जेपी मॉर्गन: भारत की कमाई स्थिर, पर बाज़ार वैश्विक साथियों से पिछड़ सकता है

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
जेपी मॉर्गन: भारत की कमाई स्थिर, पर बाज़ार वैश्विक साथियों से पिछड़ सकता है
Overview

जेपी मॉर्गन के संजय मूकिम ने बताया कि FY26 के लिए भारतीय आय में गिरावट (downgrades) में कमी आई है, जो निकट अवधि की उम्मीदों को स्थिर करता है। हालाँकि, उनका अनुमान है कि भारत वैश्विक बाज़ारों, विशेष रूप से अमेरिका और चीन से पिछड़ जाएगा, जिसका कारण वहाँ मज़बूत विदेशी वृद्धि और राजकोषीय सहायता है। जेपी मॉर्गन उपभोक्ता विवेकाधीन (consumer discretionary) शेयरों को पूंजीगत वस्तुओं (capital goods) से अधिक पसंद कर रहा है, क्योंकि राजकोषीय बाधाएँ सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (public capex) को सीमित कर रही हैं। इक्विटी आपूर्ति (equity supply) भी एक संभावित बाधा बनी हुई है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारतीय कॉर्पोरेट आय में गिरावट (downgrades) में काफी कमी आई है, जैसा कि जेपी मॉर्गन के भारत इक्विटी रिसर्च के प्रमुख संजय मूकिम ने बताया है। हालाँकि, देश का शेयर बाज़ार वैश्विक साथियों की तुलना में कम प्रदर्शन कर सकता है। मूकिम ने संकेत दिया कि FY26 के अनुमान स्थिर हैं, लेकिन FY27 के लिए अनुमानों में फिर से संशोधन हो सकता है। आम सहमति (consensus) वाली वृद्धि 16% से घटकर लगभग 12-13% हो सकती है।
मुख्य चिंता सापेक्ष विकास दर (relative growth rates) को लेकर है। मूकिम ने कहा कि जहाँ भारतीय कंपनियाँ रुपये में दोहरे अंकों की निम्न वृद्धि हासिल कर सकती हैं, वहीं अमेरिका और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं में राजकोषीय सहायता के कारण उच्च वृद्धि देखी जा रही है। इसके परिणामस्वरूप, मुद्रास्फीति समायोजन (currency fluctuations) के बाद, अगले वर्ष भारत की डॉलर आय वृद्धि मध्यम से उच्च एकल अंकों में रहने का अनुमान है।
जेपी मॉर्गन की सेक्टर रणनीति उपभोक्ता विवेकाधीन (consumer discretionary) शेयरों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी, और पूंजीगत वस्तुओं (capital goods) व अवसंरचना (infrastructure) के शेयरों से दूर रहेगी। मूकिम ने आगामी बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (public capital expenditure) में नई वृद्धि के लिए सीमित गुंजाइश होने की वजह बताई, जिसका कारण कमज़ोर सरकारी राजस्व, संभावित कर कटौती और राजकोषीय घाटे की बाधाएँ हैं। उनका मानना ​​है कि सार्वजनिक नीति पूंजीगत व्यय (capex) शेयरों के लिए महत्वपूर्ण मोड़ नहीं लाएगी, जबकि विवेकाधीन श्रेणियों (discretionary categories) में उपभोक्ता डेटा और मांग के रुझान में सुधार हो रहा है।
निवेशकों को 2026 में इक्विटी आपूर्ति (equity supply) में वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए। मूकिम ने चेतावनी दी कि यदि बाज़ार की स्थितियाँ स्थिर रहती हैं, तो ब्लॉक डील्स, प्रमोटर बिक्री और नई लिस्टिंग पर्याप्त रहने की उम्मीद है, जो निकट अवधि की बढ़त को सीमित कर सकती हैं। वैश्विक स्तर पर, मूकिम ने देखा है कि बाज़ारों ने भू-राजनीतिक तनावों और राजनीतिक अनिश्चितताओं को नज़रअंदाज़ कर दिया है, और आय की गति (earnings momentum) को प्राथमिकता दी है। भावना में एक बड़ा बदलाव लाने के लिए एक बड़े झटके की आवश्यकता होगी, जैसे कि बढ़ते व्यापारिक विवाद या AI-संचालित बाज़ार के आशावाद का उल्टा होना।

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