भारत की दमदार ग्रोथ पर मंडराते खतरे
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.6% रहने का अनुमान लगाया है। यह अनुमान मुख्य रूप से देश के अंदरूनी खपत (domestic consumption) और निवेश (investment) में मजबूती से प्रेरित है। हालांकि, अंदरूनी ताकत के बावजूद, RBI बाहरी चुनौतियों को लेकर चिंतित है। FY26 के लिए 7.6% के अनुमान की तुलना में, वित्त वर्ष 2027 (FY27) के लिए ग्रोथ का अनुमान थोड़ा घटकर 6.9% रहने की संभावना है, जो आगे आने वाली मुश्किलों का संकेत देता है। फरवरी तक के आर्थिक आंकड़े घरेलू मोर्चे पर गति बनी रहने का संकेत दे रहे थे, लेकिन हाल ही में भारतीय शेयर बाजारों (equity markets) में बढ़ी अस्थिरता और बॉन्ड यील्ड (bond yields) में बढ़ोतरी ग्लोबल निवेशकों की सावधानी को दर्शाती है।
भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल का बढ़ता दाम
पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, हाल के समय में भारत के आर्थिक भविष्य के लिए एक बड़ा खतरा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों में किसी भी तरह की बाधा ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है और आयात लागत बढ़ा सकती है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है। अगर कच्चे तेल की कीमतें $90 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत का चालू खाता घाटा (current account deficit) जीडीपी का लगभग 2.5% तक बढ़ सकता है। चिंताएं यह भी हैं कि 7.6% ग्रोथ का अनुमान तभी सही साबित होगा जब बाहरी झटके सीमित रहें। अगर भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण तेल की कीमतें लगातार $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो यह जीडीपी ग्रोथ को 0.5% से 1.0% तक कम कर सकता है और घाटे को काफी बढ़ा सकता है। वैश्विक मंदी (global slowdown) भारतीय एक्सपोर्ट्स की मांग को भी कम कर सकती है और विदेशों से आने वाले पैसे (remittances) को घटा सकती है। वहीं, अगर वैश्विक मंदी गहराती है तो इन प्रवाहों पर और भी बुरा असर पड़ेगा। लगातार ऊंची ऊर्जा लागत और संभावित मौसम संबंधी समस्याएँ जो खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं, RBI पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव डाल सकती हैं, जिससे घरेलू ग्रोथ धीमी हो सकती है।
RBI ने रेपो रेट को रखा स्थिर
इन बदलती परिस्थितियों को देखते हुए, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने पॉलिसी रेपो रेट (policy repo rate) को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। सेंट्रल बैंक ने अपना 'न्यूट्रल' यानी तटस्थ रुख (neutral stance) बरकरार रखा है, जो आर्थिक आंकड़ों के अनुसार प्रतिक्रिया करने में लचीलेपन का संकेत देता है। ऐतिहासिक रूप से, RBI उच्च तेल कीमतों और महंगाई के दौर में दरों में बदलाव करता रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अगर बाहरी झटके बने रहते हैं तो वर्तमान स्थिर दृष्टिकोण पर दबाव पड़ सकता है।
पड़ोसी देशों की तुलना में भारत की ग्रोथ
भारत का 7.6% ग्रोथ का अनुमान कई उभरते बाजारों (emerging markets) से बेहतर है। ब्राजील और रूस जैसे देशों से 3% से 5% और चीन से 4.5% से 5.5% के आसपास ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि भारत की ग्रोथ की गति मजबूत है, लेकिन ऊर्जा आयात पर इसकी भारी निर्भरता इसे तेल की कीमतों के झटकों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है, जो इसके कई प्रतिस्पर्धियों के साथ साझा नहीं की जाने वाली एक कमजोरी है।
विश्लेषकों की चिंताएं
विश्लेषक आम तौर पर भारत के मजबूत घरेलू आर्थिक आधार को स्वीकार करते हैं, लेकिन वे बाहरी जोखिमों के बढ़ने को लेकर महत्वपूर्ण चिंताएं साझा करते हैं। वे आगाह करते हैं कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो अनुमानित चालू खाता घाटा (current account deficit) काफी बढ़ सकता है। इन मजबूत घरेलू ताकतों को महत्वपूर्ण वैश्विक अनिश्चितताओं के खिलाफ संतुलित करने की RBI की क्षमता भारत के आर्थिक प्रदर्शन को आकार देने में महत्वपूर्ण होगी।