महंगाई पर RBI की पैनी नजर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कीमतों में व्यापक वृद्धि की आशंका पर बारीकी से नजर रख रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि युद्ध से उत्पन्न सप्लाई शॉक (Supply Shocks) सामान्य मूल्य स्तर में घर कर सकते हैं, जिसके लिए मौद्रिक नीति (Monetary Policy) में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है। जून 2025 से, केंद्रीय बैंक एक न्यूट्रल पॉलिसी स्टैंड बनाए हुए है, जो उसे आर्थिक आंकड़ों के आधार पर अपनी रणनीति को ढालने की सुविधा देता है।
युद्ध का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $75 के स्तर से बढ़कर $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो अपनी 80% तेल की जरूरत आयात (Import) करता है। तेल की बढ़ी कीमतों से न केवल भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) डेफिसिट बढ़ेगा, बल्कि युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये (Rupee) में आई कमजोरी को भी बल मिलेगा। RBI की पॉलिसी ऐसे अस्थायी झटकों को अवशोषित करने के लिए 4% के लक्ष्य के आसपास उतार-चढ़ाव की अनुमति देती है।
महंगाई लक्ष्यीकरण के प्रति लचीला दृष्टिकोण
भारत के लचीले महंगाई लक्ष्यीकरण (Flexible Inflation Targeting) फ्रेमवर्क का लक्ष्य औसत 4% महंगाई दर रखना है, जिसमें 2% से 6% तक की गुंजाइश है। इस दृष्टिकोण को आर्थिक बदलावों को प्रबंधित करने के लिए जगह देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि इस प्रणाली ने पिछले दशक में औसत महंगाई को लगभग 2% अंक कम करने में मदद की है। उन्होंने उल्लेख किया कि साल 2022 में महंगाई केवल तीन तिमाहियों के लिए टारगेट से बाहर रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक की अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) की बैठक 3-5 जून, 2026 को निर्धारित है।