एक्सपोर्ट्स में बंपर ग्रोथ, पर AI रेस में पीछे जापान?
मार्च में जापान के एक्सपोर्ट्स साल-दर-साल 11.7% बढ़कर आए, जो विश्लेषकों के अनुमानों से कहीं बेहतर थे। फरवरी के 4.0% ग्रोथ के मुकाबले यह एक बड़ी छलांग है। चीन, आसियान देशों और अमेरिका से मिली मजबूत मांग इस उछाल की मुख्य वजह रही। वहीं, इंपोर्ट्स (imports) में भी 10.9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो घरेलू मांग में स्थिरता का संकेत देती है। इसके चलते देश का ट्रेड सरप्लस (trade surplus) बढ़कर ¥667 बिलियन (लगभग $4.2 बिलियन) तक पहुंच गया, जो पिछले साल के ¥44.3 बिलियन से काफी ज्यादा है।
AI का दबदबा: साउथ कोरिया और ताइवान की रिकॉर्ड एक्सपोर्ट्स
वहीं, एशिया के अन्य देशों की बात करें तो AI (Artificial Intelligence) का जलवा एक्सपोर्ट्स में साफ दिख रहा है। साउथ कोरिया के एक्सपोर्ट्स मार्च में 48.3% उछले, जिसमें AI निवेश के चलते सेमीकंडक्टर शिपमेंट्स में 151.4% की भारी बढ़ोतरी हुई। ताइवान के एक्सपोर्ट ऑर्डर्स भी 65.9% बढ़कर रिकॉर्ड $91.12 बिलियन पर पहुंच गए, खासकर AI और IT से जुड़े प्रोडक्ट्स की मांग 120% से अधिक रही। यह दिखाता है कि जहां जापान को ग्लोबल मांग का फायदा मिल रहा है, वहीं AI-संचालित एक्सपोर्ट्स में वह अपने क्षेत्रीय साथियों से पिछड़ रहा है।
कच्चे तेल का कहर और कमजोर येन से महंगाई का डर
इन सबके बीच, मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनावों ने कच्चे तेल की कीमतों को भड़का दिया है। मार्च में ब्रेंट क्रूड (Brent crude) का औसत भाव $103 प्रति बैरल रहा। हालांकि, जापान के तेल इंपोर्ट्स (oil imports) में वैल्यू के लिहाज़ से 7.3% की गिरावट आई है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता का सबब बनता जा रहा है कमजोर येन। मार्च में डॉलर के मुकाबले येन औसतन 156.60 पर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 4.7% कमजोर है। डॉलर का भाव मार्च के आखिर में 160.4 येन तक भी पहुंचा। इस कमजोरी से इंपोर्ट्स महंगे हो रहे हैं, जिससे 'इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन' (imported inflation) का खतरा काफी बढ़ गया है। हालांकि, 2026 के लिए ग्लोबल कोर इन्फ्लेशन 2.8% रहने का अनुमान है, लेकिन बढ़ते ऊर्जा दाम इस अनुमान को बिगाड़ सकते हैं।
अमेरिकी टैरिफ का असर, कार निर्यात पर दबाव
अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे टैरिफ (tariffs) का असर भी जापानी ट्रेड पर दिख रहा है। खासतौर पर ऑटो सेक्टर में। अमेरिका को कार एक्सपोर्ट्स की वॉल्यूम 2.3% बढ़ी है, लेकिन उनकी वैल्यू 1.6% घट गई है। यह बताता है कि जापानी कार निर्माता शायद टैरिफ का बोझ खुद उठा रहे हैं, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है और यह एक प्रमुख एक्सपोर्ट क्षेत्र में कमजोरी को दर्शाता है।
बैंक ऑफ जापान की मुश्किल पॉलिसी
बढ़ती ऊर्जा कीमतें, कमजोर येन से महंगाई का बढ़ता खतरा और वैश्विक अनिश्चितता का माहौल बैंक ऑफ जापान (Bank of Japan) के लिए पॉलिसी बनाना मुश्किल बना रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बैंक ऑफ जापान अप्रैल की अपनी पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दरों को 0.75% पर ही बनाए रख सकता है। हालांकि, वेतन वृद्धि से पॉलिसी सख्त करने के संकेत मिल रहे थे, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम और ग्रोथ पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक असर को देखते हुए, ब्याज दरों में बढ़ोतरी जून तक टल सकती है। बैंक ऑफ जापान संभवतः 2026 के लिए अपने महंगाई अनुमानों को भी बढ़ाएगा, क्योंकि बढ़ती कीमतों के साथ धीमी ग्रोथ की चिंता बढ़ गई है।
आगे का रास्ता: करेंसी और भू-राजनीति की चुनौतियां
कुल मिलाकर, जापान का नियर-टर्म ट्रेड आउटलुक (trade outlook) ग्लोबल मांग और मध्य-पूर्व की स्थिरता पर टिका है। एक्सपोर्ट ग्रोथ भले ही मजबूत दिख रही हो, लेकिन करेंसी की कमजोरी, इंपोर्ट कॉस्ट में बढ़ोतरी और जटिल वैश्विक हालात देश की आर्थिक स्थिरता के लिए चुनौती बने हुए हैं। बैंक ऑफ जापान फिलहाल तत्काल जोखिमों को संभालने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, लेकिन अगर महंगाई लगातार बढ़ती रही तो उन्हें अपनी पॉलिसी पर जल्द ही फिर से विचार करना पड़ सकता है। वहीं, प्रतिस्पर्धियों के AI-संचालित मजबूत एक्सपोर्ट्स इस बात की ओर इशारा करते हैं कि जापान को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बिठाना होगा।
