भारत का ट्रेड डेफिसिट $119 अरब पार, आयात में तूफानी तेजी, पर FTAs और रेमिटेंस दे रहे सहारा!

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत का ट्रेड डेफिसिट $119 अरब पार, आयात में तूफानी तेजी, पर FTAs और रेमिटेंस दे रहे सहारा!
Overview

India का ट्रेड डेफिसिट फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में **26%** बढ़कर **$119.3 अरब** पर पहुंच गया है। सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी उछाल के चलते आयात (Imports) में जबरदस्त तेजी देखी गई। हालांकि, इस गैप के बावजूद, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (Merchandise Exports) में मामूली बढ़ोतरी हुई है, और देश नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) पर काम कर रहा है। वहीं, विदेश से आने वाला पैसा (Remittance Inflows) एक अहम वित्तीय सहारा दे रहा है, जो अर्थव्यवस्था के जटिल लेकिन लचीले आउटलुक का संकेत देता है।

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आयात में जबरदस्त उछाल, खास तौर पर कीमती धातुओं से

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए India का ट्रेड डेफिसिट $119.3 अरब रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के $94.6 अरब के मुकाबले 26% ज्यादा है। यह पिछले 11 सालों में दूसरा सबसे बड़ा गैप है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह 6.4% की वृद्धि के साथ कुल आयात का $979.4 अरब तक पहुंचना है। सोने और चांदी की बढ़ी हुई कीमतों ने आयात लागत को काफी बढ़ा दिया। सोने के आयात में बढ़ोतरी का कारण कीमत में उछाल रहा, जबकि चांदी का आयात कीमत बढ़ने और खरीदारी बढ़ने, दोनों की वजह से बढ़ा। अकेले कीमती धातुओं के आयात ने देश के इंपोर्ट बिल में बड़ा इजाफा किया। फरवरी 2026 में मर्चेंडाइज इम्पोर्ट्स (Merchandise Imports) में 24% की ईयर-ऑन-ईयर बढ़त देखी गई, जिसका मुख्य कारण सोना और चांदी की खरीदारी रही। इस दौरान, भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ, जो 1.12% की मासिक गिरावट के साथ 0.01073 (USD/INR) के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

निर्यात में मामूली वृद्धि

आयात में इतनी बढ़त के बावजूद, India के एक्सपोर्ट्स (Exports) इस फाइनेंशियल ईयर में 4.22% बढ़े। मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स 1% बढ़कर $441.78 अरब तक पहुंच गए। इलेक्ट्रॉनिक गुड्स, इंजीनियरिंग गुड्स, मीट, डेरी और पोल्ट्री प्रोडक्ट्स, मरीन प्रोडक्ट्स, अभ्रक (Mica) और मिनरल्स जैसे सेक्टर्स ने इस ग्रोथ को लीड किया। चीन और स्पेन को हुए निर्यात में क्रमशः $5 अरब और $2 अरब की उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। अमेरिका और UAE को एक्सपोर्ट्स भी बढ़े, हालांकि अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस (Trade Surplus) कम हुआ। सर्विसेज एक्सपोर्ट्स (Services Exports) मजबूत बने रहे, जिनका अनुमान फाइनेंशियल ईयर के लिए $418.31 अरब लगाया गया है, जो IT और बिजनेस सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में India की ग्रोथ को दर्शाता है।

भू-राजनीतिक तनाव से व्यापार प्रवाह बाधित

मार्च 2026 में, खासकर पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का India के व्यापार प्रवाह पर बड़ा असर पड़ा। इस क्षेत्र से एक्सपोर्ट्स में 57.95% की गिरावट आई, जो $3.5 अरब की कमी है, वहीं पश्चिम एशिया से आयात 51.6% घट गया। इस क्षेत्र की अस्थिरता ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर (Red Sea) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों को प्रभावित किया, जिससे सप्लाई चेन में रुकावट, शिपिंग लागत में बढ़ोतरी और ग्लोबल शिपमेंट में देरी की चिंताएं बढ़ गईं। मार्च 2026 के लिए मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स $38.92 अरब रहे, जो मार्च 2025 के $42.05 अरब से कम थे। इन रुकावटों के कारण फरवरी 2026 में मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट $27.1 अरब तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुना था।

