टैक्स का नया युग: अप्रैल 2026 से लागू होगी नई इनकम टैक्स एक्ट
भारत में टैक्स के नियमों में बड़ा फेरबदल होने वाला है। सरकार ने पक्की मुहर लगा दी है कि 1 अप्रैल, 2026 से नई इनकम टैक्स एक्ट लागू होगी। यह देश के फाइनेंशियल और इकोनॉमिक स्ट्रक्चर में एक बड़ा स्ट्रक्चरल शिफ्ट लाएगा। इस बड़े बदलाव के बावजूद, बजट 2026 में पुराने टैक्स नियमों में करीब 63 अहम संशोधन किए गए हैं, ताकि टैक्सपेयर्स और कंपनियों के लिए यह ट्रांज़िशन आसान हो सके। ये संशोधन कॉर्पोरेट टैक्स से लेकर इंडिविजुअल कम्प्लायंस तक, टैक्स सिस्टम को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से किए गए हैं।
कॉर्पोरेट टैक्स और MAT में बड़े बदलाव
मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (MAT) के नियम भी बदलने जा रहे हैं। नए प्रस्तावों के तहत, 1 अप्रैल, 2026 से मौजूदा MAT प्रोविजन्स के तहत चुकाया गया टैक्स पुराने नियमों के तहत फाइनल माना जाएगा, जिससे नए MAT क्रेडिट का जमा होना बंद हो जाएगा। MAT रेट को भी बुक प्रॉफिट के 14% तक घटा दिया गया है, जो अभी 15% है। 31 मार्च, 2026 तक जमा हुआ पुराना MAT क्रेडिट सेट-ऑफ के लिए उपलब्ध रहेगा, लेकिन डोमेस्टिक कंपनियों के लिए टैक्स लायबिलिटी का 25% तक सीमित रहेगा। फॉरेन कंपनियों के लिए भी विशेष शर्तें लागू होंगी। क्रूज़ शिप ऑपरेशंस या इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज़ जैसी सेवाओं में लगे नॉन-रेज़िडेंट्स को MAT से छूट मिलेगी। इन बदलावों का मकसद कॉर्पोरेट टैक्स कम्प्लायंस को आसान बनाना और टैक्स प्लानिंग की रणनीतियों को बदलना है।
ICDS और अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स का इंटीग्रेशन
एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट यह है कि मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स और सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज़ मिलकर एक जॉइंट कमेटी बनाएंगे। इस कमेटी का काम इनकम कंप्यूटेशन एंड डिस्क्लोजर स्टैंडर्ड्स (ICDS) को सीधे इंडियन अकाउंटिंग स्टैंडर्ड्स (Ind AS) में शामिल करना होगा। इस इंटीग्रेशन से 2027-28 के टैक्स ईयर से ICDS के आधार पर अलग से अकाउंटिंग करने की ज़रूरत खत्म हो जाएगी। हालांकि, इस कदम से इंटरनेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड्स (IFRS) से कुछ बदलाव (carve-outs) करने पड़ सकते हैं, जिससे ग्लोबल अकाउंटिंग प्रिंसिपल्स के साथ तालमेल बिठाना एक चुनौती भरा काम होगा।
विदेशी संपत्ति की घोषणा और कम्प्लायंस
जो लोग अपनी अनडिस्क्लोज़्ड विदेशी संपत्ति और आय को स्वेच्छा से घोषित करना चाहते हैं, उनके लिए सरकार एक समय-सीमा वाली स्कीम लाएगी। इस स्कीम के तहत, संपत्ति घोषित करने और टैक्स चुकाने पर पेनाल्टी और प्रोसिक्यूशन से लिमिटेड इम्युनिटी मिलेगी। हालांकि, जिन मामलों में पहले से प्रोसिक्यूशन चल रहा है या जो अपराध से अर्जित आय है, वे इसमें शामिल नहीं होंगे। छोटे टैक्सपेयर्स के लिए, विदेशी संपत्ति का खुलासा न करने पर ₹25 लाख तक के प्रोसिक्यूशन थ्रेशोल्ड का प्रस्ताव है, जिसमें इम्मूवेबल प्रॉपर्टी शामिल नहीं है। यह स्कीम कम्प्लायंस बढ़ाने और छोटे टैक्सपेयर्स पर बोझ कम करने में मदद करेगी।
अन्य अहम बदलाव
बजट में टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) के नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। ओवरसीज़ ट्रैवल पैकेज और एजुकेशन व मेडिकल पर्पज़ के लिए किए जाने वाले रेमिटेंस पर TCS रेट को घटाकर 2% कर दिया गया है। वहीं, स्पेक्युलेटिव ट्रेडिंग को कंट्रोल करने के लिए फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर आउटले को बढ़ाया गया है। भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (PROI) द्वारा भारतीय लिस्टेड इक्विटीज़ में निवेश की लिमिट बढ़ाकर 10% कर दी गई है, जिसका कुल कैप 24% होगा। इन बदलावों का मकसद कम्प्लायंस को सरल बनाना, विवादों को कम करना और भारत के टैक्स फ्रेमवर्क को ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिसेज के अनुरूप बनाना है, ताकि इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस बढ़े।