भारत की इकोनॉमी मजबूत, पर मार्केट में क्यों आई गिरावट? FIIs की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत की इकोनॉमी मजबूत, पर मार्केट में क्यों आई गिरावट? FIIs की बिकवाली ने बढ़ाई चिंता
Overview

भारत की इकोनॉमी मजबूती के संकेत दे रही है, जहाँ डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) बढ़ रही है और सरकार फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) बनाए हुए है। हालाँकि, जनवरी में निफ्टी 50 (Nifty 50) में **3.1%** की गिरावट और विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा **$3.2 बिलियन** की बिकवाली ने मार्केट में चिंता बढ़ा दी है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह मजबूत ग्रोथ सस्टेनेबल (Sustainable) है।

यह साल भारत की इकोनॉमी के लिए एक बड़ा टेस्ट साबित हो रहा है। जहाँ एक तरफ डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) में ज़बरदस्त उछाल देखा जा रहा है और सरकार फिस्कल कंसोलिडेशन (Fiscal Consolidation) पर फोकस कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जनवरी के शेयर बाजार के आंकड़े चिंताजनक हैं। निफ्टी 50 (Nifty 50) में 3.1% की गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की भारी बिकवाली ने बाज़ार की राह मुश्किल बना दी है। सवाल यह है कि क्या यह मजबूत इकोनॉमिक ग्रोथ शेयर बाजार में भी दिखेगी?

इकोनॉमी के मजबूत Pillar

फिस्कल हेल्थ पर फोकस: सरकार अपने फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को काबू में रखने के लिए प्रतिबद्ध है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए 4.4% और FY27 के लिए 4.3% का लक्ष्य रखा गया है। सबसे बड़ी बात, 2031 तक डेट-टू-जीडीपी (Debt-to-GDP) रेशियो को 50% तक लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। FY27 के लिए 10% नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ (Nominal GDP Growth) का अनुमान लगाया गया है। कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) में 11.5% की बढ़त का अनुमान है, जो ₹12.22 ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा। FY27 के लिए ग्रॉस बोरिंग (Gross Borrowing) का लक्ष्य ₹17.2 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। S&P Global Ratings जैसी रेटिंग एजेंसियां भी इन लक्ष्यों को पूरा करने की भारत की क्षमता पर भरोसा जता रही हैं।

घरेलू मांग में जोरदार वापसी: आम आदमी की खर्च करने की क्षमता में सुधार दिख रहा है, जो जनवरी के व्हीकल रजिस्ट्रेशन (Vehicle Registration) आंकड़ों में साफ झलकता है। टू-व्हीलर (Two-wheelers) की बिक्री में 20.6% और ट्रैक्टर (Tractors) की बिक्री में 22.6% की महीने-दर-महीने ग्रोथ देखी गई। यूपीआई (UPI) और आईएमपीएस (IMPS) जैसे डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) का वॉल्यूम भी 18.7% बढ़ा है, जो डिजिटल लेन-देन की आदत को दर्शाता है। मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) और सर्विसेज (Services) परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) भी विस्तार क्षेत्र में हैं, जो क्रमशः 55.4 और 58.5 पर हैं।

मार्केट में क्यों आई गिरावट?

इन मजबूत इकोनॉमिक सिग्नल्स के बावजूद, शेयर बाजार जनवरी में फिसलता दिखा। बेंचमार्क निफ्टी 50 (Nifty 50) इंडेक्स 3.1% लुढ़क गया, जबकि स्मॉल-कैप (Small-cap) और मिड-कैप (Mid-cap) सेगमेंट्स में 4.7% तक की और भी तीखी गिरावट आई। इस दौरान, ग्लोबल मार्केट्स में तेजी का माहौल था, जहाँ US का S&P 500 +1.37%, चीन +4.66% और कोरिया +28.11% जैसी बढ़त दिखा रहे थे।

FIIs की बिकवाली और DIIs का सहारा: यह गिरावट तब हुई जब फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने जनवरी में करीब $3.2 बिलियन (लगभग ₹26,500 करोड़) का पैसा निकाला। हालाँकि, डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) ने $7.6 बिलियन (लगभग ₹63,000 करोड़) का इनफ्लो कर इस बिकवाली को काफी हद तक संभाला। यह स्थानीय निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

बाहरी फैक्टर और भविष्य की उम्मीदें

ट्रेड डील का संभावित बूस्ट: ट्रेड फ्रंट पर एक बड़ा डेवलपमेंट संभावित यूएस-इंडिया ट्रेड डील (US-India Trade Deal) है। इससे टैरिफ (Tariffs) 50% से घटकर 18% हो सकते हैं, जो भारत के एक्सपोर्ट्स (Exports) को एक बड़ी मज़बूती देगा। एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इससे सालाना जीडीपी ग्रोथ (GDP Growth) में 0.2% तक का इजाफा हो सकता है।

RBI की स्थिर राह: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) में रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रखा है और न्यूट्रल स्टान्स (Neutral Stance) बनाए रखा है। यह इन्फ्लेशन (Inflation) को काबू में रखने के RBI के कॉन्फिडेंस को दर्शाता है, जो दिसंबर 2025 में 1.33% पर था। RBI ने FY27 के लिए इन्फ्लेशन को लगभग 4% के आसपास रहने का अनुमान लगाया है।

एनालिस्ट्स का नज़रिया

एनालिस्ट्स भारत की इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर पॉजिटिव हैं। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने 2026 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ (Real GDP Growth) 6.9% और 2027 के लिए 6.8% रहने का अनुमान लगाया है। डेलॉइट (Deloitte) का अनुमान है कि FY25-26 में ग्रोथ 7.5%-7.8% और FY26-27 में 6.6%-6.9% रह सकती है। मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने भी FY27 के लिए 10% नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को रियलिस्टिक माना है।

सतर्कता के संकेत

इन सब पॉजिटिव इकोनॉमिक पॉइंट्स के बावजूद, जनवरी के मार्केट परफॉरमेंस (Market Performance) ने ग्लोबल ट्रेंड्स से उलट चाल चली। FIIs की लगातार बिकवाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स के इंडियन इक्विटीज़ (Indian Equities) को लेकर थोड़ी सावधानी का संकेत देती है। HDFC Mutual Fund की एक रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर सेक्टर्स अपने हिस्टोरिकल प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जिससे वैल्यूएशन कंसर्न्स (Valuation Concerns) बढ़ रही हैं।

आगे की राह

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि भारत की ग्रोथ की राह मजबूत बनी रहेगी। लेकिन, डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) और पॉलिसी सपोर्ट (Policy Support) को सस्टेनेबल प्राइवेट इन्वेस्टमेंट (Sustainable Private Investment) और कॉर्पोरेट अर्निंग्स ग्रोथ (Corporate Earnings Growth) में बदलना सबसे बड़ा चैलेंज होगा। यही फैक्टर लॉन्ग-टर्म में फॉरेन कैपिटल (Foreign Capital) को अट्रैक्ट करेगा और मार्केट को सस्टेनेबल री-रेटिंग (Sustainable Re-rating) की ओर ले जाएगा।

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