जापान ने अपने कमजोर होते येन को सहारा देने के लिए मई में रिकॉर्ड **$77.11 बिलियन** की विदेशी सिक्योरिटीज बेची हैं। यह येन को बचाने के लिए टोक्यो का एक बड़ा और आक्रामक कदम है। निवेशकों के लिए यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर असर पड़ सकता है, जो भारत जैसे उभरते बाजारों में पैसे के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।
क्या हुआ?
जापान ने अपनी मुद्रा, येन, की गिरती कीमतों को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले चार दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया था। मई के महीने में, जापान की विदेशी सिक्योरिटीज (जिनमें ज्यादातर अमेरिकी सरकारी बॉन्ड शामिल हैं) में $77.11 बिलियन की भारी गिरावट आई। यह किसी एक महीने में सबसे बड़ी गिरावट है। यह कदम जापानी अधिकारियों द्वारा येन को खरीदने और वैश्विक मुद्रा बाजार में इसके मूल्य को बढ़ाने के लिए की गई आक्रामक कार्रवाई का हिस्सा था।
निवेशकों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है?
जब जापान जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिकी ट्रेजरी (जो कि अमेरिकी सरकार को दिया गया एक तरह का कर्ज है) बेचती है, तो इसका असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड को सुरक्षित निवेश माना जाता है। अगर कोई बड़ा धारक इन्हें बड़ी मात्रा में बेचता है, तो इन बॉन्ड पर मिलने वाले ब्याज दर, यानी 'यील्ड', पर दबाव बढ़ सकता है, यानी यील्ड ऊपर जा सकती है।
भारत जैसे उभरते बाजारों के निवेशकों के लिए यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर पैसे के प्रवाह को प्रभावित करता है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो ये निवेश अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो जाते हैं। इससे अक्सर पैसा उभरते बाजारों के शेयर और बॉन्ड से निकलकर सुरक्षित अमेरिकी संपत्तियों में वापस जा सकता है। इससे भारतीय रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव आ सकता है और घरेलू शेयर बाजारों में अस्थिरता पैदा हो सकती है।
मुद्रा का संघर्ष
यह दखलंदाजी जापानी सरकार पर पड़ रहे भारी दबाव को दर्शाती है। 22 जून तक येन डॉलर के मुकाबले 161.65 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो लगभग 40 वर्षों का निम्नतम स्तर है। हालांकि बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) ने हाल ही में मुद्रास्फीति से लड़ने और येन को सहारा देने के लिए अपनी मुख्य ब्याज दर को 1% तक बढ़ाया है - जो 1995 के बाद का उच्चतम स्तर है - लेकिन केवल ब्याज दरें बढ़ाने से येन की गिरावट नहीं रुकी है। अमेरिकी सिक्योरिटीज की यह भारी बिकवाली सीधे तौर पर येन की इसी कमजोरी का नतीजा है।
वॉशिंगटन का नजरिया
इस बड़े पैमाने के दखल ने वॉशिंगटन का ध्यान खींचा है। हालांकि जापान अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी है, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (US Treasury Department) इस तरह की मुद्रा प्रथाओं पर कड़ी नजर रखता है। अमेरिका की ओर से आने वाली अगली छमाही विदेशी मुद्रा रिपोर्ट (foreign exchange report) बाजार पर नजर रखने वालों के लिए यह समझने में महत्वपूर्ण होगी कि क्या वॉशिंगटन इस स्तर के बाजार हस्तक्षेप से सहज है या वह इसके संभावित नकारात्मक प्रभावों को लेकर चिंतित है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले हफ्तों में निवेशक कुछ प्रमुख बातों पर नजर रख सकते हैं। सबसे पहले, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में होने वाले उतार-चढ़ाव महत्वपूर्ण होंगे; किसी भी निरंतर वृद्धि से वैश्विक उभरते बाजारों पर फिर से दबाव पड़ने का संकेत मिल सकता है। दूसरा, USD/INR विनिमय दर (exchange rate) पर नजर रखना जारी रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक मुद्रा की अस्थिरता अक्सर रुपये को प्रभावित करती है। अंत में, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की आगामी रिपोर्टों में उनकी टिप्पणियां यह जानकारी देंगी कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था टोक्यो की हस्तक्षेप रणनीति को कैसे देखती है।
