भारत के छुपे रुस्तम: वैल्यूएशन का चक्कर और IPO की बड़ी लहर!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत के छुपे रुस्तम: वैल्यूएशन का चक्कर और IPO की बड़ी लहर!
Overview

भारत का अनलिस्टेड (Unlisted) कॉर्पोरेट सेक्टर अभूतपूर्व ऊँचाई पर पहुँच गया है। **100** प्राइवेट कंपनियों ने मिलकर **₹8.9 लाख करोड़** का रेवेन्यू (Revenue) जेनरेट किया है। Reliance Retail इसमें सबसे आगे है, जिसने **₹2.7 लाख करोड़** का रेवेन्यू दर्ज किया है। Flipkart और Tata Passenger Electric Mobility जैसी कंपनियाँ भी महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं। यह ग्रोथ IPO पाइपलाइन को मजबूत करती है और लिस्टेड कंपनियों के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ाती है, साथ ही पब्लिक मार्केट में आने से पहले प्राइवेट वैल्यूएशन पर सवाल खड़े करती है। रोज़गार के आंकड़े और स्थिर बैलेंस शीट इस सेक्टर के आर्थिक महत्व को दर्शाते हैं।

भारत का अनलिस्टेड सेक्टर: छुपे रुस्तम बाज़ार में धूम मचाने को तैयार!

भारत का कॉर्पोरेट सेक्टर, खासकर अनलिस्टेड (Unlisted) यानी शेयर बाज़ार में लिस्ट न हुई कंपनियाँ, आज गज़ब का प्रदर्शन कर रही हैं। JM Financial की एक रिपोर्ट बताती है कि ये प्राइवेट कंपनियाँ इतनी बड़ी हो चुकी हैं कि भविष्य में IPO बाज़ार को एक नई दिशा दे सकती हैं। ये कंपनियाँ न सिर्फ लाखों लोगों को रोज़गार दे रही हैं, बल्कि देश की इकोनॉमी में भी बड़ा योगदान दे रही हैं।

वैल्यूएशन की पहेली और कंपनियों का स्केल

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की टॉप 100 अनलिस्टेड कंपनियों का कुल वैल्यूएशन (Valuation) लगभग ₹28.5 लाख करोड़ है। इनमें सबसे बड़ा नाम है Reliance Retail का, जिसने 2025 के लिए ₹2.7 लाख करोड़ का रेवेन्यू (Revenue) दर्ज किया था। JP Morgan ने अक्टूबर 2025 में इसका वैल्यूएशन करीब $143 बिलियन आंका था।

ई-कॉमर्स (E-commerce) की दुनिया में Flipkart का नाम भी चमक रहा है। मई 2025 की एक फंडिंग राउंड के बाद इसका वैल्यूएशन $37.6 बिलियन रहा, जबकि 2024 की शुरुआत में PhonePe के डी-मर्जर (Demerger) के कारण यह $35 बिलियन तक गिर गया था। वहीं, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर में तेज़ी से आगे बढ़ रही Tata Passenger Electric Mobility Limited (TPEML) का वैल्यूएशन 2024 की शुरुआत में $9.5–10 बिलियन के आसपास था। फाइनेंशियल ईयर 2025 में इसका रेवेन्यू ₹15,200 करोड़ से ज़्यादा रहा।

कॉम्पिटिशन में बदलाव और IPO की अगली लहर

इन बड़ी अनलिस्टेड कंपनियों के आने से कॉम्पिटिशन (Competition) का माहौल बदल रहा है। Reliance Retail, जिसके 19,000 से ज़्यादा स्टोर और 7,000 से ज़्यादा शहरों में मौजूदगी है, अपने लिस्टेड कॉम्पिटिटर्स जैसे DMart से कहीं आगे है। Flipkart ई-कॉमर्स में 35% मार्केट शेयर के साथ Amazon India को कड़ी टक्कर दे रही है, जिसका मार्केट शेयर 30-35% है। DeHaat जैसी स्पेशलिस्ट कंपनियाँ और Tata Electronics जैसी सेमीकंडक्टर (Semiconductor) और TPEML जैसी EV कंपनियों का उदय इस सेक्टर की विविधता को दर्शाता है।

यह पूरा ग्रोथ दिखाता है कि IPO के लिए एक मज़बूत पाइपलाइन तैयार है। 2025 तक 80 से ज़्यादा कंपनियाँ ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल कर चुकी हैं और 2026 में 190 से ज़्यादा लिस्टिंग की उम्मीद है। इन बड़ी प्राइवेट कंपनियों के लिस्ट होने से बाज़ार में कुछ सेक्टर्स में ज़्यादा भीड़ हो सकती है।

इकोनॉमी का मज़बूत आधार

ये 100 प्राइवेट कंपनियाँ मिलकर करीब 12 लाख लोगों को रोज़गार देती हैं, जो देश के लिए बहुत बड़ी बात है। इनकी फाइनेंशियल हेल्थ भी अच्छी है, 65% कंपनियों का डेट-टू-इक्विटी (Debt-to-Equity) रेश्यो 1x से कम है।

रिस्क और चिंताएँ (The Bear Case)

हालांकि, कुछ चिंताएँ भी हैं। प्राइवेट मार्केट में इन कंपनियों को जो वैल्यूएशन मिल रहा है, वह बाज़ार की बदलती परिस्थितियों या बढ़ते कॉम्पिटिशन में दबाव में आ सकता है। Reliance Retail का क्विक कॉमर्स में उतरना मार्जिन पर असर डाल सकता है।

साथ ही, कुछ कंपनियों पर कर्ज़ (Leverage) ज़्यादा हो सकता है, जो बढ़ती ब्याज दरों या धीमी इकोनॉमी में समस्या पैदा कर सकता है। IPO मार्केट इनवेस्टर्स के लिए ज़्यादा सेलेक्टिव हो सकता है, जो प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) और सस्टेनेबल बिज़नेस मॉडल वाली कंपनियों को तरजीह देंगे। सेमीकंडक्टर और EV जैसे सेक्टर में भारी इन्वेस्टमेंट और तेज़ टेक्नोलॉजी बदलाव का रिस्क भी है।

भविष्य का नज़ारा

भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ (6.4%-6.7% GDP ग्रोथ का अनुमान 2025-26 के लिए) और मज़बूत कंज्यूमर बेस इन कंपनियों के लिए एक अच्छा माहौल बना रहा है। PE/VC इन्वेस्टमेंट में रिकवरी भी ग्रोथ-स्टेज कंपनियों के लिए फंड की उपलब्धता का संकेत देती है। ये अनलिस्टेड दिग्गज कंपनियाँ जब पब्लिक मार्केट में आएँगी, तो उनकी परफॉरमेंस पर सबकी नज़र रहेगी।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.