क्या है रिपोर्ट का खास पहलू?
SBI की इस स्टडी के अनुसार, युवा बेरोजगारी दर में आई यह कमी काफी हद तक युवाओं की उच्च शिक्षा में बढ़ती भागीदारी का नतीजा है। रिपोर्ट का मानना है कि 15-29 साल के आयु वर्ग के लिए पारंपरिक बेरोजगारी मापने के तरीके, श्रम बाजार की असल तस्वीर पूरी तरह नहीं दिखा पाते, क्योंकि इस समूह के कई युवा अभी भी अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।
ग्लोबल और इंडिया के आंकड़े
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मुताबिक, 2025 के लिए वैश्विक युवा बेरोजगारी दर लगभग 12.6% अनुमानित है, जो कि कुल वैश्विक बेरोजगारी दर से काफी अधिक है। भारत की युवा बेरोजगारी दर 2025 में 9.9% रही, जो 2022 में 10.9% से लगातार गिरकर 2024 में 10.3% तक पहुंच गई थी। शहरी युवाओं में बेरोजगारी का आंकड़ा, ग्रामीण इलाकों से ज्यादा होने के बावजूद, 2022 के 16.8% से गिरकर 2025 में 13.6% पर आ गया। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में युवा बेरोजगारी इसी अवधि में करीब 8-9% पर स्थिर बनी रही।
पुराने तरीकों पर सवाल
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि 30 साल और उससे अधिक उम्र की आबादी के लिए बेरोजगारी दर, संरचनात्मक रोजगार की स्थिति का अधिक सटीक अनुमान देती है। एक संशोधित तरीके का उपयोग करते हुए, SBI ने 30+ आयु वर्ग के लिए बेरोजगारी दरें काफी कम होने का अनुमान लगाया है; शहरी पुरुषों के लिए यह दर 2.26% थी, जो PLFS द्वारा युवा आयु समूहों (11.8%) के लिए रिपोर्ट किए गए आंकड़ों से बिल्कुल अलग है।
सेक्टर में बदलाव
भारत का श्रम बाजार एक बड़े संरचनात्मक परिवर्तन से गुजर रहा है। स्टडी में विनिर्माण (manufacturing) और गैर-कृषि (non-agricultural) क्षेत्रों में भागीदारी में सुधार देखा गया है, साथ ही विभिन्न राज्यों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है। यह एक अधिक विविध आर्थिक गतिविधियों की ओर एक गतिशील बदलाव का संकेत देता है।
