रुपये का मूल्यांकन बाज़ार की शक्तियों से नियंत्रित
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारतीय सरकार रुपये के मूल्यांकन में दखल नहीं देती है। उन्होंने कहा कि रुपये की चाल बाज़ार की ताकतों और वैश्विक आर्थिक प्रभावों का नतीजा है। 19वें रोजगार मेले में बोलते हुए गोयल ने पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाओं से उत्पन्न अस्थिरता के बीच रुपये में हालिया मजबूती का संकेत दिया।
वैश्विक चुनौतियों के बीच करेंसी की रिकवरी
शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 63 पैसे सुधरकर 95.73 पर बंद हुआ। इस रिकवरी में कच्चे तेल की गिरती कीमतों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अपेक्षित कार्रवाइयों का समर्थन मिला। हफ्ते की शुरुआत में, गोयल ने चालू खाते के घाटे (current account deficit) को पाटने के लिए संभावित सरकारी उपायों का जिक्र किया था, जो रुपये के पिछले कमजोर होने और समग्र व्यापार घाटे के दबाव से बढ़ा था। पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण, विशेष रूप से वहाँ के शिपिंग मार्गों से जुड़े ग्लोबल सप्लाई चेन की कमजोरियां एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं।
घरेलू मज़बूती और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
मंत्री गोयल ने विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में मज़बूत घरेलू मांग देखी है। उन्होंने आयात और निर्यात दोनों में वृद्धि को मज़बूत आर्थिक गतिविधि के संकेत के रूप में बताया। सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मज़बूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और विशिष्ट क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता से जुड़े सप्लाई चेन जोखिमों को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। सेमीकंडक्टर मिशन (semiconductor mission) और नए क्षेत्रीय प्रस्ताव जैसी पहलें आत्मनिर्भरता की इस रणनीति का हिस्सा हैं।
एशियाई करेंसी का संदर्भ
रुपये की चाल व्यापक एशियाई मुद्रा बाज़ार के भीतर हो रही है, जहां कई उभरते बाज़ारों की करेंसीज़ वैश्विक ब्याज दरों के अंतर और भू-राजनीतिक अनिश्चितता से दबाव में हैं। इंडोनेशियाई रुपिया (Indonesian Rupiah) और थाई बाह (Thai Baht) जैसी करेंसियां भी अस्थिरता देखी गई हैं। भारत का मैन्युफैक्चरिंग और आयात कम करने पर ध्यान सप्लाई चेन को विविध बनाने की वैश्विक प्रवृत्तियों के अनुरूप है, एक ऐसी रणनीति जिसका पालन वियतनाम (Vietnam) और मेक्सिको (Mexico) जैसे देश विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए भी कर रहे हैं।
जोखिम कारक और स्थिरता
जहां गोयल बाज़ार-संचालित मूल्यांकन पर ज़ोर देते हैं, वहीं केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप, विशेष रूप से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा, ऐतिहासिक रूप से अत्यधिक मुद्रा उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और स्थिरता सुनिश्चित करने में भूमिका निभाते हैं। पश्चिम एशिया में लगातार भू-राजनीतिक अस्थिरता, साथ ही वैश्विक कमोडिटी कीमतों में संभावित बदलाव, रुपये पर नीचे की ओर दबाव फिर से डाल सकते हैं। व्यापार घाटे का बढ़ना, यदि निर्यात वृद्धि और नियंत्रित आयात खर्च के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रबंधित नहीं किया गया, तो मुद्रा स्थिरता के लिए एक निरंतर जोखिम प्रस्तुत करता है।
