रुपये को गिरा रहा SIP का इनफ्लो, CAD नहीं: Jefferies
हाल ही में भारतीय रुपये में आई तेज़ गिरावट की वजह Current Account Deficit (CAD) नहीं, बल्कि देश के अंदर से आने वाले मजबूत डोमेस्टिक फ्लोज़, खासकर Systematic Investment Plans (SIPs) हैं। ब्रोकरेज फर्म Jefferies का मानना है कि इन भारी इनफ्लोज़ ने विदेशी निवेशकों को एक आसान रास्ता दे दिया है, जिससे वे महंगे समझे जा रहे भारतीय बाज़ार से अपना पैसा निकालकर बाहर जा रहे हैं।
बाज़ार से पैसा निकालने के पीछे की वजह
Jefferies के Mahesh Nandurkar, Abhinav Sinha और Priyank Shah द्वारा लिखी गई एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो सालों में इक्विटी मार्केट से करीब $78 बिलियन का आउटफ्लो (outflow) हुआ है। वहीं, इक्विटी स्कीम्स में रिकॉर्ड मासिक इनफ्लोज़ भी देखे गए हैं। Association of Mutual Funds in India (Amfi) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में यह इनफ्लो ₹38,503 करोड़ और अप्रैल 2026 में ₹38,410 करोड़ तक पहुंचा था।
साल 2026 में अब तक, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 7% कमजोर हुआ है और 96 के स्तर को पार कर गया है। यह उभरते बाज़ार की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी में से एक बन गई है। Jefferies ने INR में आई पिछली चार बड़ी गिरावटों (12 महीनों में 10% से ज़्यादा) का विश्लेषण किया है, और पाया है कि ऐसे तीन मामलों में अगले 12 महीनों में Foreign Portfolio Investor (FPI) फ्लोज़ में फिर से बड़ी तेज़ी की संभावना रही है।
FPI की बिकवाली और कैपिटल फ्लोज़
Jefferies के अनुमान के मुताबिक, अप्रैल 2024 से Foreign Portfolio Investors (FPIs) ने भारतीय इक्विटीज़ में लगभग $44 बिलियन की बिकवाली की है। इसके कारण कैपिटल अकाउंट सरप्लस (capital account surplus) FY25-26 में घटकर करीब 0.5% रह गया है, जो पिछले दशक के 2.6% सरप्लस की तुलना में काफी कम है। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद, SIPs और टैक्स के फायदों से प्रेरित म्यूचुअल फंड्स से डोमेस्टिक इनफ्लोज़ और Employees' Provident Fund Organisation (EPFO) व National Pension System (NPS) द्वारा इक्विटी एलोकेशन में बढ़ोतरी ने इस सेलिंग प्रेशर को काफी हद तक सोख लिया है। इसके चलते पिछले दो सालों में पेमेंट बैलेंस नेगेटिव रहा है, और ऐसे एक और साल की उम्मीद है।
CAD पर नियंत्रण
इसके विपरीत, Jefferies का अनुमान है कि भारत का Current Account Deficit (CAD) पिछले तीन फाइनेंशियल इयर्स (FY24–FY26) में औसतन GDP का रिकॉर्ड 0.8% रहा है। फर्म का मानना है कि FY27 में CAD, GDP के 2% के स्तर से काफी नीचे रहेगा, जिसे मैनेजेबल माना जाता है। इस अनुमान में जून से $90 प्रति बैरल का औसत क्रूड ऑयल प्राइस और गोल्ड इम्पोर्ट में 10% की अनुमानित कमी शामिल है।
