क्यों टूटा रुपया?
फाइनेंशियल ईयर 2026 के आखिरी दिन, यानी 1 अप्रैल, 2026 को भारतीय करेंसी मार्केट की छुट्टी थी, लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया (-
₹93.60) के आसपास कारोबार कर रहा था। यह 30 मार्च, 2026 के रिकॉर्ड लो ₹94.83 से थोड़ा सुधरा था, लेकिन साल की शुरुआत के ₹89.96 के लेवल से काफी नीचे था। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2026 में, भारतीय रुपये में 9.88% की बड़ी गिरावट आई, जो पिछले 14 सालों में सबसे ज्यादा है। इस गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल अनिश्चितता के बीच मजबूत होता अमेरिकी डॉलर मुख्य कारण रहे।
SBI की चिंता और स्ट्रक्चरल इश्यूज
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक रिपोर्ट ने भी रुपया की कमजोरी पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों की डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों द्वारा पैसे निकालने की आशंका जैसे 'स्ट्रक्चरल इश्यूज' (Structural Issues) रुपये को ग्लोबल झटकों के प्रति और भी संवेदनशील बना रहे हैं। SBI का कहना है कि भले ही भारत के पास $700 अरब से ज्यादा का मजबूत फॉरिन एक्सचेंज रिजर्व है, जो 10 महीने से ज्यादा के आयात को कवर करने के लिए काफी है, लेकिन ये गहरे मुद्दे चिंता का विषय हैं।
अन्य करेंसी से तुलना और RBI का कदम
मार्च 2026 में, जब भारतीय रुपया और कमजोर हो रहा था, तब चीनी युआन (Chinese Yuan) और ब्राज़ीलियाई रियल (Brazilian Real) जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी बेहतर प्रदर्शन कर रही थीं। ताजा भू-राजनीतिक संकट को 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़ा माना जा रहा है, जो एक लंबे समय तक रुपया के लिए खतरा बन सकता है।
इसThe situation to curb speculation, the Reserve Bank of India (RBI) ने 10 अप्रैल, 2026 से बैंकों की नेट ओपन करेंसी पोजीशन (Net Open Currency Position) को $100 मिलियन तक सीमित करने का फैसला किया है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे मार्केट लिक्विडिटी (Market Liquidity) प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) बढ़कर $13.2 अरब हो गया है, और अगर तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो यह और बढ़ सकता है।
आगे क्या?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगले साल भारतीय रुपया 92-97 के लेवल पर डॉलर के मुकाबले ट्रेड कर सकता है। रुपया का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिम एशिया (West Asia) में भू-राजनीतिक तनाव कैसे सुलझता है, कच्चे तेल की कीमतों में क्या उतार-चढ़ाव आता है, और RBI मार्केट वोलेटिलिटी (Market Volatility) को कैसे मैनेज करता है। सरकार का कहना है कि रुपया की चाल बाजार पर निर्भर करती है, लेकिन स्ट्रक्चरल इश्यूज एक मुश्किल दौर की ओर इशारा कर रहे हैं।