केरल सरकार ने हाल ही में एक व्हाइट पेपर जारी किया है, जिसमें राज्य की गंभीर वित्तीय तंगी का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि सरकार क़र्ज़ पर बहुत ज़्यादा निर्भर है और कैपिटल (पूंजीगत) खर्च बहुत कम है। तनख्वाहों और पेंशन में टैक्स रेवेन्यू का करीब **87%** चला जाता है, जिससे नए इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए पैसा जुटाना एक चुनौती बन गया है।
क्या है मामला?
केरल सरकार ने एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी कर राज्य के सामने मौजूद गंभीर वित्तीय चुनौतियों का खुलासा किया है। इस रिपोर्ट में नकदी के प्रवाह (cash inflows) और बहिर्वाह (outflows) के बीच लगातार बने रहने वाले अंतर पर प्रकाश डाला गया है। इससे पता चलता है कि राज्य का बजट भारी प्रतिबद्ध खर्चों (committed expenses) और क़र्ज़ पर अधिक निर्भरता के बोझ तले दबा हुआ है। यह दस्तावेज़ राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य की स्थिति रिपोर्ट के तौर पर काम करता है, जिसमें लिक्विडिटी मैनेजमेंट (liquidity management) और विकास खर्चों से जुड़ी समस्याओं को उजागर किया गया है।
अल्पकालिक क़र्ज़ पर निर्भरता
रिपोर्ट में एक बड़ी चिंता अल्पकालिक (short-term) क़र्ज़ का ज़िक्र है, जिसका इस्तेमाल सरकार रोज़मर्रा के खर्चों को चलाने के लिए करती है। साल 2022 से 2026 के बीच, राज्य ने 178 दिन ओवरड्राफ्ट (overdrafts) और 696 दिन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से वेज एंड मीन्स एडवांसेज (Ways and Means Advances) का इस्तेमाल किया। इस तरह की लगातार निर्भरता राज्य के कैश फ्लो में एक स्ट्रक्चरल मिसमैच (structural mismatch) को दर्शाती है। इसके अलावा, रिपोर्ट में छात्रवृत्ति (scholarships) और मिड-डे मील (mid-day meal) के लिए रखे गए फंड सहित ₹48,733 करोड़ की बड़ी भुगतान बकाया राशि का भी उल्लेख है।
खर्च और आय का भारी अंतर
वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि प्रतिबद्ध खर्च, जिनमें तनख्वाहें, पेंशन और ब्याज भुगतान शामिल हैं, राज्य के बजट पर ज़बरदस्त दबाव डाल रहे हैं। साल 2025-26 में, इन फिक्स्ड (fixed) खर्चों ने राज्य के अपने टैक्स रेवेन्यू का 87% से ज़्यादा हिस्सा ले लिया। इतने बड़े फिक्स्ड खर्च के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (infrastructure development) या सामाजिक कल्याण (social welfare) जैसी अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए बहुत कम गुंजाइश बचती है। इससे सरकार को बुनियादी खर्चों को पूरा करने के लिए भी क़र्ज़ पर निर्भर रहना पड़ता है।
कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) पर चिंता
व्हाइट पेपर में केरल के कैपिटल एक्सपेंडिचर की तुलना बाकी भारत से की गई है, जिसमें एक बड़ा अंतर नज़र आता है। जहाँ पूरे भारत में औसतन 93% फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए आवंटित किया गया, वहीं केरल ने केवल 40% आवंटित किया। इसके अलावा, ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GSDP) के प्रतिशत के रूप में कैपिटल एक्सपेंडिचर साल 2025-26 में घटकर 1.30% रह गया, जबकि पूरे राज्य का औसत 3.20% था। सड़कें और यूटिलिटीज़ (utilities) जैसे फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कम खर्च, लंबी अवधि में आर्थिक उत्पादकता (economic productivity) को बाधित कर सकता है।
संस्थागत और स्ट्रक्चरल चुनौतियां
रिपोर्ट में व्यापक स्ट्रक्चरल मुद्दों पर भी बात की गई है, जिसमें केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) की देनदारियां (liabilities) भी शामिल हैं, जिस पर लगभग ₹56,000 करोड़ की देनदारियां जमा हो चुकी हैं। इसमें पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (public sector enterprises) के कारण पड़ने वाले वित्तीय दबाव का भी ज़िक्र है, जैसे कोच्चि मेट्रो (Kochi Metro), जो कथित तौर पर हर महीने ₹35 करोड़ का घाटा झेल रही है। इसके अलावा, राज्य एक बड़े व्यापार घाटे (trade deficit) का सामना कर रहा है, क्योंकि यह वस्तुओं के आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, भले ही इसके पास पर्याप्त रेमिटेंस इनफ्लो (remittance inflows) हों जिन्हें स्थानीय उत्पादक क्षमता (productive capacity) की ओर मोड़ा जा सकता था।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशक और विश्लेषक राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सुधारों (fiscal reforms) के संबंध में उठाए जाने वाले अगले कदमों पर नज़र रख सकते हैं। मुख्य फोकस वाले क्षेत्रों में पेंशन प्रणाली (pension system) में संभावित बदलाव, रिटायरमेंट की उम्र (retirement age) में समायोजन और राज्य-समर्थित संस्थाओं की देनदारियों को प्रबंधित करने के प्रयास शामिल हो सकते हैं। अल्पकालिक क़र्ज़ पर निर्भरता कम करने और कैपिटल एक्सपेंडिचर की दक्षता में सुधार करने की राज्य की क्षमता, उसके वित्तीय स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। बाज़ार के भागीदार यह भी देख सकते हैं कि ये वित्तीय स्थितियां भविष्य की क्रेडिट रेटिंग (credit rating) और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स (infrastructure projects) के लिए फंड की उपलब्धता को कैसे प्रभावित करती हैं।
