देश में डिजिटल पेमेंट के विस्तार के लिए सरकार एक नई राह पर चल पड़ी है। अब फोकस उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के फीचर फोन यूजर्स पर है, जो अभी तक डिजिटल पेमेंट की दुनिया से दूर हैं। असल में, सरकार चाहती है कि UPI जैसी सेवाएं सिर्फ स्मार्टफोन वालों तक ही सीमित न रहें, बल्कि हर किसी तक पहुंचें। यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि लगातार बढ़ते डिजिटल पेमेंट के लिए सिर्फ स्मार्टफोन पर निर्भर रहना काफी नहीं होगा। यह सब तभी संभव है जब बेसिक मोबाइल फोन के लिए भी आसान, सस्ते और सुलभ समाधान तैयार किए जाएं।
कैसे सुलझेगी पेमेंट की गुत्थी?
इस नई पहल का मुख्य जरिया है नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) का UPI 123Pay। यह सिस्टम फीचर फोन यूजर्स को बिना इंटरनेट के भी UPI ट्रांजैक्शन करने की सुविधा देता है। इसके साथ ही, IVR-आधारित सिस्टम (IVR-based systems) और मिस्ड-कॉल पेमेंट (missed-call payment) जैसे तरीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे डिजिटल फाइनेंस की पहुंच और बढ़ाई जा सके।
छोटे-मोटे ऑनलाइन पेमेंट के लिए ऑफलाइन UPI Lite (offline UPI Lite) जैसे समाधान भी लाए जा रहे हैं, जो कम कनेक्टिविटी वाले दूर-दराज के इलाकों में भी पेमेंट जारी रखने के लिए बहुत जरूरी हैं। UPI Lite X जैसी ऑफलाइन सुविधाएं NFC के जरिए सीधे पीयर-टू-पीयर ट्रांसफर की इजाजत देती हैं, जिसके लिए इंटरनेट या UPI PIN की जरूरत नहीं पड़ती। यह रोजमर्रा के छोटे भुगतानों के लिए एक बड़ी जरूरत को पूरा करता है। RBI ने भी ऑफलाइन इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए UPI Lite वॉलेट की लिमिट बढ़ाकर ₹5,000 कर दी है, जबकि हर ट्रांजैक्शन की लिमिट ₹1,000 रखी गई है।
इंफ्रास्ट्रक्चर, इतिहास और ग्लोबल मॉडल
दुनिया भर में मोबाइल पेमेंट के प्लेटफॉर्म तो हैं, लेकिन भारत का UPI इकोसिस्टम, अपनी इंटरऑपरेबिलिटी (interoperability) और सीधे बैंक से जुड़ने की क्षमता के साथ, एक अनूठा मॉडल है। UPI 123Pay जैसे फीचर फोन पेमेंट समाधान, एक बड़े यूजर बेस को एक एडवांस्ड डिजिटल पेमेंट नेटवर्क से जोड़ने की एक नई कोशिश है, जो कई दूसरे बाजारों से अलग है जहां ज्यादातर स्मार्टफोन-केंद्रित समाधानों पर ध्यान दिया जाता है।
डिजिटल पेमेंट का सफर: 2016 के नोटबंदी के बाद से भारत में डिजिटल ट्रांजैक्शन में भारी उछाल आया है। 2024 में UPI ने कुल पेमेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 75% से ज्यादा हिस्सा कवर कर लिया है। ग्रामीण भारत में भी ग्रोथ जबरदस्त रही है, जिसमें 2014 से 2024 के बीच 52% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिला है। जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) जैसी सरकारी पहलों ने वित्तीय समावेशन (financial inclusion) में अहम भूमिका निभाई है, जिससे लाखों बैंक अकाउंट डिजिटल सेवाओं से जुड़े हैं।
टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का साथ: यह पुश टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े सुधारों से भी जुड़ा है। 2025 की शुरुआत तक, 4G नेटवर्क भारतीय गांवों के 88.9% हिस्से को कवर कर चुके थे, जबकि 5G 77.8% गांवों तक पहुंच गया था। भारत का लक्ष्य 2030 तक 100% 4G पॉप्युलेशन कवरेज और 90% 5G कवरेज हासिल करना है। 2014 के बाद से ग्रामीण टेलीफोन कनेक्शन में 43% की बढ़ोतरी हुई है, जो शहरी दर से लगभग दोगुनी है। सरकार क्षेत्रीय भाषाओं के इंटरफेस और आवाज-आधारित पुष्टि (voice-based confirmations) जैसी सुविधाओं के लिए भी Bhashini जैसे पहलों का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है, जिससे इसका इस्तेमाल और आसान हो जाएगा।
क्या हैं चुनौतियां?
इतनी अच्छी योजनाओं के बावजूद, फीचर फोन यूजर्स को डिजिटल पेमेंट के मुख्यधारा में लाने में कई बड़ी बाधाएं हैं। उदाहरण के लिए, UPI 123Pay को अपनाने की रफ्तार धीमी रही है। यह कुल UPI ट्रांजैक्शन का 0.1% से भी कम है, जिसका मुख्य कारण इसका थोड़ा जटिल USSD-आधारित सिस्टम और लंबा ट्रांजैक्शन समय है।
डिवाइस की अपनी सीमाएं हैं; हालांकि अभी भी 300 मिलियन (30 करोड़) भारतीय फीचर फोन इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई कम आय वाले स्मार्टफोन यूजर्स भी पुराने 2G/3G डिवाइस इस्तेमाल करते हैं जो ऐप चलाने में संघर्ष करते हैं। इसके अलावा, इंटरनेट कनेक्टिविटी की अविश्वसनीयता और बिजली की अनियमित आपूर्ति, खासकर दूरदराज के इलाकों में, अभी भी बड़ी रुकावटें हैं, भले ही इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा हो। डिजिटल साक्षरता की कमी और धोखाधड़ी को लेकर भरोसे की चिंताएं भी लोगों को अपनाने से रोकती हैं। ग्रामीण यूजर्स अक्सर पारंपरिक नकदी या व्यक्तिगत बैंकिंग को प्राथमिकता देते हैं।
भविष्य की राह: वित्तीय समावेशन और ग्रामीण विकास
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर में जबरदस्त ग्रोथ जारी रहेगी। 2026 तक यह बाजार $10 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है, और भारत 2030 तक $1 ट्रिलियन की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। UPI वॉल्यूम सालाना 120 बिलियन के पार जाने की उम्मीद है।
फीचर फोन को शामिल करने पर ध्यान देना सिर्फ सेवाओं का विस्तार नहीं है, बल्कि यह वित्तीय समावेशन को लोकतांत्रिक बनाने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव वित्तीय पहुंच को गहरा कर सकता है, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दे सकता है, छोटे व्यवसायों को औपचारिक बना सकता है, और पहले से वंचित समुदायों को एकीकृत करके रोजगार पैदा कर सकता है। फीचर फोन यूजर्स के लिए पहुंच पर रणनीतिक जोर, डिजिटल परिवर्तन के लाभों को भारत की विशाल आबादी में व्यापक रूप से साझा करने का एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण दर्शाता है, जो अप्रयुक्त आर्थिक क्षमता को अनलॉक कर सकता है।