आर्थिक ग्रोथ में तेज़ी, RBI का बड़ा बूस्ट
भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर अपनी मजबूती दिखा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए देश के GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.4% कर दिया है, जो पहले 7.3% था। यह बढ़त घरेलू मांग (Domestic Demand) में मजबूती, सर्विस सेक्टर के विस्तार और मैन्युफैक्चरिंग में हो रहे सुधार का नतीजा है। दुनिया भर में आर्थिक ग्रोथ की रफ्तार धीमी रहने की उम्मीद है, ऐसे में भारत का यह प्रदर्शन काफी अहम है। कई बड़े ब्रोकरेज हाउस जैसे गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) और डेलॉइट (Deloitte) भी भारत की ग्रोथ पर भरोसा जता रहे हैं।
इस सकारात्मक माहौल के बीच, RBI ने अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया है। मुख्य रेपो रेट 5.25% पर ही बना हुआ है। RBI का यह फैसला इकोनॉमी को सपोर्ट करने और महंगाई को कंट्रोल में रखने की उसकी रणनीति को दर्शाता है। आपको बता दें कि RBI पिछले साल यानी 2025 में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स (bps) की कटौती कर चुका है, जिससे लोन लेना सस्ता हुआ है और इकोनॉमी को सहारा मिला है।
महंगाई पर लगाम, पॉलिसी को मिली राहत
दुनिया भर में महंगाई (Inflation) एक बड़ी चिंता बनी हुई है, लेकिन भारत में स्थिति काफी हद तक काबू में है। RBI का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में महंगाई दर 2.1% के आसपास रहेगी। अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान महंगाई औसतन 1.7% रही है, जो RBI के टॉलरेंस बैंड (Tolerance Band) के भीतर है। हालांकि, RBI ने FY26 और FY27 की पहली छमाही के लिए महंगाई के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी की है, जिसका मुख्य कारण कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतें बताई जा रही हैं, न कि देश में व्यापक आधार पर बढ़ी महंगाई।
इस तरह महंगाई के काबू में रहने से RBI को ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त गुंजाइश (Policy Space) मिल रही है, जो कई विकसित देशों के लिए एक चुनौती बनी हुई है。 RBI वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और खराब मौसम जैसी संभावित जोखिमों पर भी पैनी नजर रखे हुए है。
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) से इकोनॉमी को बूस्ट
भारत के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि यूरोपियन यूनियन (EU) और अमेरिका के साथ हुए महत्वपूर्ण फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) से इकोनॉमी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। EU-India FTA भारत के सबसे महत्वाकांक्षी व्यापारिक समझौतों में से एक है, जिससे 2032 तक EU के सामानों का भारत में एक्सपोर्ट दोगुना होने का अनुमान है। यह समझौता भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगा। इसी तरह, अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते से भी एक्सपोर्ट और निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जो नेट एक्सटर्नल डिमांड (Net External Demand) में आने वाली किसी भी कमी को पूरा कर सकता है। ये रणनीतिक कदम बढ़ते वैश्विक व्यापार तनाव और संरक्षणवाद (Protectionism) के खिलाफ भारत के लिए एक मजबूत ढाल का काम करेंगे।