RBI की महंगाई पर पैनी नज़र! पश्चिम एशिया युद्ध के कारण बढ़ सकती हैं कीमतें, गवर्नर ने दी चेतावनी

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI की महंगाई पर पैनी नज़र! पश्चिम एशिया युद्ध के कारण बढ़ सकती हैं कीमतें, गवर्नर ने दी चेतावनी
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण भारत पर पड़ने वाले महंगाई (Inflation) के असर पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा है कि केंद्रीय बैंक स्थिति पर नियंत्रण के लिए अपनी न्यूट्रल पॉलिसी स्टैंस (Neutral Policy Stance) में बदलाव करने और जरूरत पड़ने पर कड़े कदम उठाने के लिए तैयार है, खासकर अगर सप्लाई शॉक (Supply Shocks) से कीमतों में लगातार और व्यापक वृद्धि होती है।

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महंगाई पर RBI की पैनी नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि केंद्रीय बैंक पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कीमतों में व्यापक वृद्धि की आशंका पर बारीकी से नजर रख रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि युद्ध से उत्पन्न सप्लाई शॉक (Supply Shocks) सामान्य मूल्य स्तर में घर कर सकते हैं, जिसके लिए मौद्रिक नीति (Monetary Policy) में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है। जून 2025 से, केंद्रीय बैंक एक न्यूट्रल पॉलिसी स्टैंड बनाए हुए है, जो उसे आर्थिक आंकड़ों के आधार पर अपनी रणनीति को ढालने की सुविधा देता है।

युद्ध का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर

इस संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें $75 के स्तर से बढ़कर $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। यह भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो अपनी 80% तेल की जरूरत आयात (Import) करता है। तेल की बढ़ी कीमतों से न केवल भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) डेफिसिट बढ़ेगा, बल्कि युद्ध शुरू होने के बाद से रुपये (Rupee) में आई कमजोरी को भी बल मिलेगा। RBI की पॉलिसी ऐसे अस्थायी झटकों को अवशोषित करने के लिए 4% के लक्ष्य के आसपास उतार-चढ़ाव की अनुमति देती है।

महंगाई लक्ष्यीकरण के प्रति लचीला दृष्टिकोण

भारत के लचीले महंगाई लक्ष्यीकरण (Flexible Inflation Targeting) फ्रेमवर्क का लक्ष्य औसत 4% महंगाई दर रखना है, जिसमें 2% से 6% तक की गुंजाइश है। इस दृष्टिकोण को आर्थिक बदलावों को प्रबंधित करने के लिए जगह देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि इस प्रणाली ने पिछले दशक में औसत महंगाई को लगभग 2% अंक कम करने में मदद की है। उन्होंने उल्लेख किया कि साल 2022 में महंगाई केवल तीन तिमाहियों के लिए टारगेट से बाहर रही थी। भारतीय रिजर्व बैंक की अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) की बैठक 3-5 जून, 2026 को निर्धारित है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.