कैपिटल एक्सपेंडिचर में कमी चिंता का विषय
जापान की इकोनॉमी में 1.8% की बढ़त दिख रही है, लेकिन असली तस्वीर कुछ और है। शुरुआती अनुमान 2.1% ग्रोथ का था, लेकिन अब यह आंकड़ा कम हो गया है। इसका सीधा असर कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में 0.7% की गिरावट के रूप में सामने आया है। ऐसा लगता है कि जापान की बड़ी कंपनियां ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतें और कैपिटल की बढ़ती लागत के चलते निवेश के फैसले फिलहाल टाल रही हैं। जब बड़ी कंपनियां नए उपकरण या फैक्ट्री लगाने में खर्च कम करती हैं, तो यह अक्सर इकोनॉमी में सुस्ती का संकेत होता है।
कंजम्पशन और इन्वेस्टमेंट में बड़ा अंतर
जापान की इकोनॉमी फिलहाल दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ, मंदी से बचने के लिए लोगों का खर्च (Private Consumption) सहारा बना हुआ है, जो 0.3% बढ़ा है। दूसरी तरफ, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर AI इंफ्रास्ट्रक्चर की ग्लोबल डिमांड से मजबूत बना हुआ है। खास तौर पर, सेमीकंडक्टर बनाने वाले उपकरण और दूसरे जरूरी पुर्जों की डिमांड घरेलू मंदी से अप्रभावित है।
मॉनेटरी पॉलिसी पर सवाल?
एक्सपर्ट्स को चिंता है कि बैंक ऑफ जापान (BOJ) शायद इकोनॉमी के संकेतों को गलत समझ रहा है। वे महंगाई को कंट्रोल करने के चक्कर में ग्रोथ को नजरअंदाज कर सकते हैं। ऐसे समय में जब बिजनेस इन्वेस्टमेंट पहले से ही कम हो रहा है, ब्याज दरें बढ़ाना इकोनॉमी को और नुकसान पहुंचा सकता है। BOJ सालों की सस्ती मौद्रिक नीति को सामान्य बनाना चाहता है, लेकिन यह समय जोखिम भरा हो सकता है। अगर मध्य-पूर्व में जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण लागत बढ़ती रही, तो जापानी कंपनियां अपना कैपिटल बजट और घटा सकती हैं, जिससे प्रोडक्टिविटी कम होगी और ग्रोथ रुकेगी। अमेरिका के विपरीत, जहां सर्विस सेक्टर ब्याज दरों का बोझ उठा सकता है, जापान का मैन्युफैक्चरिंग-हैवी इंडेक्स अचानक बढ़ी हुई उधारी लागत के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील है।
आगे की राह और पॉलिसी के जोखिम
मार्केट पार्टिसिपेंट्स अब उम्मीद कर रहे हैं कि इस तिमाही के अंत तक BOJ ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। निवेशकों की नजरें अब अगली पॉलिसी मीटिंग पर टिकी हैं। बैंक ऑफ जापान को करेंसी की अस्थिरता को रोकने और इकोनॉमिक मोमेंटम को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना होगा। अगर बिजनेस इन्वेस्टमेंट में गिरावट जारी रहती है, तो BOJ को इन्फ्लेशन के दबाव के बावजूद अपना रुख नरम करना पड़ सकता है, ताकि देश के औद्योगिक आधार को बचाया जा सके।
