वित्त मंत्रालय की अप्रैल की मंथली इकोनॉमिक रिव्यू (Monthly Economic Review) के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में भारत के सर्विस एक्सपोर्ट्स ने 418.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अभूतपूर्व स्तर छुआ है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में 7.9% की शानदार सालाना बढ़त को दर्शाता है। इस प्रदर्शन ने न सिर्फ निर्यात के पैमाने को दिखाया है, बल्कि देश के एक्सपोर्ट मिक्स में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव भी उजागर किया है। अब सर्विस सेक्टर कुल एक्सपोर्ट्स का 48.6% हिस्सा रखता है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 47% से ऊपर है। यह सेक्टर भारत की आर्थिक मजबूती का अहम जरिया बना हुआ है, जो देश के ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) का 50% से अधिक योगदान देता है।
खासकर, आईटी और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) सेक्टर इस ग्रोथ का मुख्य इंजन बना हुआ है। अनुमान है कि FY2026 तक यह सेक्टर 315.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा, जिसमें अकेले आईटी एक्सपोर्ट्स 246 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो सकते हैं। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) भी इस सेक्टर में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिनसे 64.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रेवेन्यू उत्पन्न हुआ है और लगभग 2 मिलियन प्रोफेशनल को रोजगार मिला है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का अनुमान है कि 2030 तक सर्विस एक्सपोर्ट्स 800 बिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुँच सकते हैं।
हालांकि, सर्विस सेक्टर का यह शानदार प्रदर्शन महत्वपूर्ण है, लेकिन देश का कुल ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) FY26 में बढ़कर 119.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है, जो FY25 के 94.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर से काफी ज्यादा है। इस बढ़त का मुख्य कारण मर्चेंडाइज ट्रेड (Merchandise Trade) में बड़ा डेफिसिट है। FY24-25 के दौरान, मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट 283.81 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसे सर्विस ट्रेड सरप्लस 189.40 बिलियन अमेरिकी डॉलर ने आंशिक रूप से ही कवर किया, जिसके परिणामस्वरूप कुल डेफिसिट 94.41 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। FY26 में सर्विस सरप्लस 213.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जो मर्चेंडाइज डेफिसिट का बड़ा हिस्सा कवर करने के बावजूद कुल असंतुलन को बढ़ने से नहीं रोक पाया। मार्च 2026 में ट्रेड डेफिसिट 20.67 बिलियन अमेरिकी डॉलर था, और कुछ अनुमानों के अनुसार FY26 का डेफिसिट 333 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है। यह बढ़ता डेफिसिट दिखाता है कि मर्चेंडाइज इम्पोर्ट्स, एक्सपोर्ट्स की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं, भले ही सर्विस एक्सपोर्ट्स मजबूत हों।
भारत सर्विस एक्सपोर्ट्स में दुनिया का सातवां सबसे बड़ा निर्यातक देश है, जिसके पास 2024 में ग्लोबल सर्विस ट्रेड का 4.3% हिस्सा है। यह 2005 में 2% की तुलना में एक महत्वपूर्ण उछाल है। यूनाइटेड स्टेट्स (United States) और यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) अभी भी दुनिया के प्रमुख सर्विस एक्सपोर्टर बने हुए हैं। हालाँकि भारत की सर्विस ग्रोथ मजबूत रही है, लेकिन नेट सर्विस एक्सपोर्ट्स की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) FY01-FY13 के 35% से घटकर FY13-FY25 के बीच 9.3% रह गई है। वैश्विक स्तर पर, 2025 में सर्विस ट्रेड में 8.2% की वृद्धि देखी गई। वहीं, मर्चेंडाइज ट्रेड का आउटलुक कम स्पष्ट है, जहाँ 2026 में ग्लोबल वॉल्यूम में केवल 1.9% की वृद्धि का अनुमान है, जो जियोपॉलिटिकल टेंशन (Geopolitical Tensions) और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से प्रभावित हो सकता है। उम्मीद है कि भारत की जीडीपी ग्रोथ मजबूत बनी रहेगी; वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने FY27 के लिए 6.6% और आईएमएफ (IMF) ने FY26-27 के लिए 6.5% का अनुमान लगाया है, जिससे भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा।
ट्रेड को बैलेंस करने के लिए सर्विस एक्सपोर्ट्स पर अधिक निर्भरता संभावित जोखिम पैदा करती है। बड़ा मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट, जिसका कारण धीमी गति से बढ़ा गुड्स एक्सपोर्ट ग्रोथ (FY26 में सिर्फ 1% सालाना वृद्धि) है, भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की स्ट्रक्चरल समस्याओं को उजागर करता है। जेम्स और ज्वेलरी जैसे लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट्स में कमजोरी देखी गई है, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी जैसे इम्पोर्ट्स में वृद्धि हुई है। यह लगातार ट्रेड असंतुलन विदेशी मुद्रा के बड़े बहिर्वाह की मांग करता है, जिससे रुपए पर दबाव पड़ सकता है और इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ सकती है, जो महंगाई को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में शिपिंग मार्गों में व्यवधान और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के इम्पोर्ट बिल को बढ़ा सकती हैं, जिससे डेफिसिट और चौड़ा हो सकता है। सर्विस एक्सपोर्ट्स, भले ही मजबूत हों, ग्लोबल स्लोडाउन से अछूते नहीं हैं, जो आईटी और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) की मांग को प्रभावित कर सकते हैं।
आगे देखते हुए, भारत सरकार यूनियन बजट 2026-27 में बताए गए उपायों जैसे क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए टैक्स हॉलिडे (Tax Holidays) और आईटी सर्विस प्राइसिंग एग्रीमेंट्स (IT Services Pricing Agreements) में सुधार के जरिए सर्विस एक्सपोर्ट्स को और बढ़ावा देने की योजना बना रही है। बहुपक्षीय संस्थान भारत के आर्थिक पथ के बारे में आशावादी बने हुए हैं, जो घरेलू मांग और बेहतर ट्रेड संभावनाओं से प्रेरित निरंतर ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं, जिसमें अमेरिकी टैरिफ में कमी का आंशिक समर्थन भी शामिल है। हालाँकि, बढ़ते ट्रेड डेफिसिट का प्रबंधन करना और मर्चेंडाइज ट्रेड में स्ट्रक्चरल समस्याओं का समाधान करना लंबी अवधि की बाहरी क्षेत्र स्थिरता और सतत आर्थिक ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण होगा।
