भारत का चिप दांव: ₹14 लाख करोड़ के निवेश से ग्लोबल टेक में भारत का रुतबा बढ़ेगा?

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AuthorMehul Desai|Published at:
भारत का चिप दांव: ₹14 लाख करोड़ के निवेश से ग्लोबल टेक में भारत का रुतबा बढ़ेगा?
Overview

NITI Aayog ने भारत के सेमीकंडक्टर (Semiconductor) सेक्टर के लिए अगले 10 साल का एक महत्वाकांक्षी प्लान पेश किया है। इसका लक्ष्य 2035 तक **$120-150 बिलियन** (लगभग **₹10-12.5 लाख करोड़**) का सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन (Value Chain) तैयार करना है। इस प्लान पर कुल **$180 बिलियन** (लगभग **₹15 लाख करोड़**) का निवेश होने की उम्मीद है, जिसमें सरकार **एक-तिहाई** हिस्सेदारी के साथ प्रोजेक्ट्स को डी-रिस्क (De-risk) करेगी।

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पूंजी का बड़ा सहारा

"Future of India's Semiconductor Industry" नाम से जारी इस रोडमैप का मकसद शुरुआती दौर की ईकोसिस्टम (Ecosystem) बनाने से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन (Production) को बढ़ावा देना है। अगले दशक में $135-180 बिलियन (करीब ₹11-15 लाख करोड़) के निवेश की मांग करके, यह प्लान भारत को सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबलर (Assembler) की भूमिका से आगे ले जाना चाहता है। इसमें सरकार एक 'सेमीकंडक्टर सपोर्ट फंड' (Semiconductor Support Fund) बनाएगी, जिसके लिए $45-60 बिलियन (लगभग ₹3.75-5 लाख करोड़) का फंड तैयार है। यह सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि प्राइवेट कंपनियों को आकर्षित करने का एक तरीका है, जो इस महंगे और लंबे समय लेने वाले फ्रंट-एंड फैब्रिकेशन (Front-end fabrication) में पैसा लगाने से हिचकिचाती रही हैं।

"More-than-Moore" की रणनीति

ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका जैसे देशों के साथ सब-5nm (Sub-5nm) फैब्रिकेशन नोड्स (Fabrication Nodes) की रेस में सीधे मुकाबला करने के बजाय, भारत "More-than-Moore" रणनीति पर फोकस करेगा। इसमें कंपाउंड सेमीकंडक्टर (Compound Semiconductors), एडवांस्ड पैकेजिंग (Advanced Packaging) और OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) जैसी क्षमताओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इस खास फोकस से भारत 2035 तक ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट का 10-13% हिस्सा हासिल करने का लक्ष्य रखता है। यह रणनीति भारत को चिप डिजाइन (Chip Design) में अपनी मौजूदा ताकत का फायदा उठाने और ऑटोमोटिव (Automotive), 5G/6G और AI इंफ्रास्ट्रक्चर (AI Infrastructure) जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।

टैलेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां

इतने बड़े लक्ष्य के बावजूद, भारत की जमीनी हकीकत काफी जटिल है। हर साल लाखों इंजीनियर ग्रेजुएट होने के बावजूद, इंडस्ट्री में 'फैब-रेडी' (Fab-ready) टैलेंट की भारी कमी है। यानी, क्लीन-रूम ऑपरेशन (Clean-room operations), लिथोग्राफी (Lithography) और हाई-प्रेसिजन प्रोसेस इंजीनियरिंग (High-precision process engineering) में खास ट्रेनिंग वाले प्रोफेशनल्स की कमी है। इसके अलावा, फैब्रिकेशन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे अल्ट्रा-प्योर वॉटर (Ultrapure water) और बिना रुकावट हाई-वोल्टेज पावर (High-voltage power), अभी भी बड़े क्षेत्रीय चैलेंज हैं। इस 10-साल की योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रस्तावित 'नेशनल फ्रंटियर सेमीकंडक्टर रिसर्च प्रोग्राम' (National Frontier Semiconductor Research Programme) अकादमिक शिक्षा को इन खास औद्योगिक मांगों के साथ कितनी प्रभावी ढंग से जोड़ पाता है।

जोखिम का गणित

इस महत्वाकांक्षी योजना के खिलाफ सबसे बड़ा तर्क 'भरोसे और अमल' (Trust and Execution) का गैप है। भारत का सेमीकंडक्टर मिशन उन ग्लोबल देशों से मुकाबला कर रहा है जिनके पास दशकों का अनुभव और कहीं ज्यादा आक्रामक सब्सिडी फ्रेमवर्क (Subsidy Framework) हैं। स्पेशियलिटी केमिकल्स (Specialty chemicals) और गैसों जैसे महत्वपूर्ण मटीरियल के लिए इंपोर्ट पर निर्भरता घरेलू इंडस्ट्री को भू-राजनीतिक सप्लाई शॉक (Geopolitical supply shocks) के प्रति संवेदनशील बनाती है। इसके अलावा, अगर सरकार का शुरुआती निवेश प्राइवेट सेक्टर की रुचि को जल्दी आकर्षित नहीं कर पाता, या अगर नई फैकल्टी खुलने की रफ्तार से टैलेंट डेवलपमेंट पीछे रह जाता है, तो यह सेक्टर एक बड़े, ग्लोबल स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बनने के बजाय अलग-थलग, महंगे प्रोजेक्ट्स का संग्रह बनकर रह सकता है। सिर्फ बड़े फंड के ऐलान से ज्यादा, पॉलिसी की निरंतरता ही यह तय करेगी कि भारत ग्लोबल वैल्यू चेन (Value Chain) में सफलतापूर्वक एकीकृत होता है या फिर अपने बिखरे हुए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट बेस (Electronics component base) से जूझता रहता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.