Japan Warns Investors! येन 160 के पार, डॉलर के मुकाबले आई तूफानी गिरावट, सरकार की सख्ती के संकेत

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Japan Warns Investors! येन 160 के पार, डॉलर के मुकाबले आई तूफानी गिरावट, सरकार की सख्ती के संकेत
Overview

जापान की सरकार ने निवेशकों और सट्टेबाजों को कड़ी चेतावनी दी है। देश की करेंसी येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **160** का अहम स्तर पार कर गई है, जिसके बाद जापानी अधिकारी 'कड़े कदम' उठाने के संकेत दे रहे हैं।

160 का स्तर पार, सरकार एक्शन में!

जापान के उप वित्त मंत्री अत्सुशी मिमुरा (Atsushi Mimura) ने साफ कर दिया है कि अगर मौजूदा बाजार की स्थिति बनी रही तो "शीघ्र ही निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता हो सकती है"। येन के डॉलर के मुकाबले 160 का स्तर पार करना इस चेतावनी का मुख्य कारण है, जो पहले भी टोक्यो को करेंसी मार्केट में सीधे हस्तक्षेप (Intervention) के लिए मजबूर कर चुका है।

क्यों गिर रहा है जापानी येन?

येन पर दबाव की कई वजहें हैं। सबसे प्रमुख हैं ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और सट्टेबाजी (Speculation)। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे जापान जैसे ऊर्जा आयातक देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़ रहा है और येन कमजोर हो रहा है।

इसके अलावा, जापान और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का बड़ा अंतर भी येन की कमजोरी का कारण बन रहा है। जहां बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) अपनी ब्याज दरों को अभी भी 0.50%-0.75% के आसपास रखे हुए है, वहीं अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की दरें काफी ज्यादा हैं। इससे निवेशक सस्ते येन में उधार लेकर महंगे डॉलर एसेट्स में निवेश कर रहे हैं, जिससे येन पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। पिछले एक महीने में येन डॉलर के मुकाबले 2% से ज्यादा कमजोर हुआ है।

क्या होगा अगला कदम?

जापान सरकार की ओर से 'सभी मोर्चों पर' प्रतिक्रिया देने की बात कही जा रही है। पिछले साल अप्रैल-मई 2024 में, जापान ने येन को संभालने के लिए लगभग ¥9.8 ट्रिलियन (लगभग $62 बिलियन) खर्च किए थे। फिलहाल USD/JPY 160.20 के आसपास कारोबार कर रहा है।

बाजार विश्लेषक इस बात पर भी गौर कर रहे हैं कि जापान का 250% से अधिक का सरकारी कर्ज (GDP के मुकाबले) किसी भी बड़े कदम को सीमित कर सकता है। सरकार ऊर्जा सब्सिडी के लिए ₹800 बिलियन जैसे कदमों से दोहरी रणनीति अपना रही है - एक तरफ ऊर्जा लागत को संभालने के लिए राजकोषीय समर्थन, और दूसरी तरफ करेंसी प्रबंधन।

हालांकि, बाजार इस बात को लेकर कुछ संशय में है कि येन की इस कमजोरी को सिर्फ करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप से रोका जा सकता है या नहीं, खासकर जब ब्याज दरों का अंतर और ऊर्जा की कीमतें जैसे बुनियादी कारक मौजूद हैं।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.