भारतीय रुपया मार्च में 4% गिरा, RBI ने ₹8 लाख करोड़ के फॉरेक्स रिजर्व बेचे

ECONOMY
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AuthorNeha Patil|Published at:
भारतीय रुपया मार्च में 4% गिरा, RBI ने ₹8 लाख करोड़ के फॉरेक्स रिजर्व बेचे
Overview

RBI ने मार्च महीने में फॉरेक्स रिजर्व से नेट **$9.8 बिलियन** (लगभग ₹8 लाख करोड़) की भारी बिकवाली की है। फरवरी में जहां RBI ने डॉलर खरीदे थे, वहीं मार्च में इसने बड़ी मात्रा में डॉलर बेच दिए। ईरान-इजराइल तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने भारतीय रुपये पर भारी दबाव डाला, जिससे यह डॉलर के मुकाबले **4%** तक गिर गया और अपने ऑल-टाइम लो पर पहुंच गया। यह भारत जैसे बड़े एनर्जी इंपोर्टर देश के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

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डॉलर के मुकाबले बेबस हुआ रुपया, RBI ने झोंके रिजर्व

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च में अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) से $9.76 बिलियन की नेट बिकवाली की। यह फरवरी में की गई नेट खरीदारी से बिल्कुल उलट है। इस कदम ने भारतीय रुपये को पिछले छह सालों में सबसे बड़ी मासिक गिरावट में धकेल दिया, जिससे यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4% कमजोर हो गया।

ईरान-इजराइल तनाव का असर

इस गिरावट का मुख्य कारण ईरान में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई अप्रत्याशित तेजी रही। भारत एक बड़ा एनर्जी इंपोर्टर देश है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती हैं। इस स्थिति को देखते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी और डेट मार्केट से अपना एक्सपोजर कम करना शुरू कर दिया, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ा। मार्च में रुपया डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 95.21 तक गिर गया था। हालांकि, RBI के हस्तक्षेप के बाद यह शुक्रवार को 95.69 पर बंद हुआ।

RBI की क्या है स्ट्रैटेजी?

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में RBI ने फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में $19.88 बिलियन की खरीदारी और $29.64 बिलियन की बिकवाली की। यह फरवरी के $7.4 बिलियन की नेट खरीदारी से काफी अलग है। साथ ही, मार्च के अंत तक RBI की नेट फॉरवर्ड डॉलर बिक्री बढ़कर $103.06 बिलियन हो गई, जो फरवरी में $77.7 बिलियन थी। ये फॉरवर्ड बिक्री भविष्य में डॉलर बेचने की प्रतिबद्धताएं हैं, जो करेंसी मैनेजमेंट का एक तरीका है। इससे पता चलता है कि RBI रुपये की अस्थिरता को काबू करने के लिए एक मल्टी-प्रॉन्ग स्ट्रैटेजी अपना रहा है।

निवेशकों की चिंताएं

जहां एक ओर RBI का दखल करेंसी को स्थिर रखने की कोशिश दिखाता है, वहीं दूसरी ओर विदेशी मुद्रा भंडार में इतनी बड़ी कमी एक बड़ा जोखिम भी है। अगर यह बिकवाली जारी रही, तो भविष्य में किसी भी झटके से निपटने की RBI की क्षमता कम हो सकती है। इससे निवेशकों का भरोसा भी डगमगा सकता है और उधार लेने की लागत बढ़ सकती है। फॉरवर्ड डॉलर बिक्री, जो तात्कालिक अस्थिरता को प्रबंधित करने का एक उपकरण है, भविष्य में रिजर्व पर एक दावा भी पेश करती है। इसके अलावा, रुपये की वैश्विक ऊर्जा कीमतों के प्रति संवेदनशीलता बाहरी भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति भारत की भेद्यता को उजागर करती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.