खर्च का तरीका बदल रहा है भारत के अमीरों का
Visa Consulting and Analytics (VCA) की इस रिपोर्ट में सामने आया है कि भारत का अमीर वर्ग पारंपरिक 'स्वामित्व' (Ownership) की सोच से आगे बढ़ रहा है और अब 'पहुंच' (Access) वाले अनुभवों पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है। इसकी मुख्य वजह अमीर आबादी का तेज़ी से बढ़ना और धन का बड़े शहरों से निकलकर छोटे शहरों तक फैलना है।
अमीर आबादी बढ़ी, खर्च के पैटर्न बदले
रिपोर्ट बताती है कि ₹10 लाख सालाना से ज़्यादा कमाने वाले भारतीयों की संख्या लगभग दोगुनी होकर 130 लाख तक पहुंच गई है। यह बढ़त सिर्फ मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि अहमदाबाद, सूरत, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में भी अमीर ग्राहकों के खर्च करने का तरीका परिष्कृत (sophisticated) होता जा रहा है।
यात्रा और खान-पान बने पहली पसंद
'अल्ट्रा एलीट' (Ultra Elite) सेगमेंट के लिए, अब डिस्क्रिशनरी स्पेंडिंग (Discretionary Spending) का 58% हिस्सा यात्रा (Travel) पर खर्च हो रहा है, जो कि रिटेल और लक्ज़री (Retail & Luxury) पर होने वाले 28% खर्च से काफी ज़्यादा है। औसतन, वे खान-पान (Dining) पर करीब ₹2 लाख सालाना खर्च करते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि 63% ऐसे ग्राहक विदेश में भी खूब खर्च कर रहे हैं। भारत में लक्ज़री गुड्स मार्केट, जो 2025 में 10.6 अरब डॉलर का था, 2034 तक 18.8 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसकी CAGR 6.17% रहने की उम्मीद है।
क्रेडिट कार्ड से प्रीमियम लाइफस्टाइल
यह प्रीमियम लाइफस्टाइल कहीं न कहीं क्रेडिट कार्ड्स (Credit Cards) की वजह से संभव हो पा रही है। आधे से ज़्यादा अमीर ग्राहक प्रीमियम मेम्बरशिप के लिए कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, और 70% तो खास 'प्रोडक्ट ड्रॉप्स' (Product Drops) में भी दिलचस्पी रखते हैं। अमेरिकी एक्सप्रेस (American Express) जैसी कंपनियां अपने प्रीमियम कार्ड्स के ज़रिए एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस और कॉन्सियर्ज सर्विसेज जैसी सुविधाएं देकर सीधे ग्राहकों की इसी ज़रूरत को पूरा कर रही हैं।
एकीकृत सेवाओं की ओर झुकाव
Visa Consulting & Analytics के हेड, सुष्मित नाथ ने कहा है कि यह एक बड़ा बदलाव है। उनका कहना है कि अब लोगों की चाहत सिर्फ चीज़ों के मालिक बनने की नहीं, बल्कि विशिष्ट (exclusive) और निर्बाध (seamless) एक्सेस की है। वे अलग-अलग उत्पादों की बजाय एकीकृत (integrated) इकोसिस्टम चाह रहे हैं, जहां सुविधा और पहुंच सबसे बड़े कारक हों।
जोखिम और बाज़ार की प्रतिस्पर्धा
हालांकि, इस ट्रेंड के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। क्रेडिट कार्ड पर बढ़ती निर्भरता से घर का कर्ज बढ़ सकता है और ब्याज दरें बढ़ने पर लोग मुश्किल में पड़ सकते हैं। बाजार में Visa को Mastercard जैसी कंपनियों से कड़ी टक्कर मिल रही है। साथ ही, ब्लॉकचेन (Blockchain) जैसी नई तकनीकें और सरकारी पेमेंट सिस्टम भी भविष्य में चुनौती पेश कर सकते हैं।
भविष्य का संकेत
कुल मिलाकर, Visa की रिपोर्ट इशारा करती है कि भविष्य में प्रीमियम खर्च का चलन सुविधा, विशिष्टता और एकीकृत लाइफस्टाइल सेवाओं से तय होगा।
