Union Budget 2026-27: ग्रामीण विकास का नया चेहरा! MGNREGA पर लगी रोक, VB-G RAM G को मिला बंपर फंड

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AuthorAditya Rao|Published at:
Union Budget 2026-27: ग्रामीण विकास का नया चेहरा! MGNREGA पर लगी रोक, VB-G RAM G को मिला बंपर फंड
Overview

Union Budget 2026-27 पेश होने के साथ ही ग्रामीण विकास पर खर्च के तरीके में बड़ा बदलाव देखा गया है। नई VB-G RAM G स्कीम को बजट का **40%** यानी **₹95,692 करोड़** आवंटित किए गए हैं, जबकि MGNREGA का बजट भारी कटौती के साथ **66%** घटाकर **₹30,000 करोड़** कर दिया गया है।

Union Budget 2026-27 के साथ ही भारत के ग्रामीण विकास के एजेंडे में एक बड़ा और निर्णायक मोड़ आया है। सरकार ने सीधा रोजगार देने वाली योजनाओं से हटकर एसेट बनाने और एकीकृत आजीविका सहायता पर जोर दिया है। VB-G RAM G स्कीम के लिए बड़ी फंडिंग और MGNREGA के बजट में भारी कटौती, ग्रामीण सहायता के तौर-तरीकों में नीतिगत बदलाव का संकेत देते हैं, जिसके दूरगामी असर देखने को मिलेंगे।

VB-G RAM G की ओर बड़ा दांव

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय का बजट बड़े फेरबदल के साथ पेश हुआ है। VB-G RAM G स्कीम, जिसे MGNREGA की जगह लाने की तैयारी है, उसे ₹95,692 करोड़ का भारी-भरकम फंड मिला है। यह ग्रामीण विकास विभाग के कुल खर्च का 40% है। यह निवेश ग्रामीण रोजगार और विकास के नए नजरिए पर एक बड़ा दांव दिखाता है। इसके विपरीत, MGNREGA का बजट 66% कम करके ₹30,000 करोड़ कर दिया गया है। यह एक बड़ा बदलाव है, जो सीधे रोजगार की गारंटी देने वाले बड़े पैमाने के प्रोग्राम्स से हटकर, एसेट निर्माण और ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को इंटीग्रेट करने वाली स्कीमों पर जोर देने का संकेत देता है।

आवास और सड़कों के लिए भी बढ़ी फंडिंग

VB-G RAM G पर फोकस के साथ ही, अन्य प्रमुख ग्रामीण विकास पहलों में भी खास फंडिंग बढ़ाई गई है। ग्रामीण आवास योजना, Pradhan Mantri Awas Yojana-Gramin (PMAY-G) को ₹54,917 करोड़ मिले हैं, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 66% ज्यादा हैं। इसी तरह, ग्रामीण सड़क निर्माण पर केंद्रित Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana (PMGSY) को ₹19,000 करोड़ का आवंटन मिला है, जो 73% की बढ़ोतरी है। National Rural Livelihood Mission (NRLM) और National Social Assistance Programme (NSAP) को भी मामूली बढ़ोतरी मिली है। कुल मिलाकर, VB-G RAM G और PMAY-G अब मंत्रालय के कुल खर्च का 63% हिस्सा कवर करते हैं, जो इन्फ्रास्ट्रक्चर और आवास पर एक बड़े कंसोलिडेटेड फोकस को दिखाता है।

वित्तीय संघवाद (Fiscal Federalism) पर असर

VB-G RAM G स्कीम की एक अहम बात इसका नया फंडिंग स्ट्रक्चर है। सामान्य राज्यों के लिए अब 60:40 का सेंटर-स्टेट कॉस्ट-शेयरिंग मॉडल अपनाया गया है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों के लिए यह 90:10 है। यह MGNREGA से बिल्कुल अलग है, जहां केंद्र सरकार ऐतिहासिक रूप से लगभग 90% खर्च उठाती थी। हालांकि कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इससे राज्यों पर ₹17,000 करोड़ का सामूहिक लाभ हो सकता है और उनकी अपनी भूमिका बढ़ेगी, वहीं कुछ विपक्षी शासित राज्यों ने इस बदलाव को सहकारी संघवाद (cooperative federalism) के खिलाफ और राज्यों पर बड़ा वित्तीय बोझ डालने वाला बताया है। इस बदलाव के कारण राज्यों को अपने संसाधनों से ज्यादा आवंटन करना होगा, जिससे उनके बजट पर दबाव बढ़ सकता है और ग्रामीण प्रोग्राम्स को लागू करने की उनकी क्षमता पर असर पड़ सकता है।

