व्यापार घाटे में भारी बढ़ोतरी, सोने के आयात में विस्फोट
जनवरी 2026 में भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (Merchandise Trade Deficit) में भारी बढ़ोतरी देखी गई, जो तीन महीने के उच्चतम स्तर $34.68 बिलियन पर पहुंच गया। यह जनवरी 2025 के $23.43 बिलियन के घाटे से काफी बड़ा उछाल है। इस इजाफे की मुख्य वजह आयात में 19.19% की जबरदस्त वृद्धि है, जो $71.24 बिलियन तक पहुंच गया। खास तौर पर कीमती धातुओं के आयात में बड़ा उछाल आया। सोने के इम्पोर्ट्स (Imports) 349.22% बढ़कर $12.07 बिलियन हो गए, जबकि चांदी का आयात दोगुना होकर $2 बिलियन पर पहुंच गया। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इन धातुओं की बढ़ी हुई कीमतों को इसका प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
निर्यात की धीमी रफ्तार और टैरिफ में मिली राहत
वहीं, निर्यात (Exports) के मोर्चे पर तस्वीर थोड़ी फीकी रही। भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स (Merchandise Exports) में सिर्फ 0.61% की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो $36.56 बिलियन रहा। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पुराने अमेरिकी टैरिफ (Tariff) का असर निर्माताओं पर अभी भी देखा जा रहा था। हालांकि, 6 फरवरी 2026 को अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर देना, एक बड़ी राहत लेकर आया है। एक अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) के बाद यह फैसला लिया गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों को भविष्य में अमेरिकी बाजारों में बेहतर पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मकता की उम्मीद जगी है।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य का अनुमान
ऐतिहासिक रूप से, भारत लगातार व्यापार घाटे से जूझता रहा है, खासकर खनिज तेल और कीमती धातुओं के आयात के कारण। सोने और चांदी के वर्तमान आयात में वृद्धि, भले ही वैश्विक कीमतों में तेजी का असर हो, चिंताएं बढ़ाती है क्योंकि यह उत्पादक संपत्ति नहीं होने के बावजूद बड़ा धन प्रवाह (Outflow) है। ऐसे में, विश्लेषकों का अनुमान है कि चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) 2026 तक बढ़कर $37 बिलियन तक पहुंच सकता है। वहीं, सेवाओं का निर्यात (Services Exports) मजबूत बना हुआ है और वित्त वर्ष 2026 में $410 बिलियन से अधिक रहने का अनुमान है। वाणिज्य सचिव कुल निर्यात $860 बिलियन से अधिक रहने का अनुमान लगा रहे हैं, जबकि FIEO जैसे उद्योग निकाय $1 ट्रिलियन तक के आंकड़े की उम्मीद कर रहे हैं। अमेरिकी टैरिफ में कटौती को देखते हुए, Goldman Sachs ने 2026 के लिए जीडीपी (GDP) पूर्वानुमान को बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। हालांकि, कुछ रिपोर्टें वैश्विक मांग में कमजोरी के कारण वित्त वर्ष 2026 में माल निर्यात (Goods Exports) में 1% की गिरावट का अनुमान भी लगा रही हैं। चीन अभी भी भारत का प्रमुख आयात स्रोत बना हुआ है, जिसके शिपमेंट में जनवरी 2026 में 16.67% की बढ़ोतरी हुई।
कमजोरियां और जोखिम
नई अमेरिकी व्यापार डील की उम्मीदों के बावजूद, कुछ अंतर्निहित कमजोरियां बनी हुई हैं। सोने और चांदी के आयात पर भारी निर्भरता, भले ही घरेलू मांग और कीमतों में वृद्धि के कारण हो, भुगतान संतुलन (Balance of Payments) और रुपये पर दबाव डालती है। रुपया भी फरवरी 2026 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग 90.65 पर कारोबार कर रहा है, जो ऐतिहासिक रूप से बढ़ते व्यापार घाटे से जुड़ा रहा है। हालांकि अमेरिकी टैरिफ में कटौती एक सकारात्मक कदम है, लेकिन पहले के उच्च शुल्कों ने कुछ क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जैसे रत्न और आभूषण निर्यात, जो जनवरी में अमेरिका के लिए 45% तक सिकुड़ गया था। यह भारतीय निर्यात की व्यापार नीतियों और बाजार पहुंच के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। इसके अलावा, चालू खाता घाटे के बढ़ने के अनुमान और वैश्विक अनिश्चितताएं यह संकेत देती हैं कि निर्यात वृद्धि, विशेष रूप से वस्तुओं के क्षेत्र में, बाधाओं का सामना कर सकती है। वित्त वर्ष 2026 में माल निर्यात में गिरावट की रिपोर्ट, आधिकारिक आशावादी लक्ष्यों के विपरीत, निर्यात की गति की स्थिरता पर मिश्रित दृष्टिकोण दर्शाती है।
आगे का रास्ता
आगामी दिनों का रुख नए अमेरिकी व्यापार ढांचे के प्रभावी कार्यान्वयन और निर्यात मात्रा (Export Volumes) व प्रतिस्पर्धात्मकता पर इसके प्रभाव पर निर्भर करेगा। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष में कुल निर्यात $860 बिलियन के आंकड़े को पार कर सकता है। सेवा क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन एक महत्वपूर्ण सहारा बना रहेगा। हालांकि, घाटे के जोखिमों को कम करने और आर्थिक विस्तार को बनाए रखने के लिए, कीमती धातुओं से जुड़े आयात के दबाव का प्रबंधन और नए निर्यात बाजारों में विविधीकरण (Diversification) महत्वपूर्ण होगा।
