भारत की अर्थव्यवस्था की कमजोरी का मुख्य कारण कच्चे तेल के आयात पर उसकी भारी निर्भरता है। फाइनेंशियल ईयर 25 में अपनी 90 फीसदी जरूरतें विदेशी खरीद से पूरी करने वाली भारत, और इसमें से करीब 45-50 फीसदी मध्य पूर्व देशों से आयात करता है, इसलिए यह देश कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई में बाधाओं के प्रति संवेदनशील है। मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव ने पहले ही तेल की कीमतों को $120 प्रति बैरल के करीब पहुंचा दिया है, जो 2022 के बाद का उच्चतम स्तर है, और इससे लंबे समय तक अस्थिरता का डर बढ़ गया है।
ऊर्जा पर निर्भरता (Energy Dependence)
हार्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर भारत की निर्भरता, जिससे उसके कच्चे तेल का 45-50 फीसदी आयात होता है, इस संकट को और बढ़ाती है। भारत के पास लगभग 5.3 मिलियन मीट्रिक टन का सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है, जो करीब सात दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। हालांकि योजनाबद्ध विस्तार से यह कवर लगभग 16 दिनों तक बढ़ जाएगा, लेकिन यह इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) द्वारा सुझाए गए 90 दिनों के बेंचमार्क से काफी कम है। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई भी खतरे में है, क्योंकि 55 फीसदी LNG आयात इसी अहम जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
अर्थव्यवस्था पर 'तिहरा झटका' (Triple Economic Threat)
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि भारत के लिए एक 'तिहरे झटके' का कारण बन सकती है। करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD), जो फाइनेंशियल ईयर 25 में पहले ही $23.3 बिलियन पर था, सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1 फीसदी से ऊपर जा सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में सिर्फ 10 फीसदी की वृद्धि से CAD 30-40 बेसिस पॉइंट तक बढ़ सकता है। उच्च तेल कीमतें घरेलू महंगाई (Inflation) को भी बढ़ावा देंगी, जो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) दोनों को प्रभावित करेंगी, जिससे औसत महंगाई RBI के अनुमानों से ऊपर जा सकती है। इस आर्थिक दबाव और कमजोर वैश्विक सेंटिमेंट के कारण भारतीय रुपया (Rupee) भी कमजोर होगा।
ग्रोथ और फिस्कल आउटलुक (Growth and Fiscal Outlook)
हालांकि भारत एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जिसके फाइनेंशियल ईयर 26 के लिए 7.6 फीसदी ग्रोथ का अनुमान है, लेकिन यह जारी संघर्ष उस ग्रोथ के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा करता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सरकारी खजाने पर भी दबाव डाल सकती हैं, जिससे सब्सिडी बिल बढ़ सकता है और टैक्स कलेक्शन व PSU डिविडेंड पर असर पड़ सकता है। मजबूत फॉरेक्स रिजर्व (Forex Reserves) एक बफर प्रदान करते हैं, लेकिन एक लंबा संघर्ष भारत की ऊर्जा सुरक्षा तैयारियों की असली परीक्षा लेगा।