India Economy: RBI का शानदार अनुमान, GDP ग्रोथ 7.4% पार!
ग्रोथ का इंजन: ट्रेड डील्स और सरकारी खर्च बने सहारा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट अर्थव्यवस्था में मजबूती का संकेत दे रही है। RBI ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ग्रोथ का अनुमान 7.4% रहने का अनुमान जताया है। यह उम्मीद हाल ही में अमेरिका और यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ हुए ट्रेड एग्रीमेंट्स से बढ़ी है, जिनसे एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, यूनियन बजट 2026-27 में इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर बढ़ाए गए सरकारी खर्च (Capital Expenditure) से प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और डोमेस्टिक कंजम्पशन को भी गति मिलेगी। इन सकारात्मक संकेतों का असर शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। BSE सेंसेक्स इस साल अब तक करीब 10% चढ़ चुका है, जबकि भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पिछले महीने 0.68% मजबूत होकर लगभग 90.92 के स्तर पर आ गया है।
ग्लोबल चार्ट पर भारत: एशिया में सबसे तेज
दुनिया भर की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत की ग्रोथ रेट काफी मजबूत रहने की उम्मीद है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) का अनुमान है कि 2026 में भारत दुनिया की जीडीपी ग्रोथ में 17% का योगदान देगा, जो चीन के 26.6% के बाद दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा होगा। कुल मिलाकर, भारत और चीन मिलकर दुनिया की 43% से अधिक की ग्रोथ को सपोर्ट करेंगे। वहीं, फिच एजेंसी भी भारत के लिए 6.4% की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगा रही है, लेकिन इसके बावजूद भारत एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। Allianz Trade भी 6.5% की अच्छी ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है, भले ही वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहें।
महंगाई और RBI का रुख: न्यूट्रल स्टान्स की वापसी
ग्रोथ के अच्छे अनुमानों के बीच, RBI महंगाई को लेकर थोड़ी सतर्कता बरत रहा है। कोर इन्फ्लेशन (महंगी धातुओं को छोड़कर) के शांत रहने की उम्मीद है, लेकिन बेस इफेक्ट्स और सोने की बढ़ती कीमतों के कारण चौथी तिमाही (Q4) में हेडलाइन इन्फ्लेशन 3.2% तक पहुंच सकती है। भू-राजनीतिक तनाव और एनर्जी प्राइसेस में अस्थिरता महंगाई को बढ़ा सकती है। हाल ही में अमेरिका-ईरान तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें $71 प्रति बैरल को पार कर गई हैं। इससे भारत के तेल आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है और फिस्कल डेफिसिट पर भी असर पड़ सकता है, जिसे FY27 के लिए 4.3% पर लक्षित किया गया है। इन परिस्थितियों को देखते हुए, मोनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपनी 'न्यूट्रल' पॉलिसी स्टान्स को बरकरार रखा है। यह RBI को मैक्रोइकॉनॉमिक कंडीशंस के आधार पर ब्याज दरों में लचीलापन बनाए रखने की सुविधा देता है। हालांकि, MPC के मिनट्स से यह भी पता चला कि एक सदस्य भविष्य में 'अकॉमोडेटिव' पॉलिसी की ओर बढ़ने के पक्ष में था। फिलहाल, 10-साल के भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 6.67% के आसपास बने हुए हैं।
जोखिम भरे रास्ते: भू-राजनीति और ट्रेड डील्स की चिंताएं
RBI की उम्मीदों के बावजूद, कई ऐसे फैक्टर हैं जिन पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है, जो $71 प्रति बैरल के पार चली गई हैं। यह भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है, क्योंकि इससे ऊर्जा आयात महंगा होगा और महंगाई एक बार फिर बढ़ सकती है। जनवरी 2026 में महंगाई दर 2.75% थी, जिसमें बढ़ोतरी का जोखिम है। इसके अलावा, हाल ही में हुए ट्रेड डील्स (EU और US के साथ) की पारदर्शिता और दीर्घकालिक प्रभावों पर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि एग्रीकल्चर और सर्विसेज जैसे संवेदनशील सेक्टरों को खोलने से घरेलू किसानों और छोटे-मझोले उद्योगों (MSMEs) को नुकसान पहुंच सकता है, साथ ही भारत की स्वतंत्र विकास नीतियों के दायरे को सीमित कर सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक मांग में बदलाव IT सेक्टर के लिए भी चुनौतियां पेश कर सकते हैं। भले ही घरेलू मांग मजबूत है, लेकिन इंपोर्ट का एक्सपोर्ट से ज्यादा होना (नेट एक्सटर्नल डिमांड ड्रैग) वैश्विक आर्थिक मंदी का संकेत देता है।
भविष्य की राह: निरंतर विकास की उम्मीद
आगे चलकर, यह अनुमान है कि भारत 2026 तक एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा। RBI अपनी अप्रैल की पॉलिसी मीटिंग के लिए नए जीडीपी और सीपीआई (CPI) डेटा पर करीब से नजर रखेगा। विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा स्थिर नीति दर, फिस्कल कंसॉलिडेशन और निवेश-संचालित ग्रोथ की पहल भारत को निरंतर आर्थिक प्रदर्शन के लिए तैयार करती है, बशर्ते बाहरी जोखिमों को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके।