मिडिल ईस्ट तनाव और बढ़ती कीमतें बनी वजह
प्रधानमंत्री ताकैची के इस कदम को मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण बढ़ती कमोडिटी कीमतों से निपटने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। यह एक महत्वपूर्ण नीतिगत यू-टर्न है, क्योंकि सरकार ने पहले ऐसे कदमों से बचने का संकेत दिया था। इस बजट को फंड करने के लिए सरकार को नया कर्ज़ जारी करना पड़ सकता है, जिससे देश की भारी-भरकम कर्ज़ देनदारी को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
बॉन्ड यील्ड्स में तूफानी तेज़ी
इस एलान के तुरंत बाद, जापानी गवर्नमेंट बॉन्ड (JGB) यील्ड्स आसमान छूने लगीं। 10-साल की JGB यील्ड 2.8% के पार निकल गई, जो अक्टूबर 1996 के बाद का उच्चतम स्तर है। वहीं, 30-साल की यील्ड 4.2% के करीब पहुंच गई। ये बढ़ती यील्ड्स जापान की पहले से नाजुक वित्तीय स्थिति को और खराब कर रही हैं।
जापान का कर्ज़, दुनिया में सबसे ज़्यादा
जापान पहले से ही भारी कर्ज़ के बोझ तले दबा है, जिसका डेट-टू-जीडीपी रेशियो लगभग 237% के करीब है। यह कई विकसित देशों, जैसे अमेरिका (लगभग 121%) और इटली, ग्रीस से भी कहीं ज़्यादा है। बांड यील्ड्स में तेज़ उछाल से जापान के लिए अपने विशाल राष्ट्रीय ऋण पर ब्याज का भुगतान करना और महंगा हो गया है। इससे निवेशकों में देश की वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, जो सॉवरेन डेट मार्केट को अस्थिर कर सकती हैं और जापानी येन को और कमजोर कर सकती है।
जोखिम और भविष्य की चुनौतियां
विशेषज्ञों का मानना है कि JGB यील्ड्स में लगातार तेज़ी बाज़ार में हलचल मचा सकती है। बैंक ऑफ जापान (BOJ) के लिए यह एक मुश्किल स्थिति है, क्योंकि वे महंगाई को नियंत्रित करने और सरकारी खर्च के बढ़ते दबाव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। OECD और ADB जैसी संस्थाएं जापान को सलाह देती रही हैं कि वे कर्ज़ पर निर्भरता कम करें। ऊर्जा सब्सिडी जैसे सरकारी कदमों से खर्च और बढ़ेगा, जो वित्तीय स्थिति पर अतिरिक्त दबाव डालेगा।