Long-Term Capital Gains Tax: ₹1.29 लाख करोड़ का कलेक्शन, 79% का उछाल!

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AuthorAditya Rao|Published at:
Long-Term Capital Gains Tax: ₹1.29 लाख करोड़ का कलेक्शन, 79% का उछाल!

सरकार के लिए अच्छी खबर है! इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स से होने वाली कमाई में भारी उछाल आया है। असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 के लिए यह कलेक्शन बढ़कर **₹1.29 लाख करोड़** हो गया है, जो पिछले साल के **₹72,249 करोड़** की तुलना में लगभग **79%** ज्यादा है।

टैक्स कलेक्शन में आया ज़बरदस्त उछाल

सरकार ने संसद में यह जानकारी दी है कि इक्विटी निवेश पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) से टैक्स के रूप में ₹1.29 लाख करोड़ की मोटी रकम इकट्ठी हुई है। यह असेसमेंट ईयर (AY) 2025-26 का आंकड़ा है, जबकि AY 2024-25 में यह कलेक्शन ₹72,249 करोड़ था। यानी, टैक्स कलेक्शन में 79% का ज़बरदस्त इजाफा हुआ है। यह वृद्धि न केवल शेयर बाजार में बढ़ी हुई भागीदारी को दर्शाती है, बल्कि 2024 के यूनियन बजट में लाए गए टैक्स नियमों के बदलावों का भी असर है।

टैक्स नियमों में बदलाव का असर

AY 2025-26 के लिए यह टैक्स कलेक्शन उन निवेशकों की कमाई पर लागू होता है, जिन्होंने फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान मुनाफा कमाया है। इस कलेक्शन में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण 23 जुलाई, 2024 से लागू हुए टैक्स नियमों में बदलाव है। नए नियमों के तहत, लिस्टेड इक्विटी शेयर्स या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखने के बाद बेचने पर होने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स पर 12.5% की दर से टैक्स लगेगा। इससे पहले, इंडेक्सेशन (indexation) का फायदा मिलता था, जिससे महंगाई को एडजस्ट करने के बाद टैक्स की गणना होती थी, लेकिन अब यह सुविधा खत्म कर दी गई है।

बाज़ार में भागीदारी और रेवेन्यू ट्रेंड्स

टैक्स कलेक्शन में 79% की यह बढ़ोतरी, फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान शेयर बाजार में हुए रिकॉर्ड ट्रेडिंग वॉल्यूम (trading volumes) और नए निवेशक खातों के खुलने से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। रिटेल और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की संख्या बढ़ने के साथ, इक्विटी ट्रांजैक्शन्स (equity transactions) में भी काफी बढ़ोतरी हुई, जिससे सरकार के खजाने में ज्यादा टैक्स जमा हुआ। हालांकि, 12.5% की ऊंची टैक्स दर ने भी कुल कलेक्शन बढ़ाने में योगदान दिया, लेकिन ट्रेडिंग एक्टिविटी में हुई बढ़ोतरी ही साल-दर-साल रेवेन्यू में इस बड़ी बढ़ोतरी का मुख्य कारण बनी रही।

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

इंडिविजुअल निवेशकों के लिए, ये आंकड़े इक्विटी मार्केट में निवेशित रहने की लागत में हो रहे बदलाव को दिखाते हैं। इंडेक्सेशन के फायदे का हटना और 12.5% की टैक्स दर का मतलब है कि अब पहले की तुलना में ज्यादा मुनाफे पर टैक्स देना होगा। इसलिए, निवेशकों को लॉन्ग-टर्म इक्विटी होल्डिंग्स पर अपने नेट रिटर्न की गणना करते समय इस 12.5% टैक्स के भुगतान का ध्यान रखना होगा। भविष्य में, सरकार के बजट प्रस्ताव और टैक्स स्लैब या कैपिटल गेन्स छूट में किसी भी संभावित बदलाव पर निवेशकों को नज़र रखनी होगी, क्योंकि ये नीतियां सीधे तौर पर उनके इक्विटी पोर्टफोलियो से होने वाली कमाई को प्रभावित करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.