive Fund Inflow) के लिए प्रतिस्पर्धी परिदृश्य अपरिवर्तित रहेगा। अगर दक्षिण कोरिया को अपग्रेड किया जाता, तो इन इंडेक्स के भीतर अन्य 'इमर्जिंग मार्केट' का वेटेज (Weightage) अपने आप बदल जाता। दक्षिण कोरिया एक बड़ी अर्थव्यवस्था होने के नाते, इंडेक्स में उसकी उपस्थिति सभी 'इमर्जिंग मार्केट' देशों के बीच बांटी जाने वाली कुल पूंजी पर बड़ा प्रभाव डालती रहती है।
आगे क्या?
दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए बाजार सुधारों को जारी रखने का इरादा जताया है। कुछ विश्लेषकों का सुझाव है कि अगर देश अपने सुधारों की सफलता को प्रदर्शित कर पाता है, तो उसे 2027 तक फिर से वॉचलिस्ट (Watchlist) पर रखा जा सकता है। ग्लोबल फंड फ्लो पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए, अगली महत्वपूर्ण अपडेट करेंसी ट्रेडिंग से संबंधित किसी भी नई नीतिगत बदलाव और कोरियाई बाजार में विदेशी निवेशकों की पहुंच को सरल बनाने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर होगी।