नए ट्रेड डील्स से एक्सपोर्ट्स को मिलेगा बूस्ट

वैश्विक व्यापार की अस्थिरता के जवाब में, India नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यूके (UK) के साथ FTA के 1 मई, 2026 के आसपास लागू होने की उम्मीद है, जो Indian गुड्स के लिए 99% ड्यूटी-फ्री एंट्री देगा। इंडिया-ओमान कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) 1 जून, 2026 तक लागू होने की उम्मीद है, जिससे Indian एक्सपोर्ट्स को महत्वपूर्ण ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगी। यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ ट्रेड डील पर बातचीत जनवरी 2026 में पूरी हो गई थी, और इसके 2027 की शुरुआत तक लागू होने की उम्मीद है। इंडिया-न्यूजीलैंड FTA पर भी जल्द हस्ताक्षर होने की संभावना है। इन एग्रीमेंट्स का मकसद Indian एक्सपोर्टर्स के लिए मार्केट एक्सेस को बेहतर बनाना है।

रेमिटेंस से मिल रहा अहम सहारा

विदेशों से भेजे जाने वाले पैसे (Remittance Inflows) ट्रेड डेफिसिट के दबाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच प्रदान कर रहे हैं। अनुमान है कि FY25 में India के रेमिटेंस ने उसके मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट का 47% हिस्सा फाइनेंस किया, जो रिकॉर्ड $135.46 अरब तक पहुंच गया। डिजिटलाइजेशन और बढ़ते क्रॉस-बॉर्डर माइग्रेशन के कारण रेमिटेंस मार्केट में लगातार ग्रोथ की उम्मीद है। ये इनफ्लोज़ एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहारा देते हैं और घरेलू आर्थिक विकास को सपोर्ट करते हैं।

ट्रेड बैलेंस के लिए बने रहेंगे जोखिम

हालांकि नए ट्रेड एग्रीमेंट्स और रेमिटेंस से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन महत्वपूर्ण जोखिम बने हुए हैं। सोना और चांदी जैसे प्राइस-सेंसिटिव इम्पोर्ट्स (Price-sensitive imports) से बढ़ता ट्रेड डेफिसिट, India को इम्पोर्टेड इन्फ्लेशन (Imported Inflation) और संभावित करेंसी डेप्रिसिएशन (Currency Depreciation) के जोखिम में डालता है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता एक बड़ा खतरा है, जो व्यापार मार्गों को प्रभावित करता है और लॉजिस्टिक्स लागत को बढ़ाता है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से डेफिसिट और बढ़ सकता है, क्योंकि प्रति $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को 30-40 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा सकती है। हालांकि एक्सपोर्ट्स बढ़ रहे हैं, लेकिन सर्विसेज की तुलना में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स की धीमी ग्रोथ गुड्स ट्रेड में एक कमजोरी को दर्शाती है। बढ़ती कीमतों वाली इम्पोर्टेड कमोडिटीज पर उच्च निर्भरता एक ऐसी चुनौती है जो ट्रेड बैलेंस पर दबाव बनाए रख सकती है। भारतीय रुपये का कमजोर होता ट्रेंड भी जोखिम बढ़ाता है, जिससे इम्पोर्ट की लागत बढ़ सकती है।

चुनौतियों के बावजूद इकोनॉमिक आउटलुक पॉजिटिव

एनालिस्ट्स का अनुमान है कि FY2026 में India का CAD, GDP का लगभग 1.0% रहेगा, जो FY2025 में 0.6% से अधिक है। इसके बावजूद, अर्थव्यवस्था में मजबूत GDP ग्रोथ का अनुमान है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) को 2026 में 6.9% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ की उम्मीद है। भू-राजनीतिक कारकों से आई अस्थिरता के बावजूद, निफ्टी 50 (Nifty 50) इंडेक्स 15 अप्रैल, 2026 को 24,200 अंकों के ऊपर बंद हुआ, जो निवेशकों के विश्वास को दर्शाता है। निफ्टी कैपिटल मार्केट्स (Nifty Capital Markets) इंडेक्स ने भी 2026 में ईयर-टू-डेट निफ्टी 50 को आउटपरफॉर्म किया है।

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