साउथ कोरिया का Kospi इंडेक्स 10% गिरकर ट्रेडिंग हॉल्ट का शिकार हुआ, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के स्टॉक्स में आई तेजी को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। इस गिरावट का असर ग्लोबल मार्केट्स पर भी दिखा, और भारतीय शेयर बाज़ार में भी IT स्टॉक्स बिकवाली के दबाव में आ गए। निवेशक अब यह आंक रहे हैं कि क्या यह करेक्शन AI-संचालित टेक बूम में मंदी का संकेत है।
क्या हुआ?
मंगलवार को साउथ कोरिया के शेयर बाज़ार में 10% की भारी गिरावट देखी गई, जिसने एक्सचेंज को सर्किट ब्रेकर ट्रिगर करने और ट्रेडिंग रोकने पर मजबूर कर दिया। यह करेक्शन टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ी हुई अस्थिरता के बाद आया, जो कि इस चिंता से प्रेरित थी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टॉक्स में आई तेजी टिकाऊ नहीं है।
इस बिकवाली के केंद्र में दो बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां, Samsung Electronics और SK Hynix रहीं। Kospi इंडेक्स में इन दोनों का संयुक्त भार लगभग 55% है। दोनों स्टॉक्स दिन के कारोबार में 12% से अधिक गिर गए, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट आई। इस घटना ने अन्य एशियाई बाजारों में भी हलचल मचा दी, जहां जापान का Nikkei 225 3.6% और ताइवान का Taiex 1.3% गिरकर बंद हुआ।
भारतीय बाज़ारों पर असर
इस ग्लोबल टेक करेक्शन की झटकों को भारतीय बाज़ारों ने भी महसूस किया। सेंसेक्स ट्रेडिंग सेशन के दौरान लगभग 600 अंक गिरकर 76,530 के आसपास कारोबार कर रहा था। Nifty 50 इंडेक्स भी 0.8% गिरकर लगभग 23,906 पर आ गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लगभग 70% स्टॉक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जिससे ब्रॉडर मार्केट सेंटिमेंट नकारात्मक हो गया।
इसका सबसे बड़ा असर भारतीय इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर पर दिखा। Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, और Infosys जैसी प्रमुख कंपनियों के शेयर की कीमतों में लगभग 3% की गिरावट आई। भारतीय IT कंपनियां अक्सर ग्लोबल टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट के प्रति संवेदनशील होती हैं, और प्रमुख एशियाई चिपमेकर्स में आई तेज बिकवाली ने घरेलू बाजार में भी निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर किया।
AI का बढ़ता जुनून: क्या यह एक बबल है?
फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ने हाल ही में चिंता जताई है कि AI सेक्टर का वैल्यूएशन बहुत ज्यादा बढ़ गया है। इस तेजी ने, जिसमें Kospi इंडेक्स 2026 में ईयर-टू-डेट दोगुना से अधिक हो गया, यह सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या कंपनी के फंडामेंटल्स इतनी तेजी से बढ़ी हुई स्टॉक कीमतों को सही ठहराते हैं। मार्केट ऑब्जर्वर्स भारी AI निवेश खर्च और इन टेक्नोलॉजीज से तत्काल होने वाली लाभप्रदता के बीच एक संभावित अंतर की ओर इशारा कर रहे हैं।
ग्लोबल फाइनेंशियल फर्मों ने यह भी बताया है कि SpaceX, OpenAI, और Anthropic जैसी कंपनियों से जुड़े आगामी बड़े पब्लिक ऑफरिंग्स मौजूदा AI-संबंधित इक्विटी से लिक्विडिटी को दूसरी ओर मोड़ सकते हैं। यह चिंता है कि यदि पूंजी इन नए बाजार में प्रवेश करने वालों की ओर डायवर्ट होती है, तो यह वर्तमान में लोकप्रिय AI-लिंक्ड स्टॉक्स को प्राइस करेक्शन के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशक अब अमेरिकी बाजारों के खुलने पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि Nasdaq और S&P 500 जैसे प्रमुख इंडेक्स के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स संभावित गिरावट का संकेत दे रहे हैं। मुख्य बात यह है कि क्या यह बिकवाली दबाव केवल एक छोटी अवधि के करेक्शन तक सीमित रहता है या यह इस बात का संकेत है कि बाजार AI-संचालित ग्रोथ का मूल्यांकन कैसे करता है, इसमें एक स्थायी बदलाव आया है। भारतीय निवेशकों के लिए, IT दिग्गजों की प्राइस एक्शन पर नजर रहेगी और यह देखा जाएगा कि क्या Nifty इस ग्लोबल अस्थिरता के दौर में स्थिर रह पाता है।
