टैक्स विभाग की नई टैक्टिक्स
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) अब टैक्स कलेक्शन के लिए और ज़्यादा स्मार्ट तरीके अपना रहा है। डिपार्टमेंट ने बड़े शहरों जैसे अहमदाबाद, सूरत, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु और मुंबई की कई बड़ी बिज़नेस फैमिलीज़ पर फोकस किया है, जिन पर विदेशी संपत्ति (Foreign Assets) और विदेशी आय (Overseas Income) को रिपोर्ट न करने का आरोप है। अनुमान है कि इन फैमिलीज़ की अघोषित विदेशी संपत्ति हजारों करोड़ रुपये की हो सकती है।
डेटा ही है मुख्य हथियार
डिपार्टमेंट की यह तेज़ कार्रवाई ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फॉर्मेशन (AEOI) और कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) जैसे इंटरनैशनल एग्रीमेंट्स की बदौलत संभव हो पा रही है। इन फ्रेमवर्क के ज़रिए अलग-अलग देशों के बीच हर साल फाइनेंशियल अकाउंट्स की जानकारी शेयर होती है, जिससे टैक्स अथॉरिटीज को देश के अंदर और बाहर संपत्ति के बीच गड़बड़ी का पता लगाने में मदद मिलती है। यह 'NUDGE' कैंपेन का ही अगला हिस्सा है, जिसके तहत पहले भी 24,000 से ज़्यादा टैक्सपेयर्स ने करीब ₹29,208 करोड़ की विदेशी संपत्ति और लगभग ₹1,089.88 करोड़ की विदेशी आय का खुलासा किया था। अब डिपार्टमेंट सीधे उन लोगों को नोटिस भेजेगा जिनके विदेशी अकाउंट्स या एसेट्स की जानकारी मिली है, लेकिन जानकारी के सोर्स का खुलासा नहीं किया जाएगा।
'अम्नेस्टी स्कीम' से छोटे टैक्सपेयर्स को राहत
यूनियन बजट 2026 में 'फॉरेन एसेट्स ऑफ स्मॉल टैक्सपेयर्स डिस्क्लोजर स्कीम, 2026' (FAST-DS) के नाम से एक खास स्कीम लाई गई है। यह स्कीम उन छोटे टैक्सपेयर्स के लिए है जिनके पास अघोषित विदेशी संपत्ति या आय है। उन्हें एक बार 6 महीने के अंदर अपनी संपत्ति या आय का खुलासा करने का मौका मिलेगा। इसके तहत, उन्हें संपत्ति के फेयर मार्केट वैल्यू या अघोषित आय पर 30% टैक्स देना होगा, साथ ही पेनल्टी के तौर पर अतिरिक्त 30% की लेवी देनी होगी। ऐसा करने पर वे कानूनी कार्रवाई (Prosecution) से बच जाएंगे।
अमीरों के लिए कड़े नियम
वहीं, बड़ी बिज़नेस फैमिलीज़ के लिए नियम ज़्यादा सख्त हैं। उनकी अघोषित विदेशी संपत्ति पर 30% टैक्स के अलावा, पेनल्टी टैक्स की राशि का तीन गुना तक हो सकती है, जो कुल मिलाकर 120% तक पहुंच सकती है। इसके अलावा, हर साल ₹10 लाख की अलग से पेनल्टी भी लग सकती है। खास बात यह है कि ये बड़ी बिज़नेस फैमिलीज़ 'अम्नेस्टी स्कीम' का फायदा नहीं उठा सकतीं। यह एक सोची-समझी रणनीति है ताकि अमीर लोगों से ज़्यादा से ज़्यादा रेवेन्यू वसूला जा सके, जबकि छोटे लोगों को एक सीमित दायरे में राहत दी जा सके।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास डेटा और कड़े नियम हैं, लेकिन 'ब्लैक मनी एक्ट' के तहत लगाए गए टैक्स की वसूली हमेशा एक चुनौती रही है। कई बार बड़े टैक्स डिमांड के बावजूद, असल वसूली काफी कम रह जाती है। अमीरों के लिए कड़े नियम और छोटे लोगों के लिए 'अम्नेस्टी' का यह अंतर टैक्सपेयर्स में थोड़ी असमानता की भावना पैदा कर सकता है। दूसरी तरफ, बढ़ती टैक्स जांच से कंपनियों की इमेज और कैपिटल की लागत पर भी असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट भी अब 'सब्सटेंस ओवर फॉर्म' (Substance over Form) पर ज़ोर दे रहा है, जिसका मतलब है कि टैक्स स्ट्रक्चर्स की गहरी जांच होगी। यह विदेशी निवेशकों के भरोसे पर भी असर डाल सकता है।
