रिजर्व में उछाल और बाजार की चाल
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, 13 फरवरी 2026 को खत्म हुए हफ्ते में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में जबरदस्त उछाल देखा गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर $725.727 बिलियन दर्ज किया गया। यह पिछले हफ्ते के $717.064 बिलियन के स्तर से $8.663 बिलियन की सीधी बढ़त है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह फॉरेन करेंसी एसेट्स (Foreign Currency Assets) में $3.55 बिलियन का इजाफा और सोने के भंडार में $4.99 बिलियन की शानदार वृद्धि रही। हालांकि, यह अच्छी खबर शेयर बाजारों (Share Markets) पर तुरंत हावी नहीं हो पाई। इसी हफ्ते, यानी 13 फरवरी 2026 को समाप्त सप्ताह में, Nifty 50 इंडेक्स 0.87% तक लुढ़क गया था, जिसका मुख्य कारण टेक्नोलॉजी सेक्टर में AI से जुड़ी चिंताएं थीं। बाद में 20 फरवरी तक इंडेक्स थोड़ा सुधरा, लेकिन यह दिखाता है कि बाजार की चाल, रिजर्व्स में बढ़ोतरी से थोड़ी अलग चल रही है।
भारत की ग्लोबल पोजीशन: रिजर्व्स का महासागर
यह रिकॉर्ड वृद्धि भारत को दुनिया भर में सबसे बड़े विदेशी मुद्रा भंडार रखने वाले देशों में से एक बनाती है। पिछले ग्यारह सालों में, भारत का फॉरेक्स रिजर्व दोगुना से भी ज्यादा हो गया है। यह भंडार अब 11 महीने से ज्यादा के आयात (Imports) को कवर करने के लिए काफी है, जो पहले के 6-8 महीने के बेंचमार्क से काफी बेहतर स्थिति है। यह स्थिति बीते वित्तीय संकटों के दौर से बिल्कुल अलग है। फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCAs) में $3.55 बिलियन की वृद्धि में डॉलर, यूरो और येन जैसी प्रमुख ग्लोबल करेंसी की मजबूती का भी हाथ है। वहीं, सोने के भंडार में $4.99 बिलियन का उछाल अंतरराष्ट्रीय बुलियन कीमतों में आई तेजी को दर्शाता है। इन भंडारों को RBI मैनेज करता है ताकि रुपये की स्थिरता बनी रहे और इकोनॉमी में लिक्विडिटी (Liquidity) बनी रहे।
वैल्यू और छुपे हुए खर्चे
हालांकि, इतने बड़े फॉरेक्स रिजर्व का एक पहलू यह भी है कि इनमें रखे पैसे पर मिलने वाला रिटर्न (Returns) अक्सर घरेलू निवेश (Domestic Investment) के मुकाबले कम होता है। इसे 'ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट' (Opportunity Cost) कहा जाता है। हालिया वृद्धि में एक बड़ा हिस्सा केवल वैल्यूएशन गेन्स (Valuation Gains) का है, यानी सोने और विदेशी करेंसी की कीमतों में उछाल से यह बढ़ा है, न कि सिर्फ नए कैपिटल इनफ्लो (Capital Inflows) से। यह दिखाता है कि रिजर्व्स में बढ़ोतरी के कुछ हिस्से पर हमारा सीधा कंट्रोल कम है। प्रमुख ग्लोबल करेंसीज की अपनी अस्थिरता (Volatility) भी FCAs के मूल्य को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि रिकॉर्ड रिजर्व्स के बावजूद, शेयर बाजार (Share Market) में कुछ गिरावट दिखी, क्योंकि निवेशक फिलहाल टेक्नोलॉजी सेक्टर जैसी अन्य चिंताओं पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
स्थिरता को बनाए रखना: आगे की राह
जानकारों का कहना है कि उथल-पुथल भरे ग्लोबल माहौल में भारत एक 'मैक्रोइकनॉमिक स्टेबिलिटी का नखलिस्तान' (Oasis of Macroeconomic Stability) बना हुआ है। यह मजबूत फॉरेक्स रिजर्व देश को बाहरी झटकों से लड़ने, कैपिटल फ्लो को संभालने और विदेशी निवेश (Foreign Investment) को आकर्षित करने में मदद करता है। RBI का यह सक्रिय प्रबंधन (Active Management) देश की आर्थिक स्थिरता और ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस (Global Competitiveness) के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है।