MGNREGA की घटती भूमिका और पुरानी चुनौतियाँ

MGNREGA के बजट में यह भारी कटौती पिछले कुछ सालों से जारी रुझान को दर्शाती है, भले ही गांवों में काम की मांग लगातार बनी हुई है। MGNREGA ने हमेशा एक महत्वपूर्ण सुरक्षा जाल का काम किया है। पिछले दशक में प्रति परिवार सालाना औसतन 48 दिन का रोजगार मिला है, और 10% से भी कम परिवारों ने 100 दिन का काम पूरा किया है। योजना में मजदूरी भुगतान में देरी जैसी समस्याएं भी रही हैं, जहां वित्त वर्ष 2025-26 में कई राज्यों में श्रमिकों को निर्धारित दरों से कम भुगतान मिला। हालांकि VB-G RAM G 125 दिनों के गारंटीड रोजगार का लक्ष्य रखती है, लेकिन फंडिंग में बदलाव और 60 दिनों की 'कृषि अवकाश' (agricultural pause) की शुरुआत रोजगार की निरंतरता और उपलब्धता को बदल सकती है।

PMAY-G को लागू करने में मुश्किलें

बजट में अच्छी-खासी बढ़ोतरी के बावजूद, PMAY-G को लागू करने में अभी भी दिक्कतें आ रही हैं। 2011 की जनगणना के पुराने लाभार्थी डेटा, बढ़ती निर्माण लागत के मुकाबले मौजूदा वित्तीय सहायता का मेल न खाना, और फंड जारी करने व प्रोजेक्ट अप्रूवल में सिस्टम की देरी जैसी समस्याएं बनी हुई हैं। हालांकि लगभग 70% लक्षित घर पूरे हो चुके हैं, लेकिन जमीन की उपलब्धता, लाभार्थी की पहचान और निर्माण की गुणवत्ता जैसे मुद्दों को हल करना अभी भी महत्वपूर्ण है।

नीतिगत बदलाव और भविष्य की रणनीति

MGNREGA जैसी अत्यधिक सब्सिडी वाली रोजगार गारंटी योजना से दूर हटना, जिसने COVID-19 महामारी जैसे आर्थिक झटकों के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, यह दर्शाता है कि पॉलिसी अब इन्वेस्टमेंट-लेड ग्रोथ और एसेट निर्माण की ओर बढ़ रही है। यह इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और आर्थिक आत्मनिर्भरता पर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ मेल खाता है। हालांकि, MGNREGA के लिए ऐतिहासिक बजट आवंटन अक्सर शुरुआती अनुमानों से काफी अधिक संशोधित अनुमानों के रूप में देखा गया है, जो बताता है कि मांग-आधारित योजनाओं के लिए लचीली फंडिंग की आवश्यकता होती है।

चुनौतियाँ और जोखिम

VB-G RAM G स्कीम बेहतर रोजगार गारंटी और एकीकृत विकास का वादा करती है, लेकिन इसमें कुछ महत्वपूर्ण जोखिम भी छिपे हैं। 60:40 फंडिंग मॉडल राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय जिम्मेदारी डालता है, जिनमें से कई पहले से ही वित्तीय तंगी में हैं। इससे राज्यों के बीच प्रोग्राम के कार्यान्वयन में असमानता आ सकती है, जो योजना के 'गारंटी' वाले पहलू को कमजोर कर सकती है, खासकर यदि राज्य केंद्र के योगदान से मेल खाने के लिए वित्तीय क्षमता नहीं रखते हैं। इसके अलावा, MGNREGA के लिए बजट से कहीं अधिक वास्तविक खर्च का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताता है कि ₹30,000 करोड़ का आवंटन मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हो सकता है, जिससे ग्रामीण सुरक्षा जाल में एक कमी आ सकती है। MGNREGA में मजदूरी के कम भुगतान जैसी निरंतर समस्याएँ चिंता पैदा करती हैं कि क्या VB-G RAM G में भी वैसी ही प्रशासनिक और भुगतान प्रणाली की चुनौतियाँ देखने को मिलेंगी। PMAY-G में देरी और लाभार्थी पहचान के मुद्दे भी सिस्टम की कमजोरियों को उजागर करते हैं जो नए फंड की प्रभावशीलता को बाधित कर सकते हैं। सीधे मांग-आधारित रोजगार योजना से हटकर, जो अधिक उत्पादक संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित कर सकती है, सबसे कमजोर लोगों की तत्काल आजीविका की जरूरतों को अनदेखा करने का जोखिम है, खासकर आर्थिक मंदी या जलवायु संबंधी झटकों के दौरान, अगर 'कृषि अवकाश' को सख्ती से लागू किया जाता है। 'नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर स्टैक' और डिजिटल एकीकरण की प्रशासनिक जटिलताएँ डिजिटल रूप से कम जुड़े या निरक्षर ग्रामीण आबादी के लिए बहिष्करण (exclusion) का जोखिम भी पैदा कर सकती हैं।

आगे क्या?

बजट का यह पुनर्गठन एसेट निर्माण और एकीकृत योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने की एक दीर्घकालिक रणनीति का संकेत देता है। विश्लेषकों का अनुमान है कि VB-G RAM G स्कीम अधिक दक्षता और एसेट निर्माण का लक्ष्य रखती है, लेकिन इसकी सफलता केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी समन्वय, राज्य स्तर पर मजबूत वित्तीय प्रबंधन, और ग्रामीण आवास और मजदूरी भुगतान में चल रही कार्यान्वयन चुनौतियों को हल करने की क्षमता पर निर्भर करेगी। NRLM में बढ़ी हुई फंडिंग यह भी बताती है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने, विविध आजीविका और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर लगातार ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

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