Indian Rupee Latest: रिकॉर्ड लो पर रुपया! RBI की डॉलर बिकवाली, रिजर्व में बड़ी सेंध

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Rupee Latest: रिकॉर्ड लो पर रुपया! RBI की डॉलर बिकवाली, रिजर्व में बड़ी सेंध
Overview

भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है. लगातार गिरते रुपये को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डॉलर बेच रहा है, जिसके चलते देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) दो महीने के निचले स्तर **₹709.76 बिलियन** पर आ गया है.

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रुपये पर दबाव क्यों?

इस साल की शुरुआत से अब तक रुपया लगभग 4% कमजोर हो चुका है और 23 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड 93.98 के स्तर को छू गया. इस तेज गिरावट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचने पर मजबूर कर दिया है ताकि रुपये की अत्यधिक अस्थिरता को रोका जा सके.

RBI की रणनीति और भंडार की स्थिति

13 मार्च तक, देश का विदेशी मुद्रा भंडार $709.76 बिलियन तक गिर गया था, जो कि पिछले दो महीनों का सबसे निचला स्तर है. RBI फिलहाल 'लीडिंग अगेंस्ट द विंड' (leaning against the wind) की रणनीति अपना रहा है, जिसका मतलब है कि वे किसी एक निश्चित विनिमय दर (exchange rate) को बनाए रखने की कोशिश करने के बजाय अचानक होने वाले बड़े उतार-चढ़ावों को नियंत्रित कर रहे हैं. हालांकि, लगातार हो रही गिरावट यह संकेत दे रही है कि RBI के इस हस्तक्षेप की लागत बढ़ रही है.

विदेशी कर्ज और आयात की सुरक्षा

अधिकारियों का कहना है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 11.2 महीनों के आयात के लिए पर्याप्त है और देश के बाहरी कर्ज का करीब 95% कवर करता है. सितंबर 2025 के अंत तक, भारत का बाहरी कर्ज लगभग $746 बिलियन था, जो GDP का 19.2% है. यह कर्ज-से-GDP अनुपात (debt-to-GDP ratio) मध्यम माना जाता है, लेकिन चिंता की बात यह है कि इस कर्ज का 53% से अधिक हिस्सा अमेरिकी डॉलर में है. इसका मतलब है कि अगर अमेरिकी ब्याज दरें बढ़ती हैं या डॉलर मजबूत होता है, तो भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पैसा निकल सकता है, जिससे रुपया और कमजोर होगा.

कच्चे तेल का बढ़ता बोझ

मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है. इसकी वजह से ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude oil) की कीमतें $110 प्रति बैरल के पार जा रही हैं. चूंकि भारत अपनी तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल के आयात बिल में भारी वृद्धि होगी. इस बढ़े हुए आयात बिल का भुगतान करने के लिए डॉलर की मांग और बढ़ जाती है, जो रुपये पर और दबाव डालती है.

आगे क्या?

RBI के ₹57,300 करोड़ ($6.20 बिलियन) के नए आर्थिक स्थिरीकरण फंड (economic stabilization fund) के बावजूद, मौजूदा हालात चिंता बढ़ा रहे हैं. फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का उपयोग करने से उपलब्ध बफर कम हो जाता है. शुरुआती अनुमानों के अनुसार, RBI ने विदेशी मुद्रा बाजारों में डॉलर खरीदने की महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता जताई है, जो $100 बिलियन के करीब हो सकती है. यह उसकी विदेशी मुद्रा संपत्ति की ताकत को प्रभावित कर सकता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 तक रुपया ₹92-₹93 तक गिर सकता है, खासकर अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं या वैश्विक निवेशक का भरोसा कम होता है.

हालांकि, कुछ विश्लेषकों को लगता है कि वैश्विक मंदी और कमजोर डॉलर के कारण 2026 के अंत तक रुपया 86-87 प्रति डॉलर तक मजबूत हो सकता है. RBI अस्थिरता को संभालने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन लगातार बाहरी दबावों के चलते मुद्रा की स्थिरता के लिए और अधिक रिजर्व का उपयोग या मौद्रिक नीति की समीक्षा करनी पड़ सकती है.

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.