Piyush Goyal: इनोवेशन में पिछड़ने से भारतीय कंपनियों का मार्केट शेयर घटा, मंत्री ने बताई वजह

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
Piyush Goyal: इनोवेशन में पिछड़ने से भारतीय कंपनियों का मार्केट शेयर घटा, मंत्री ने बताई वजह

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वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय कंपनियों के मार्केट शेयर में गिरावट की एक बड़ी वजह बताई है - तकनीकी तरक्की के साथ तालमेल बिठाने में विफलता। उन्होंने इनोवेशन पर जोर देते हुए कहा कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के लिए **₹1 लाख करोड़** का फंड भी तैयार है।

क्या है पूरा मामला?

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के सामने एक बड़ी चुनौती पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा कि कई घरेलू कंपनियों ने ऐतिहासिक रूप से विदेशी ब्रांडों के हाथों काफी मार्केट शेयर गंवाया है, क्योंकि वे तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों को अपनाने में पीछे रह गईं। गोयल के अनुसार, अक्सर घरेलू कंपनियां लागत-दक्षता पर ध्यान केंद्रित करती हैं, लेकिन रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश की कमी उन्हें उन अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों के सामने कमजोर बनाती है जो ज्यादा एडवांस प्रोडक्ट्स लेकर आते हैं।

निवेशकों के लिए इनोवेशन क्यों है जरूरी?

निवेशकों के लिए, इनोवेशन सिर्फ एक चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि यह किसी कंपनी की दीर्घकालिक स्थिरता और मूल्य निर्धारण शक्ति का सीधा संकेत है। जब कोई कंपनी इनोवेट करने में विफल रहती है, तो उसे अपने प्रोडक्ट्स के लिए ज्यादा कीमत मांगने में अक्सर संघर्ष करना पड़ता है, जिससे प्रॉफिट मार्जिन कम हो जाता है। इसके विपरीत, जो कंपनियां लगातार रिसर्च और प्रोडक्ट अपग्रेड पर पैसा खर्च करती हैं, वे घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों तरह के प्रतिद्वंद्वियों से अपने मार्केट शेयर को बचाने की बेहतर स्थिति में होती हैं।

मौजूदा बाजार में, नई तकनीकों को अपनाने की क्षमता - चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, या औद्योगिक सामानों में हो - विकास को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। निवेशक अक्सर R&D के प्रति किसी कंपनी की प्रतिबद्धता को केवल एक खर्च के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखते हैं जो प्रतिस्पर्धी बढ़त बनाता है। जो कंपनियां तकनीकी बदलावों को नजरअंदाज करती हैं, उन्हें अक्सर मूल्य के धीरे-धीरे क्षरण का सामना करना पड़ता है, जिससे वे समय के साथ कम आकर्षक हो जाती हैं।

सरकारी मदद और R&D को बढ़ावा

इस अंतर को पाटने के लिए, सरकार ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट के लिए ₹1 लाख करोड़ का एक समर्पित फंड तैयार किया है। इस पहल का उद्देश्य भारत के भीतर कंपनियों के लिए नवाचार (Innovation) का माहौल बनाना है, बजाय इसके कि वे पूरी तरह से आयातित तकनीक पर निर्भर रहें। 'मेक इन इंडिया' पहल का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि घरेलू निर्माता सिर्फ असेंबली यूनिट न बनें, बल्कि घरेलू इनोवेशन के माध्यम से वैश्विक सप्लाई चेन में योगदान करने में भी सक्षम हों।

मंत्री ने संयुक्त राज्य अमेरिका, स्विट्जरलैंड और इज़राइल जैसे देशों के सफल इकोसिस्टम का उदाहरण दिया, जहाँ दशकों से इनोवेशन आर्थिक मजबूती की रीढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा ही माहौल बनाना है जहाँ वित्तीय प्रोत्साहन मजबूत R&D क्षमताओं के साथ जुड़ें।

ग्लोबल सहयोग की ओर बढ़ता कदम

मंत्री द्वारा उजागर किए गए एक सकारात्मक रुझान यह है कि कई भारतीय कंपनियां अब वैश्विक टेक्नोलॉजी फर्मों के साथ सक्रिय रूप से साझेदारी कर रही हैं। यह रणनीति घरेलू फर्मों को अपनी स्थानीय विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए आधुनिक तकनीक और विनिर्माण प्रक्रियाओं तक पहुंचने की अनुमति देती है। वैश्विक सप्लाई चेन के साथ एकीकृत होकर, भारतीय कंपनियां अपने गुणवत्ता मानकों में सुधार कर सकती हैं और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना सीख सकती हैं।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

आने वाली तिमाहियों में कंपनी के प्रदर्शन को देखने वाले निवेशकों को कई प्रमुख क्षेत्रों की निगरानी करनी चाहिए। सबसे पहले, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी-केंद्रित कंपनियों की वार्षिक रिपोर्टों में 'रिसर्च एंड डेवलपमेंट' खर्च की जांच करें। बढ़ता R&D व्यय अक्सर यह संकेत देता है कि प्रबंधन टीम दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा के बारे में गंभीर है। दूसरा, नए उत्पाद लॉन्च और तकनीकी अपग्रेड के संबंध में प्रबंधन की टिप्पणियों पर ध्यान दें। तीसरा, वैश्विक कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारियों पर ध्यान दें, क्योंकि ये किसी कंपनी की अपने संचालन को आधुनिक बनाने की इच्छा का एक विश्वसनीय संकेतक हो सकते हैं। अंत में, इस बात पर नजर रखें कि कंपनियां अपने विकास और तकनीकी विस्तार को निधि देने के लिए उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहनों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रही हैं या नहीं।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.