Invesco MF की नई रणनीति: 'Europe Plus One' से भारत में मैन्युफैक्चरिंग का नया दौर

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AuthorAditya Rao|Published at:
Invesco MF की नई रणनीति: 'Europe Plus One' से भारत में मैन्युफैक्चरिंग का नया दौर

Invesco Mutual Fund ने भारत के लिए 'Europe Plus One' को एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग संभावना के रूप में पहचाना है। यह यूरोप की ऊंची एनर्जी कॉस्ट और बूढ़ी होती आबादी के कारण भारत को मिल रहा है। फंड फार्मा CDMO, स्पेशियलिटी केमिकल्स और इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टरों में एक्सपोजर बढ़ाने पर विचार कर रहा है, लेकिन ऊंची वैल्यूएशन को लेकर सतर्क है।

'Europe Plus One' का मतलब क्या है?

जैसे-जैसे ग्लोबल सप्लाई चेन में बदलाव आ रहा है, Invesco Mutual Fund ने भारत पर मैन्युफैक्चरिंग फोकस बढ़ने की ओर इशारा किया है, जिसे 'Europe Plus One' की रणनीति कहा जा रहा है। फंड के इक्विटी हेड, आदित्य खेमानी का मानना है कि यूरोप में कुछ बड़ी चुनौतियां हैं, जैसे कि वहां की आबादी बूढ़ी हो रही है और एनर्जी की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। इन वजहों से यूरोपीय कंपनियों के लिए अपने यहां मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। यह भारत के लिए एक बड़ा मौका है कि वह इस प्रोडक्शन कैपेसिटी का कुछ हिस्सा अपने यहां ले आए।

भारत के लिए कौन से सेक्टर हैं खास?

फंड मैनेजर के अनुसार, ऐसे कई सेक्टर हैं जहां भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी भूमिका बढ़ा सकता है। इनमें फार्मास्युटिकल कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑर्गेनाइजेशन्स (CDMOs), स्पेशियलिटी केमिकल्स, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग शामिल हैं। हालांकि, अभी भारत का इकोसिस्टम चीन जितना मजबूत नहीं है, लेकिन भारत की युवा लेबर फोर्स लेबर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक कॉम्पिटिटिव एज प्रदान करती है। लेकिन, इन अवसरों का फायदा उठाने की क्षमता काफी हद तक घरेलू कारकों पर निर्भर करेगी। इन सेक्टर्स में लगातार ग्रोथ के लिए सरकारी इंसेंटिव या ट्रेड एग्रीमेंट्स पर निर्भर रहने के बजाय फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स कॉस्ट और बिजनेस करने में आसानी जैसे घरेलू कारकों में और सुधार की आवश्यकता होगी।

पोर्टफोलियो स्ट्रेटेजी और वैल्यूएशन की चिंता

Invesco Mutual Fund की मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों में फिलहाल 16-18% की हिस्सेदारी है। फंड इस एक्सपोजर को बढ़ाने के तरीके तलाश रहा है, लेकिन सावधानी बरत रहा है। फंड हाउस के लिए एक बड़ी चिंता यह है कि मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कई स्टॉक्स की वैल्यूएशन इन दिनों काफी ऊंची है। इन स्टॉक्स में पहले ही काफी तेजी आ चुकी है और अब ये महंगे माने जा रहे हैं।

मैन्युफैक्चरिंग थीम के अलावा, फंड हॉस्पिटल्स और ऑर्गनाइज्ड रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों को भी पसंद कर रहा है। दूसरी ओर, फंड कमोडिटी-लिंक्ड बिजनेस के प्रति सतर्क रुख बनाए हुए है, क्योंकि इनकी प्राइस साइकिल का अनुमान लगाना मुश्किल है। फंड आईटी सर्विसेज सेक्टर पर भी बारीकी से नजर रखे हुए है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से इंटीग्रेशन से भविष्य की ग्रोथ और मार्जिन को लेकर नई अनिश्चितताएं पैदा हो रही हैं।

निवेशकों के लिए अगली महत्वपूर्ण बात यह देखनी होगी कि क्या भारतीय मैन्युफैक्चरर्स यूरोपीय फर्मों से बड़े कॉन्ट्रैक्ट हासिल कर पाते हैं और क्या वे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और डिलीवरी मानकों को पूरा करने के लिए अपने ऑपरेशंस को बढ़ाने से जुड़े एग्जीक्यूशन रिस्क को सफलतापूर्वक मैनेज कर पाते हैं। CDMO और स्पेशियलिटी केमिकल्स स्पेस की कंपनियों के तिमाही मार्जिन ट्रेंड्स और कैपिटल एक्सपेंडिचर अपडेट्स को ट्रैक करना यह समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह 'Europe Plus One' नैरेटिव असल प्रॉफिट ग्रोथ में बदल रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.