जापानी येन (Japanese Yen) अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले 40 साल के निचले स्तर पर आ गया है। यह 162.27 के पार ट्रेड कर रहा है। अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दर (Interest Rate) में बड़ा अंतर इस गिरावट की मुख्य वजह है, जिससे सरकार के दखल (Intervention) की अटकलें तेज हो गई हैं। ग्लोबल निवेशक इस ट्रेंड पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।
क्या हुआ?
जापानी येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 162.27 तक कमजोर हो गया है, जो कि 1986 के बाद का सबसे निचला स्तर है। यह गिरावट एक लंबे ट्रेंड का हिस्सा है, जिसमें येन लगातार चौथी तिमाही में नुकसान झेल चुका है। यह स्थिति अमेरिका के फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) और बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) की मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) में बढ़ते अंतर को दर्शाती है, जिससे ग्लोबल करेंसी मार्केट में भारी उथल-पुथल मची हुई है।
वजह: ब्याज दरों का बड़ा अंतर
येन की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण दोनों देशों के बीच ब्याज दरों का भारी अंतर है। अमेरिका ने महंगाई पर काबू पाने के लिए ऊंची ब्याज दरें बनाए रखी हैं, जिससे डॉलर निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो गया है। वहीं, जापान लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए ब्याज दरों को काफी कम रखे हुए है।
इस अंतर ने 'कैरी ट्रेड' (Carry Trade) को बढ़ावा दिया है। यह एक ऐसी रणनीति है जहां निवेशक कम ब्याज दर पर येन उधार लेते हैं और फिर उसे डॉलर में बदलकर अमेरिका की ऊंची यील्ड वाली संपत्तियों में निवेश करते हैं। जब तक यह ब्याज दर का अंतर बना रहेगा, तब तक येन बेचकर डॉलर खरीदने का आकर्षण बना रहेगा, जिससे येन पर दबाव बना रहेगा।
सरकारी दखल की बढ़ती आशंका
जापान के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) ने पहले भी करेंसी को सहारा देने के लिए काफी पैसा, करीब 11.7 ट्रिलियन येन खर्च किया है। हालांकि, बाजार के ट्रेंड के मुकाबले इन कोशिशों का लंबी अवधि में सीमित असर ही दिखा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सीधी सरकारी दखल एक संभावना है, लेकिन जब तक अमेरिकी ब्याज दरें ऊंची रहेंगी, यह एक मुश्किल लड़ाई होगी। मंत्रालय को येन की गिरावट रोकने और इन कदमों की लागत को बॉन्ड मार्केट को बिगाड़े बिना मैनेज करने के बीच संतुलन बनाना होगा।
ग्लोबल निवेशकों पर असर
ग्लोबल निवेशकों के लिए, कमजोर येन एक दोधारी तलवार है। एक तरफ, सस्ता येन जापानी एक्सपोर्टर्स (Exporters) के लिए फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि उनके उत्पाद वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं और विदेशी आय को येन में बदलने पर ज्यादा वैल्यू मिलती है। दूसरी ओर, यह जापानी उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए एनर्जी और भोजन जैसी आयातित वस्तुओं को काफी महंगा बना देता है, जो स्थानीय मांग को कम कर सकता है।
'कैरी ट्रेड' को लेकर एक व्यापक जोखिम भी है। यदि बैंक ऑफ जापान अचानक दरें बढ़ाता है या अमेरिकी अर्थव्यवस्था काफी धीमी हो जाती है, जिससे ग्लोबल कैपिटल में बदलाव आता है, तो कई निवेशक एक साथ अपने येन लोन चुकाने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। येन को अचानक वापस खरीदने की यह दौड़ अत्यधिक बाजार अस्थिरता का कारण बन सकती है।
आगे क्या देखें?
बाजार प्रतिभागी अब आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, खासकर गुरुवार को जारी होने वाली जॉब रिपोर्ट पर। मजबूत अमेरिकी श्रम बाजार के संकेत फेडरल रिजर्व के मौजूदा रुख को और मजबूत कर सकते हैं, जिससे डॉलर के मजबूत बने रहने की संभावना है। निवेशकों को टोक्यो से संभावित बाजार दखल या बैंक ऑफ जापान की नीतिगत दृष्टिकोण में बदलावों के संबंध में किसी भी आधिकारिक टिप्पणी की निगरानी करनी चाहिए, क्योंकि ये अल्पकालिक मुद्रा उतार-चढ़ाव के सबसे तात्कालिक कारण हैं।
