RBI ने रोकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी! पर इन 2 वजहों से फिर हो सकती है Hike?

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI ने रोकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी! पर इन 2 वजहों से फिर हो सकती है Hike?
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी प्रमुख ब्याज दर (Repo Rate) को **5.25%** पर स्थिर रखा है और न्यूट्रल (Neutral) पॉलिसी स्टैंड बनाए रखा है। इसे कई लोगों ने एक 'डोविश पॉज' (Dovish Pause) के रूप में देखा है। हालांकि, भारतीय रुपये पर लगातार बना दबाव और ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी जोखिम भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत दे रहे हैं।

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RBI का फैसला और भविष्य की चिंताएं

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने लगातार छठी बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट 5.25% पर ही बना हुआ है। कमेटी ने अपना रुख भी न्यूट्रल रखा है, जिसका मतलब है कि फिलहाल महंगाई को काबू में लाने के लिए दरें बढ़ाने की तत्काल जरूरत नहीं दिख रही है। RBI का मानना है कि घरेलू ग्रोथ और महंगाई फिलहाल एक संतुलन में हैं।

रुपये पर दबाव और तेल का खेल

हालांकि, यह संतुलन नाजुक लग रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है और 83.25 के करीब ट्रेड कर रहा है। रुपये के कमजोर होने से इंपोर्टेड इन्फ्लेशन (आयातित महंगाई) बढ़ सकती है। RBI मुख्य रूप से कोर इन्फ्लेशन (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) पर फोकस कर रही है, लेकिन एक्सपर्ट्स को चिंता है कि कहीं तेल जैसी अस्थिर कमोडिटी की कीमतों में बड़ी उछाल को नजरअंदाज न कर दिया जाए।

बैंकों पर बढ़ी लागत का असर

इस बीच, भारतीय बैंक भी अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। मजबूत लोन ग्रोथ के बावजूद, ग्राहकों को डिपॉजिट (जमा) पर ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है, जिससे बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) यानी लोन से होने वाली कमाई और डिपॉजिट पर दिए जाने वाले ब्याज का अंतर, सिकुड़ रहा है।>

भविष्य में क्या हो सकता है?

RBI का यह 'पॉज़' (Pause) तब तक बना रह सकता है जब तक घरेलू इकोनॉमी स्थिर है और बाहरी हालात अनुकूल हैं। लेकिन, इंपोर्ट बिल बढ़ना, कमजोर रुपया और क्रूड ऑयल जैसी कमोडिटी की कीमतों में अचानक तेजी RBI को अपनी पॉलिसी वापस बदलने पर मजबूर कर सकती है। खासकर, यदि ग्लोबल सप्लाई चेन में गड़बड़ियां होती हैं या जियो-पॉलिटिकल टेंशन बढ़ती है, तो RBI को फाइनेंशियल ईयर के दूसरे हाफ में ब्याज दरें बढ़ाने का कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.