बचत का तरीका बदला
भारतीयों के बचत करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। लोग अब सोना और रियल एस्टेट से हटकर शेयर बाजार जैसे मार्केट-बेस्ड निवेशों की ओर रुख कर रहे हैं। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की एक नई रिसर्च में इस बड़े बदलाव की जानकारी सामने आई है।
म्यूचुअल फंड में पैसा ही पैसा
म्यूचुअल फंड में निवेश किए जाने वाले पैसे में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। यह अब बचत का एक आम तरीका बन गया है। प्राइमरी मार्केट में, FY23 में ₹1.66 लाख करोड़ से बढ़कर FY25 में यह राशि ₹5.13 लाख करोड़ हो गई है। यह सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) और म्यूचुअल फंड की बढ़ती लोकप्रियता को दिखाता है।
शेयर बाज़ार में आम लोगों की एंट्री
SEBI का अनुमान है कि FY25 में भारतीय घरों के पास इक्विटी, म्यूचुअल फंड, डेट, REITs और InvITs जैसी संपत्तियों में कुल ₹141.3 लाख करोड़ थे। इसमें से इक्विटी का हिस्सा ₹88.9 लाख करोड़ था, जबकि म्यूचुअल फंड में ₹44.4 लाख करोड़ लगे हुए थे। इससे पता चलता है कि शेयर बाजार में निवेश अब सिर्फ जानकारों का काम नहीं रह गया है, बल्कि यह आम लोगों की आदत बनती जा रही है।
फाइनेंशियल सेविंग्स में बढ़ोतरी
हालांकि, सोना और प्रॉपर्टी में अब भी घरों की कुल बचत का बड़ा हिस्सा है, लेकिन फाइनेंशियल सेविंग्स लगातार बढ़ रही हैं। कुल घरेलू बचत के मुकाबले नेट फाइनेंशियल सेविंग्स का हिस्सा FY23 में 27% से बढ़कर FY25 में 33% हो गया है। यह दिखाता है कि लोग अब मार्केट-बेस्ड निवेशों में ज़्यादा सहज महसूस कर रहे हैं।
कोविड के बाद निवेश में उछाल
कोविड-19 महामारी के बाद से निवेश में देखी गई बढ़ोतरी, घरों की बचत के आंकड़ों में साफ झलकती है। रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के बाद व्यक्तिगत निवेशकों की बाज़ार में भागीदारी में 'शानदार इज़ाफ़ा' हुआ है। निवेश ऐप्स, आसान डिजिटल साइन-अप और SIPs के बारे में ज़्यादा जागरूकता के कारण, सिक्योरिटीज मार्केट के ज़रिए घरेलू बचत FY23 में ₹2.59 लाख करोड़ से बढ़कर FY25 में ₹6.91 लाख करोड़ हो गई।
नई गणना से तस्वीर हुई साफ
SEBI के पेपर में यह भी बताया गया है कि पिछली गणनाओं में शायद घरेलू बाज़ार में भागीदारी को कम आंका गया था। एक संशोधित गणना का उपयोग करते हुए, सिक्योरिटीज मार्केट के ज़रिए घरेलू बचत FY25 में ₹6.91 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जबकि पुरानी गणना के अनुसार यह ₹5.43 लाख करोड़ थी। इस नए तरीके में ETF, REITs, InvITs और सेकेंडरी मार्केट ट्रेड जैसे निवेशों को शामिल किया गया है, जिससे भारतीय निवेश के मौजूदा रुझानों की एक स्पष्ट तस्वीर मिलती है।
