E20 पेट्रोल पॉलिसी के खिलाफ केजरीवाल का बड़ा अभियान, 1 अगस्त को होगा टाउन हॉल

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AuthorMehul Desai|Published at:
E20 पेट्रोल पॉलिसी के खिलाफ केजरीवाल का बड़ा अभियान, 1 अगस्त को होगा टाउन हॉल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 1 अगस्त को सरकार की E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल पॉलिसी के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने जा रहे हैं। AAP नेता का कहना है कि इस पॉलिसी से गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंच सकता है और फ्यूल माइलेज कम हो सकता है। यह कदम ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन्स और एक्टिविस्ट्स के बढ़ते विरोध के बीच आया है।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की E20 इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल पॉलिसी को चुनौती देने के लिए एक औपचारिक अभियान की घोषणा की है। इस अभियान का नाम 'नेशनल टाउन हॉल अगेंस्ट E20' रखा गया है और यह 1 अगस्त को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित होगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 20% इथेनॉल मिलाने की इस अनिवार्यता को लेकर जनता की शिकायतों पर चर्चा के लिए एक मंच प्रदान करना है, जो विपक्ष और सरकार के बीच विवाद का विषय बन गया है।

गाड़ियों के परफॉर्मेंस और माइलेज पर असर

केंद्र सरकार भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम करने और कृषि क्षेत्र का समर्थन करने के लिए इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम को बढ़ावा दे रही है। हालांकि, E20 मैंडेट - जिसके तहत पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाना जरूरी है - ने वाहन मालिकों के बीच तकनीकी सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों द्वारा उठाई गई मुख्य चिंताओं में इंजन के पुर्जों का तेजी से घिसना, पुराने फ्यूल सिस्टम के साथ कम्पैटिबिलिटी (compatibility) की समस्या और शुद्ध पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल की कम एनर्जी डेंसिटी (energy density) के कारण फ्यूल माइलेज में आई कमी शामिल है।

बदलते नियम और जनता का रुख

इस पॉलिसी को राजनीतिक गलियारों के बाहर भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट ओनर्स एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन सहित विभिन्न ट्रांसपोर्ट बॉडीज ने कमर्शियल वाहनों पर E20 फ्यूल के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में चिंता जताई है। इसके अलावा, एक्टिविस्ट तहसीन पूनावाला ने भी इस पॉलिसी को धीरे-धीरे लागू करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए विरोध जताया है। हालांकि केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सरकार वैध चिंताओं पर विचार करने के लिए तैयार है, लेकिन ये विरोध प्रदर्शन बताते हैं कि उच्च इथेनॉल मिश्रण की ओर बढ़ना एक जटिल रेगुलेटरी और लॉजिस्टिकल चुनौती बनी हुई है।

निवेशकों और इंडस्ट्री के लिए मायने

निवेशकों के लिए, E20 पॉलिसी भारत के एनर्जी ट्रांजिशन (energy transition) रोडमैप का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कार्यक्रम की सफलता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के संचालन से जुड़ी है, जो ब्लेंडिंग के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल निर्माताओं को इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल के साथ कम्पैटिबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए इंजन डिजाइन को फिर से कैलिब्रेट (recalibrate) करना पड़ा है। किसी भी महत्वपूर्ण पॉलिसी देरी या उपभोक्ता के विरोध का इन इंफ्रास्ट्रक्चर निवेशों की गति और ऑटोमोटिव कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट (operational costs) पर असर पड़ सकता है। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि क्या यह अभियान वर्तमान ब्लेंडिंग रोडमैप की किसी भी औपचारिक समीक्षा की ओर ले जाता है या सरकार राष्ट्रव्यापी E20 सैचुरेशन (saturation) हासिल करने के अपने मौजूदा समय-सीमा पर कायम रहती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.