Japan Inflation Data: 1.8% पर पहुंची महंगाई, पर असली आंकड़ा छिपा? Bank of Japan की बढ़ी मुश्किलें!

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
Japan Inflation Data: 1.8% पर पहुंची महंगाई, पर असली आंकड़ा छिपा? Bank of Japan की बढ़ी मुश्किलें!
Overview

Japan के लिए बाज़ार से आई चिंताजनक खबर! मार्च महीने में कोर कंज्यूमर प्राइसेस (core consumer prices) में **1.8%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो उम्मीदों से ज़्यादा है। हालांकि, सरकार की ओर से पेट्रोल पर दी जा रही सब्सिडी (subsidy) इस महंगाई के असली असर को छुपा रही है, जिससे Bank of Japan के लिए पॉलिसी बनाने में बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है।

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मार्च के महंगाई आंकड़े

Japan के कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (fresh food को छोड़कर) में मार्च में पिछले साल की तुलना में 1.8% का इजाफा हुआ। यह अर्थशास्त्रियों के 1.7% के अनुमान से ज़्यादा है और फरवरी के 1.6% के आंकड़े को पार कर गया। पूरे देश में महंगाई दर 1.5% रही, जो फरवरी के 1.3% से ज़्यादा है। एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा 'कोर-कोर इन्फ्लेशन' (volatile food और energy prices को छोड़कर) 2.4% रहा। यह BOJ के 2% के टारगेट से ऊपर है, जो बताता है कि महंगाई सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है।

कीमतें क्यों बढ़ीं और सब्सिडी कैसे छुपा रही सच

महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण ग्लोबल ऑयल प्राइसेस (global oil prices) में आई तेज़ी है। मध्य-पूर्व (Middle East) के भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) और शिपिंग रूट में बाधाओं ने इसे और बढ़ाया। Japan ऊर्जा आयात पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, इसलिए वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का उस पर सीधा असर पड़ता है। मार्च के मध्य तक पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड ¥190.8 प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं। सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सब्सिडी दी, जिससे खुदरा कीमतें लगभग ¥170 प्रति लीटर पर कैप (cap) कर दी गईं। हालांकि, ये सब्सिडी रिपोर्ट की गई महंगाई के आंकड़ों को कृत्रिम रूप से कम कर रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि यह सब्सिडी ग्राहकों पर पड़ने वाले असली लागत के झटके को छुपा रही है।

वैश्विक परिदृश्य (Global Context)

दुनिया भर में महंगाई अलग-अलग है। US में मार्च में 3.3% (headline CPI) और 2.6% (core CPI) थी, जबकि Euro Area में 2.6% (headline HICP) और 2.3% (core HICP) थी। China में महंगाई 1.0% (headline) और 1.1% (core) थी। Japan की कोर इन्फ्लेशन इन वैश्विक आंकड़ों के बीच है। लेकिन, Japan का 'कोर-कोर' आंकड़ा बताता है कि अंदरूनी मूल्य दबाव US और Eurozone के रुझानों के ज़्यादा करीब है। मार्च के अंत में 160 JPY प्रति US Dollar से ऊपर चल रहे येन (Yen) का तेज़ी से गिरना भी आयातित महंगाई को बढ़ा रहा है, जिससे विदेशों से खरीदी जाने वाली वस्तुओं की लागत बढ़ जाती है।

Bank of Japan की पॉलिसी दुविधा

सरकार का सब्सिडी प्रोग्राम ¥8 ट्रिलियन से ज़्यादा का हो चुका है, जो राजकोष पर एक बड़ा बोझ है और सार्वजनिक कर्ज बढ़ा सकता है। यह नीतिगत दुविधा (policy conflict) Bank of Japan के लिए एक चुनौती है। महंगाई बढ़ रही है, जो ब्याज दरें बढ़ाने का संकेत देती है। लेकिन, सब्सिडी असली महंगाई की तस्वीर छुपा रही है। अगर ऊर्जा की कीमतें बढ़ती रहीं, तो BOJ को और तेज़ी से दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। Sompo Institute Plus के Masato Koike का कहना है कि सब्सिडी कुछ हद तक महंगाई के दबाव को कम कर सकती है, पर पूरा नहीं, जिससे असली वेज (real wages) में ग्रोथ मुश्किल हो जाती है। BOJ, जिसकी दरें फिलहाल 0.75% पर हैं, अपनी अप्रैल की मीटिंग में शायद कोई बदलाव न करे। हालांकि, बढ़ती महंगाई और वैश्विक घटनाएं पॉलिसी को 'हॉकिश' (hawkish) यानी सख्त रुख अपनाने की ओर धकेल रही हैं। कई अर्थशास्त्री जून या जुलाई तक दरें बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं ताकि लगातार बढ़ती कीमतों पर काबू पाया जा सके। यह भी जोखिम है कि BOJ को योजना से ज़्यादा तेज़ी से पॉलिसी टाइट करनी पड़े, अगर ऊंची ऊर्जा लागतों से व्यापक मूल्य वृद्धि और वेज डिमांड (second-round effects) शुरू हो जाती है। बढ़ती होलसेल इन्फ्लेशन (wholesale inflation) पहले से ही आगे चलकर कंज्यूमर प्राइस में बढ़ोतरी का संकेत दे रही है।

महंगाई और BOJ पॉलिसी का Outlook

Bank of Japan के सामने एक चुनौतीपूर्ण तस्वीर है। मार्च की महंगाई सब्सिडी के कारण नियंत्रित दिखी, लेकिन ईरान संघर्ष का ऊर्जा कीमतों पर असर आने वाले महीनों में महंगाई को काफी प्रभावित करने की उम्मीद है। अगर तेल की कीमतें स्थिर रहती हैं, तो साल के दूसरे हिस्से में कुल महंगाई 2.5% से 3% तक पहुंच सकती है। BOJ की अप्रैल की तिमाही रिपोर्ट में महंगाई के अनुमानों को ऊपर ले जाया जा सकता है और ग्रोथ अनुमानों को कम किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक 'हॉकिश' गाइडेंस (hawkish guidance) बनाए रखने की उम्मीद है, जो 2% महंगाई टारगेट को पूरा करने के लिए दरें बढ़ाने की प्रतिबद्धता दर्शाता है, भले ही सब्सिडी से प्रभावित कीमतें और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं जटिलताएं पैदा कर रही हों।

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