VGU Jaipur: डिग्री नहीं, Skills का पावर! Startup Hubs से Graduates की Employability का गेम चेंजर!

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AuthorNeha Patil|Published at:
VGU Jaipur: डिग्री नहीं, Skills का पावर! Startup Hubs से Graduates की Employability का गेम चेंजर!
Overview

भारत में लाखों ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी पाना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन जयपुर की विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (VGU) इस समस्या से निपटने के लिए एक नया रास्ता अपना रही है। VGU अपने कैंपस में ही इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देकर स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री के लिए तैयार कर रही है।

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क्यों है Graduates की Employability एक बड़ी चिंता?

भारत में हर साल लाखों ग्रेजुएट तैयार होते हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ 51% युवा ही नौकरी के लिए पूरी तरह तैयार माने जाते हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से केवल 8.25% को ही उनकी पढ़ाई के मुताबिक नौकरी मिल पाती है। यह बड़ा गैप बताता है कि हमारी शिक्षा प्रणाली को डिग्री देने के साथ-साथ प्रैक्टिकल स्किल्स और इनोवेशन पर भी ध्यान देना होगा। विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (VGU) जयपुर इसी दिशा में एक अलग मॉडल अपना रही है, जहां पढ़ाई, रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप को एक साथ जोड़ा गया है।

Startup Hubs और रिसर्च से VGU का नवाचार

VGU ने यूनिवर्सिटी के अंदर ही दो मजबूत स्टार्टअप इनक्यूबेशन सिस्टम तैयार किए हैं: NITI Aayog का ACIC-VGU Foundation और VGU Technology Business Incubator (TBI)। इस इकोसिस्टम ने अब तक 160 से ज्यादा नए बिज़नेस आइडियाज को सपोर्ट किया है, जिनसे ₹100 करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू जेनरेट हुआ है और 800 से ज्यादा डायरेक्ट जॉब्स बने हैं। इनमें से 60 स्टार्टअप्स को सफलतापूर्वक फंडिंग भी मिल चुकी है। ACIC-VGU Foundation, NITI Aayog के Atal Innovation Mission का हिस्सा है और खास तौर पर राजस्थान जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने का काम कर रहा है।

VGU का मॉडल नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप

VGU का यह इंटीग्रेटेड अप्रोच भारत की नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के लक्ष्यों से पूरी तरह मेल खाता है। NEP भी मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन, रिसर्च को बढ़ावा देने और एंटरप्रेन्योरशिप को प्रोत्साहित करने पर जोर देती है। यूनिवर्सिटी के CEO, Onkar Bagaria का कहना है कि शिक्षा का मकसद स्टूडेंट्स को न सिर्फ आज की नौकरियों के लिए तैयार करना है, बल्कि भविष्य के अवसरों के लिए भी तैयार करना है। VGU का यह मॉडल बड़े शहरों से बाहर के एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के लिए एक मिसाल है।

आगे की राह और चुनौतियां

हालांकि VGU का मॉडल काफी प्रभावी है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। यूनिवर्सिटी के अंदर विकसित होने वाले आइडियाज और टेक्नोलॉजी को सफलतापूर्वक मार्केट में उतारना और उन्हें स्केल करना एक बड़ी जिम्मेदारी है। स्टार्टअप्स के लिए लॉन्ग-टर्म फंडिंग की उपलब्धता और सरकारी योजनाओं पर निर्भरता को कम करना भी VGU के लिए अहम होगा। यूनिवर्सिटी को सिर्फ स्टार्टअप की संख्या ही नहीं, बल्कि उनके द्वारा पैदा की गई जॉब्स की क्वालिटी और उनके लंबे समय तक टिके रहने के परिणामों पर भी ध्यान देना होगा।

बड़े शहरों के बाहर शिक्षा सुधार का ब्लू प्रिंट

Innovation, एंटरप्रेन्योरशिप और अप्लाइड रिसर्च को इंटीग्रेट करने की VGU की स्ट्रेटेजी, खास तौर पर मेट्रो शहरों से बाहर स्थित यूनिवर्सिटीज के लिए, ग्रेजुएट एम्प्लॉयबिलिटी गैप को भरने का एक स्पष्ट खाका पेश करती है। एक ऐसा माहौल बनाकर जहाँ क्रिएटिविटी और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा मिले, VGU न केवल स्टूडेंट्स को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है, बल्कि भारत को एक नॉलेज-ड्रिवेन सुपरपावर बनाने के लक्ष्य में भी योगदान दे रहा है।

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