आम बजट 2026-27 में भारत के टैक्स ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकार ने दशकों पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 को बदलते हुए 1 अप्रैल 2026 से 'Income Tax Act, 2025' को लागू करने का ऐलान किया है। इस बड़े कदम का मुख्य उद्देश्य टैक्स कानूनों को सरल बनाना, अनुपालन (compliance) को आसान करना और अदालतों में चल रहे टैक्स विवादों को कम करना है। अच्छी खबर यह है कि डायरेक्ट टैक्स की दरें (rates) और स्लैब (slabs) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नया टैक्स एक्ट और सरलीकरण का फोकस
नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत, मौजूदा 1961 के एक्ट के कई हिस्सों को सरल बनाया गया है, जिससे कुल टेक्स्ट वॉल्यूम करीब 50% तक कम हो गया है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि यह बदलाव राजस्व-तटस्थ (revenue-neutral) हो, जिसका मतलब है कि टैक्स की दरों या स्लैब में कोई बड़ा फेरबदल नहीं होगा। आम करदाताओं के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फॉर्म को भी काफी सरल बनाया जा रहा है, जिन्हें जल्द ही नोटिफाई किया जाएगा।
गैर-अनुपालन पर कड़े जुर्माने
टैक्स चोरी या गलत जानकारी देने वालों पर नकेल कसने के लिए जुर्माने (penalties) के नियमों को कड़ा किया गया है। अगर करदाता से कोई वास्तविक गलती (genuine error) होती है, तो उस पर टैक्स की राशि का 50% जुर्माना लग सकता है। लेकिन, अगर जानबूझकर गलत जानकारी दी जाती है या आय को छुपाया जाता है, तो टैक्स की राशि का 200% तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
करदाताओं को राहत के उपाय
करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए, रिवाइज्ड इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की समय-सीमा 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दी गई है। इसके लिए एक मामूली शुल्क देना होगा। साथ ही, जिन लोगों का टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) ज्यादा कट गया है, वे देर से ITR फाइल करने पर भी बिना किसी जुर्माने के अपना रिफंड क्लेम कर सकेंगे।
निवेशकों और बाज़ार पर असर
निवेशकों के लिए, बजट में सिक्योरिटीज ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। वायदा (futures) कारोबार पर STT की दर 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दी गई है, जबकि ऑप्शंस (options) पर यह 0.1% या 0.125% से बढ़कर 0.15% हो गई है। इस कदम से सट्टा (speculative) कारोबार को रोकने और राजस्व बढ़ाने का लक्ष्य है। इस खबर के आते ही शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली।
शेयर बायबैक (buyback) से होने वाली आय को अब सभी शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन्स (capital gains) के तौर पर टैक्स किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। हालांकि, प्रमोटरों के लिए घरेलू कंपनियों पर 22% और अन्य पर 30% की दर से अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगेगा। मिनिमम ऑल्टरनेट टैक्स (MAT) के तहत भुगतान करने वाले गैर-निवासियों को कर में छूट मिलेगी और MAT दर 15% से घटाकर 14% कर दी गई है।
खास राहतें और डिस्क्लोजर
एक खास ऐलान में, सरकार ने उन छोटे करदाताओं के लिए विदेशी संपत्ति (foreign asset) का खुलासा करने के लिए छह महीने की अतिरिक्त मोहलत दी है, जो विदेश में पढ़ रहे छात्र या पेशेवर हैं। वहीं, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत शिक्षा और मेडिकल खर्चों के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) की दर 5% से घटाकर 2% कर दी गई है। इसी तरह, विदेशी टूर पैकेज पर भी TCS दर 2% कर दी गई है। इसके अलावा, मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (Motor Accident Claims Tribunals) से मिलने वाले अवॉर्ड्स को भी इनकम टैक्स से छूट दी गई है।
आर्थिक संदर्भ और सेक्टर आउटलुक
यह टैक्स सुधार बड़े पैमाने पर पूंजीगत व्यय (capital expenditure) को बढ़ाने की सरकारी मंशा का हिस्सा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) के लिए सार्वजनिक पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के फोकस को दर्शाता है। वहीं, राजकोषीय घाटा (fiscal deficit) जीडीपी का 4.3% रहने का अनुमान है। इन टैक्स सुधारों और सरलीकरण से व्यापारिक माहौल को और बेहतर बनाने और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।