JPMorgan का अनुमान: भारत की GDP ग्रोथ **7%** तक, लेकिन El Nino का खतरा

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
JPMorgan का अनुमान: भारत की GDP ग्रोथ **7%** तक, लेकिन El Nino का खतरा

अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म JPMorgan ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए **6.5%** से **7%** के बीच ग्रोथ का अनुमान जताया है। मजबूत GST कलेक्शन और क्रेडिट ग्रोथ इसके मुख्य सहारा होंगे। हालांकि, El Nino के कारण कृषि उत्पादन और महंगाई पर जोखिम बना हुआ है।

भारत की अर्थव्यवस्था में दिखेगी रफ्तार

JPMorgan के एशिया इकोनॉमिक रिसर्च के हेड, Sajjid Chinoy, ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पॉजिटिव आउटलुक (Positive Outlook) बनाए रखा है। उनका मानना है कि इस साल देश की GDP ग्रोथ 6.5% से 7% के दायरे में रह सकती है। यह अनुमान मजबूत डोमेस्टिक इकोनॉमिक इंडिकेटर्स (Domestic Economic Indicators) पर आधारित है, जिनमें बैंक क्रेडिट (Bank Credit) में लगातार ग्रोथ, एक्सपोर्ट (Export) का अच्छा प्रदर्शन और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन में स्थिरता शामिल है। ये फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं (Global Geopolitical Uncertainties) जैसे बाहरी दबावों के खिलाफ एक मजबूत दीवार की तरह काम करेंगे।

डोमेस्टिक डिमांड बनी मुख्य ताकत

हालांकि, वेस्ट एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव जैसे ग्लोबल फैक्टर कंपनियों के लिए इनपुट कॉस्ट (Input Cost) बढ़ा सकते हैं, लेकिन फर्म का मानना है कि डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) मजबूत बनी रहेगी। फिस्कल (Fiscal), मॉनेटरी (Monetary) और रेगुलेटरी (Regulatory) एक्शन का कॉम्बिनेशन (Combination) इकोनॉमिक मोमेंटम (Economic Momentum) को सपोर्ट करेगा। ऑटोमोबाइल सेल्स (Automobile Sales) और टैक्स कलेक्शन जैसे हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा (High-Frequency Data) इस मजबूती को दर्शाते हैं, जो इकॉनमी को ग्रोथ ट्रैक पर बनाए रखने में मदद करेगा।

मौसम का पैटर्न और महंगाई का रिस्क (Risk)

ग्रोथ के मजबूत अनुमानों के बावजूद, रिपोर्ट में मौसम में उतार-चढ़ाव को एक बड़ा कंसर्न (Concern) बताया गया है। खासकर, एक गंभीर El Nino इवेंट को सबसे बड़ा रिस्क फैक्टर (Risk Factor) माना जा रहा है, जो शायद तेल की कीमतों या अमेरिका में इंटरेस्ट रेट ट्रेंड (Interest Rate Trend) से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। सामान्य मॉनसून पैटर्न (Monsoon Pattern) में गड़बड़ी से एग्रीकल्चरल सोइंग (Agricultural Sowing) पर असर पड़ सकता है, जिससे सप्लाई-साइड कंस्ट्रेंट्स (Supply-side Constraints) पैदा होकर फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) बढ़ सकता है। निवेशकों के लिए, इसका मतलब है कि आने वाले महीनों में रूरल डिमांड (Rural Demand) और इन्फ्लेशन डेटा (Inflation Data) पर पैनी नजर रखनी होगी।

करेंसी और लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management)

भारतीय रुपये (Indian Rupee) के हालिया प्रदर्शन को अन्य इमर्जिंग मार्केट करेंसीज (Emerging Market Currencies) के अनुरूप बताया गया है। जैसे-जैसे अमेरिकी डॉलर (US Dollar) मजबूत हो रहा है, रुपए की चाल पॉलिसीमेकर्स (Policymakers) के लिए स्वीकार्य दायरे में बनी हुई है। लिक्विडिटी (Liquidity) पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का रुख, जिसमें उनके फॉरवर्ड बुक (Forward Book) के कुछ हिस्सों को रोल ऑफ (Roll Off) होने देना शामिल है, को परमानेंट मार्केट शिफ्ट्स (Permanent Market Shifts) से बचते हुए स्टेबिलिटी (Stability) मैनेज करने की एक स्ट्रैटेजिक मूव (Strategic Move) के तौर पर देखा जा रहा है।

आगे चलकर, फर्म को उम्मीद है कि बॉन्ड इंडेक्स इंक्लूजन (Bond Index Inclusion) और ओवरसीज बोर्रोइंग (Overseas Borrowing) जैसे संभावित कैपिटल इनफ्लोज (Capital Inflows) इकॉनमी को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि ये इनफ्लोज काफी मात्रा में होते हैं, तो RBI से उम्मीद की जाती है कि वह परमानेंट बॉन्ड सेल्स (Permanent Bond Sales) के बजाय कैश मैनेजमेंट बिल्स (Cash Management Bills) या इंक्रीमेंटल कैश रिजर्व रेश्यो (Incremental Cash Reserve Ratio) एडजस्टमेंट्स जैसे टेंपरेरी टूल्स (Temporary Tools) का इस्तेमाल करेगा। निवेशकों को लिक्विडिटी मैनेजमेंट की इन स्ट्रैटेजीज (Strategies) पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि वे सीधे इंटरेस्ट रेट्स और बिज़नेस के लिए कॉस्ट ऑफ कैपिटल (Cost of Capital) को प्रभावित करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.