Kotak Securities: कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर भी ₹98 के पार रहेगा रुपया, Nifty को मिला सपोर्ट

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AuthorAditya Rao|Published at:
Kotak Securities: कच्चे तेल के दाम बढ़ने पर भी ₹98 के पार रहेगा रुपया, Nifty को मिला सपोर्ट

कच्चे तेल के लगातार बढ़ते दामों के बावजूद Kotak Securities का मानना है कि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹98 के स्तर से नीचे नहीं जाएगा। हालांकि, ऊंची तेल कीमतों का महंगाई और GDP ग्रोथ पर दबाव दिख सकता है, लेकिन Nifty के लिए **23,800** का स्तर मजबूत सपोर्ट का काम करेगा।

कच्चे तेल का झटका: महंगाई और GDP पर असर?

पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता का विषय हैं। Kotak Securities की रिसर्च के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतें $85 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) और महंगाई पर दबाव बढ़ेगा। अनुमान है कि खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) मौजूदा 4.1% से बढ़कर 4.8% से 5.2% के बीच पहुंच सकती है।'

हालात तब और बिगड़ सकते हैं जब कच्चे तेल की कीमतें $105 प्रति बैरल तक पहुंच जाएं। ऐसे में देश की रियल GDP ग्रोथ घटकर 5.5% से 5.8% के बीच रह सकती है।

रुपये की मजबूती और मार्केट सपोर्ट

इन मैक्रो इकोनॉमिक (Macroeconomic) दबावों के बावजूद, रुपये के आउटलुक (Outlook) को नियंत्रित माना जा रहा है। Kotak Securities का अनुमान है कि अगर तेल की कीमतें $85 प्रति बैरल पर रहती हैं, तो रुपया 97 के स्तर तक जा सकता है, और $105 प्रति बैरल तक पहुंचने पर 98 के स्तर को छू सकता है।

हालांकि, अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो रुपये में मजबूती आ सकती है और यह वापस 94 से 94.5 के स्तर पर वापस लौट सकता है। इक्विटी मार्केट (Equity Market) की बात करें तो, विश्लेषकों ने Nifty के लिए 23,800 को एक अहम टेक्निकल सपोर्ट (Technical Support) लेवल बताया है। बाजार 23,000 और 25,000 के बीच कारोबार कर सकता है।

वैल्यू-ड्रिवन सेक्टर्स की ओर झुकाव

बाजार की चाल में कैपिटल रोटेशन (Capital Rotation) के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की खरीदारी लौटी है, जो यह दर्शाता है कि निवेशक AI स्पेस में महंगे वैल्यूएशन (Valuation) वाले ग्लोबल स्टॉक्स से हटकर भारत के वैल्यू-ड्रिवन सेक्टर्स (Value-driven Sectors) की ओर रुख कर सकते हैं। घरेलू बाजार में, BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस) और IT सेक्टर्स (IT Sectors) में कंसॉलिडेशन (Consolidation) के दौर में सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कच्चे तेल की अस्थिरता का कंपनियों के मार्जिन पर क्या असर पड़ता है और क्या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) महंगाई को काबू में रखने के लिए अपनी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) में बदलाव करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.