Midcap में वैल्यूएशन का टेंशन? Large-cap शेयरों में लौट सकती है रौनक!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Midcap में वैल्यूएशन का टेंशन? Large-cap शेयरों में लौट सकती है रौनक!

भारतीय शेयर बाज़ार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जहाँ मिडकैप (Midcap) और स्मॉलकैप (Smallcap) शेयरों ने घरेलू निवेशकों की बदौलत शानदार वापसी की है, वहीं अब एक्सपर्ट्स लार्जकैप (Large-cap) शेयरों में निवेश की सलाह दे रहे हैं। इसका मुख्य कारण इन छोटे शेयरों का वैल्यूएशन (Valuation) अपने ऐतिहासिक स्तरों से काफी ऊपर चला जाना है।

मिडकैप और स्मॉलकैप का वैल्यूएशन पहुंचा आसमान पर

मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में, सेंसेक्स (Sensex) ने जहां 8.4% और निफ्टी (Nifty) ने 8.7% का रिटर्न दिया है, वहीं निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 18.4% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स करीब 26% उछल गया है। यह तेजी मुख्य रूप से डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स (Domestic Investors) के भारी निवेश के कारण आई है।

मार्केट रिसर्च के मुताबिक, मिडकैप शेयर अब निफ्टी के मुकाबले 1.5 गुना ज्यादा वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं, जो उनके लॉन्ग-टर्म एवरेज 1.31 से काफी ऊपर है। इसी तरह, स्मॉलकैप शेयर ऐतिहासिक औसत 0.97 के मुकाबले 1.33 गुना वैल्यूएशन पर हैं। यह दिखाता है कि इन कंपनियों के फ्यूचर ग्रोथ की उम्मीदें पहले से ही कीमतों में शामिल हो चुकी हैं।

विदेशी निवेशकों (FIIs) की वापसी का इंतज़ार

आमतौर पर फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लार्जकैप शेयरों में निवेश करना पसंद करते हैं। पिछले कुछ महीनों में इन विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाज़ार से लगभग $28 बिलियन की निकासी की है, जो मार्च से जून के बीच हुई। अगर ग्लोबल मार्केट में स्थिरता आती है, तो FIIs भारतीय लार्जकैप सेगमेंट में फिर से निवेश कर सकते हैं।

इसके साथ ही, डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स भी पिछले 9-10 महीनों से स्मॉल और मिडकैप शेयरों पर फोकस किए हुए हैं। अगर वे भी अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस (Rebalance) करते हैं, तो लार्जकैप शेयरों को अच्छा सपोर्ट मिल सकता है।

कमाई (Earnings) बनाम कीमत

भले ही वैल्यूएशन एक चिंता का विषय है, मिडकैप और स्मॉलकैप की तेजी के पीछे उनकी मजबूत फाइनेंशियल परफॉरमेंस भी है। पिछले दो सालों में मिडकैप 150 इंडेक्स ने 18% की कंपाउंड एनुअल अर्निंग ग्रोथ (CAGR) हासिल की है, जबकि निफ्टी 100 ने केवल 8% की।

हालांकि, एक्सपर्ट्स चेता रहे हैं कि मौजूदा कीमतों पर निवेशकों के लिए गलती की गुंजाइश बहुत कम है। अब सलाह यही है कि मिडकैप और स्मॉलकैप में ब्रॉड-बेस्ड एक्सपोजर (Broad-based Exposure) के बजाय, चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करें जो अपनी अर्निंग मोमेंटम (Earnings Momentum) को बनाए रख सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.